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China: क्या चीन अपनी अच्छी छवि बनाने के लिए ले रहा है जोर-जबरदस्ती का सहारा?

Thu, 17 Nov 2022 05:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 17 Nov 2022 05:53 PM IST
सार

China: फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सूचना तंत्र के प्रमुख हिस्सों पर चीन का प्रभाव बढ़ा है। इसके तहत चीन ने अपने संदेशों को मन-माफिक ढंग से पहुंचाने की मुहिम तेज कर रखी है। चीन अब विदेशी मीडिया पर निर्भर नहीं कर रहा है...

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China wants to clean its image by force
China- Xi Jinping - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अपने बारे में नकारात्मक खबरों पर लगाम लगाने के लिए चीन सरकार ने दुनिया भर की सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है। ये दावा अमेरिका सरकार से जुड़ी संस्था फ्रीडम हाउस ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन सरकार विभिन्न देशों की सरकार पर चीन की सकारात्मक छवि बनाने के लिए दबाव डाल रही है। हाल में जोर-जबरदस्ती की ऐसी घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

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फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के सूचना तंत्र के प्रमुख हिस्सों पर चीन का प्रभाव बढ़ा है। इसके तहत चीन ने अपने संदेशों को मन-माफिक ढंग से पहुंचाने की मुहिम तेज कर रखी है। चीन अब विदेशी मीडिया पर निर्भर नहीं कर रहा है। चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में ये राय बनी है कि विदेशी मीडिया ने उसके प्रति विरोधी रुख अपना रखा है।

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फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट पर आधारित ईस्ट एशिया फोरम के एक आलेख में कहा गया है कि चीन ने दुनिया भर में अपने मीडिया की पहुंच बनाने की कोशिश की है। इसकी शुरुआत टीवी चैनल सीजीटीएन (जिसका शुरुआत में नाम सीसीटीवी था) लॉन्च करने से की गई। 2008 के बाद इस चैनल के लिए सरकारी अनुदान में तेजी से इजाफा हुआ। उसके बाद चीन ने दूसरे देशों के मीडिया संस्थानों को प्रभावित करने की कोशिश शुरू की।

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लेकिन कुछ विश्लेषकों ने राय जताई है कि चीन की ये कोशिश ज्यादा कामयाब नहीं हुई है। ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स में राजनीति और चीन के अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के लेक्चरर किंग्सले एडनी ने हाल में आई एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के नतीजों का उल्लेख किया है। इसे सर्वे से सामने आया था कि दुनिया के कई हिस्सों में चीन के प्रति लोगों की राय नकारात्मक बनी हुई है। हालांकि एडनी ने यह भी कहा है कि पश्चिमी देशों के राजनेताओं को जनमत के इस रुझान के भरोसे नहीं बैठे रहना चाहिए, बल्कि उन्हें चीन के प्रचार को लेकर सतर्क रहना चाहिए। चीन लगातार पश्चिमी देशों में मौजूद नस्लभेदी भावनाओं को और भड़का रहा है, जिसका फायदा उन देशों के धुर दक्षिणपंथी समूह उठा सकते हैं।

फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में पश्चिमी देशों को सलाह दी गई है कि वे अपने यहां पारदर्शिता संबंधी नियमों को लागू करें और मीडिया पर विदेशी मालिकाने को सीमित करने के कदम उठाएं। उन्हें मीडिया पर चीन के प्रभाव को इस तरह नियंत्रित करना चाहिए, जो लोगों को उचित महसूस हो और यह धारणा ना बने कि उदारवादी मूल्यों की अनदेखी की जा रही है। फ्रीडम हाउस ने यह चेतावनी भी दी है कि ऐसे कदमों को उठाने के बावजूद यह गारंटी नहीं की जा सकती कि भविष्य में चीन का प्रभाव नहीं बढ़ेगा।

विश्लेषकों ने कहा है कि गुजरे दशकों में चीन के साथ पश्चिम के सामाजिक और आर्थिक संबंधों का विस्तार हुआ था। उससे सार्वजनिक चर्चा पर चीन का प्रभाव बनाना लाजिमी था। अब उचित यह होगा कि इस प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने के बजाय इसे अहानिकर बनाने के उपाय किए जाएं।

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