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जापान ने खरीदा विवादित सेनकाकू द्वीप

बीजिंग/टोक्यो

Updated Fri, 14 Sep 2012 01:19 PM IST
japan buys disputed senkaku islands from private owner
जापान ने चीन की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए पूर्वी चीन सागर के विवादित द्वीपों को खरीद लिया है। जापान में इन्हें सेनकाकू और चीन में दिओयू के नाम से जाना जाता है। जापान के इस कदम से दोनों देशों में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
इन द्वीपों पर अपना दावा मजबूत करने के लिए चीन ने अपने दो गश्ती जहाज भेजे हैं। उसने आरोप लगाया है कि जापान खतरे से खेल रहा है। जापान ने इस बात पर जोर दिया है कि उसने केवल शांतिपूर्ण इरादे से पूर्वी चीन सागर के तीन निर्जन द्वीपों को लगभग 2.6 करोड़ डॉलर में खरीदा है। अब तक जापान ने इन द्वीपों को एक जापानी परिवार से लीज पर ले रखा था। ये द्वीप इस परिवार के पास पिछली सदी के आठवें दशक से थे। जापान के विदेश मंत्री कोइचिरो गेंबा ने कैबिनेट बैठक में इस लेनदेन को मंजूरी दिए जाने के बाद कहा, ‘हम इस मुद्दे के कारण जापान और चीन के संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचा सकते हैं।’

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा है कि दोनों चौकसी पोत देश की संप्रभुता सुनिश्चित कराने के लिए दियाओयू द्वीपों के आसपास पहुंच गए हैं। यह कदम तब उठाया गया है, जब कुछ घंटे पहले ही बीजिंग स्थित जापानी राजदूत को विदेश मंत्रालय में बुलाकर द्वीपों के इस समूह में से तीन द्वीपों को खरीदने के जापान के निर्णय पर आपत्ति दर्ज कराई गई। जापान सरकार ने कहा है कि इन द्वीपों पर जापानी तटरक्षकों का अधिकार होगा। चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा है कि ये द्वीप चीनी भूभाग के अभिन्न हिस्सा हैं, और उन्होंने संकल्प लिया है कि उनका देश अपनी संप्रभुता पर एक इंच पीछे नहीं हट सकता।

चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा, चीन सरकार घोषणा करती है कि इन द्वीपों को खरीदने की कोशिश बिल्कुल अवैध है। बयान में कहा गया है, इससे जापान के अतिक्रमण और चीनी क्षेत्र पर उसके कब्जे तथा दियाओयू द्वीपों तथा उससे लगे टापुओं पर चीन की संप्रभुता के ऐतिहासिक तथ्य कभी नहीं बदले जा सकते। बयान में कहा गया है कि जापान की एकतरफा कार्रवाई के होने वाले किसी भी गंभीर परिणाम के लिए वह जिम्मेदार होगा।

पूर्व चीन सागर में स्थित इन विवादित द्वीपों पर ताईवान भी दावा करता है। ये द्वीप महत्वपूर्ण पोत-परिवहन मार्ग पर पड़ते हैं और उनके चारों ओर हाइड्रोकार्बन के विशाल भंडार हैं। दोनों एशियाई ताकतों के बीच मौजूदा तनाव अगस्त में उस समय शुरू हुआ है, जब चीन समर्थक कार्यकर्ता इनमें से एक द्वीप पर पहुंचे थे। जापानी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था और वापस चीन भेज दिया था। उसके कुछ ही दिनों बाद दर्जन भर जापानी नागरिकों ने उसी द्वीप पर जापानी ध्वज फहराया, जिसके प्रतिक्रियास्वरूप पूरे चीन में विरोध प्रदर्शन हुए।

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