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ऑकुस का जवाब: चीन और रूस की नौसेना ने मिलाया हाथ, अमेरिका पर दबाव बढ़ाने की तैयारी

Wed, 20 Oct 2021 08:23 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, हांगकांग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 20 Oct 2021 08:23 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों की राय है कि चीन और रूस के इस अभ्यास के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की तरफ से दबाव बढ़ाने की रणनीति को और आगे बढ़ाया जा सकता है। सुगारू जलडमरूमध्य में सोमवार को रूस और चीन के पांच-पांच लड़ाकू जहाज गुजरे। जापान के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है।

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China Targets AUKUS By Joining Hands With China preparing to increase pressure on America Latest News Update
दक्षिण चीन सागर में चीनी पोत (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुगारू जलडमरूमध्य में चीन और रूस की नौसेनाओं के साझा अभ्यास ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तनाव की एक और मिसाल पेश की है। रूस की नौसेना को दुनिया की सबसे मजबूत नौसेनाओं में गिना जाता है। उसका चीन के साथ आकर जापान के लिए संवेदनशील इलाके में अभ्यास करना एक अहम घटना है। चीनी पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ये अभ्यास अमेरिका के नए रक्षा गठबंधन ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंगडम- यूनाइटेड स्टेट्स) को दिया गया एक माकूल जवाब है।

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पर्यवेक्षकों की राय है कि चीन और रूस के इस अभ्यास के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की तरफ से दबाव बढ़ाने की रणनीति को और आगे बढ़ाया जा सकता है। सुगारू जलडमरूमध्य में सोमवार को रूस और चीन के पांच-पांच लड़ाकू जहाज गुजरे। जापान के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक यह पहला मौका है, जब जापान ने चीन और रूस के उस जल क्षेत्र से गुजरने की पुष्टि की है।
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ये जल क्षेत्र सिर्फ 19 किलोमीटर चौड़ा है। यही जल क्षेत्र प्रशांत महासागर से जापान को अलग करता है। इस जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र माना जाता है। इसलिए जानकारों के मुताबिक, रूस और चीन के लड़ाकू जहाजों ने जापान के जल क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया। इसके बावजूद दक्षिण चीन सागर में जारी तनाव के बीच रूस के यहां पहुंचने का दूरगामी महत्व है। जापान के चीन और रूस दोनों के साथ इलाकाई विवाद हैं।    
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चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट में कहा है कि इस साझा अभ्यास से यह संकेत मिला है कि रूस और चीन के बीच राजनीतिक और सैनिक स्तर पर गहरा आपसी विश्वास है। अखबार ने चीनी विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि जिस समय जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे अपने सहयोगी देशों को साथ लेकर अमेरिका गिरोहबंदी कर रहा है, उस समय रूस और चीन ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कायम रखने के लिए द्विपक्षीय भरोसे का परिचय दिया है।’

चीन की सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के नौसेना अनुसंधान अकादमी में सीनियर रिसर्च फेलॉ झांग जुनशे ने ग्लोबल टाइम्स से कहा कि सुगारु जलडमरूमध्य किसी देश के जल क्षेत्र का हिस्सा नहीं है। इसलिए किसी भी देश को वहां से गुजरने का अधिकार है। इसलिए चीनी और रूसी लड़ाकू जहाजों का वहां से गुजरना पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानून और सामान्य व्यवहार के अनुरूप है।

जापान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि रूसी और चीनी जहाजों ने जापान के जल क्षेत्र का उल्लंघन नहीं किया है, लेकिन जापान सरकार के उप कैबिनेट सचिव योशिहिको इसोजाकी ने कहा है कि जापान रूसी और चीनी जहाजों की गतिविधियों पर निकटता से नजर रखे हुए है। जापान अपने जल और वायु क्षेत्रों की सख्ती से निगरानी करता रहेगा।


पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि चीनी मीडिया ने इस अभ्यास को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों से जोड़ कर देखा है। इसका साफ संकेत है कि चीन और रूस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक नौसैनिक धुरी बनाने की कोशिश कर रहे हैँ।

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