फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   China strengthening its hold on Tibet, forcing to erase Dalai Lama's identity

तिब्बत पर पकड़ मजबूत कर रहा चीन, दलाई लामा की पहचान मिटाने पर कर रहा मजबूर 

Wed, 17 Feb 2021 06:15 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: Amit Mandal Updated Wed, 17 Feb 2021 06:15 AM IST
विज्ञापन
China strengthening its hold on Tibet, forcing to erase Dalai Lama's identity
चीन - फोटो : पिक्साबे
चीन लगातार तिब्बत पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हर वह हथकंडा अपना रहा है जो तिब्बतियों को धर्म पर कम ध्यान देने के लिए मजबूर कर रहा है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन इस क्षेत्र में तिब्बतियों को राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए अधिक उत्साह दिखाने के लिए भी मजबूर कर रहा है।
विज्ञापन


बीजिंग ने तिब्बतियों की पहचान को कुचलने के लिए उनके धार्मिक जीवन से दलाई लामा की पहचान को जड़ से उखाड़ने की कोशिशें तेज कर दी हैं। द इकोनॉमिक्स के मुताबिक, शिनजियांग में मुस्लिम अनुयायियों की तरह यहां भी तिब्बती धर्म की निंदा के लिए सीसीपी एक मुहिम चला रही है। इसके लिए तिब्बत और शिनजियांग में चीनी अधिकारियों ने लोगों के धर्म और सांस्कृतिक परंपराओं पर हमले शुरू कर दिए हैं। उइगरों मुस्लिमों को जहां शिनजियांग के पुनरुत्थान केंद्रों में भेजा गया है, वहीं तिब्बती किसानों को आधुनिक आवासों या शहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसी तरह, तिब्बती भाषा को भी शिनजियांग के समान मंदारिन के साथ बदल दिया गया है। बता दें कि चीन ने 1950 में तिब्बत पर कब्जा कर लिया था जबकि 1959 में दलाई लामा निर्वासित होकर भारत आ गए। 
विज्ञापन


दलाई लामा की तस्वीरों पर रोक
जिस तरह से शिनजियांग प्रांत के उइगर मुस्लिम मक्का की तीर्थयात्रा पर नहीं जा सकते, उसी प्रकार तिब्बतियों का दलाई लामा की धार्मिक शिक्षाओं में भाग लेने के लिए भारत यात्रा करना भी लगभग असंभव हो गया है। हालांकि उइगरों के विपरीत तिब्बतियों को वीचैट एप के प्रयोग की अनुमति है। लेकिन दलाई लामा की तस्वीरों को पोस्ट करना प्रतिबंधित है और इसके लिए एक साल की जेल भी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीपीईसी : चीन ने परियोजनाओं पर नहीं की फंडिंग
चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर पाकिस्तान सीनेट की विशेष समिति ने कहा है कि  सीपीईसी के तहत किसी भी बुनियादी ढांचा परियोजना को चीन ने वित्तपोषित नहीं किया है। पाक योजना मंत्रालय में परिवहन योजना प्रमुख सीनेटर सिकंदर मंदरू ने एक बैठक में कहा कि सीपीईसी की फंडिंग के अभाव में कुछ परियोजनाएं रुकी पड़ी हैं। इस बीच, समिति के सदस्य सीनेटर कबीर अहमद शाही ने बताया कि सीपीईसी पर सिर्फ कागजी कार्रवाई की गई थी। इसके तहत ग्वादर स्मार्ट पोर्ट सिटी मास्टर प्लान के तहत परियोजनाएं तक शुरू नहीं की गई हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed