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चीन की नई चाल: एलएसी पर तनाव के बीच ड्रैगन ने भारतीय सीमा के पास शुरू की पहली बुलेट ट्रेन
Fri, 25 Jun 2021 01:43 PM IST
डिंपल अलावाधी
पीटीआई, बीजिंग
पीटीआई, बीजिंग
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Fri, 25 Jun 2021 01:43 PM IST
सार
चीन ने तिब्बत के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में पहली बुलेट ट्रेन का परिचालन शुरू किया। यह प्रांतीय राजधानी लहासा और नियंगची को जोड़ेगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Twitter
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विस्तार
चीन ने भारत सीमा के पास तिब्बत में पहली बुलेट ट्रेन सेवा शुरू कर दी है। चीन ने तिब्बत के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में पहली पूरी तरह बिजली से चालित बुलेट ट्रेन का शुक्रवार को परिचालन शुरू किया जो प्रांतीय राजधानी लहासा और नियंगची को जोड़ेगी। नियंगची अरुणाचल प्रदेश के करीब स्थित तिब्बत का सीमाई नगर है।
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सिचुआन-तिब्बत रेलवे के 435.5 किलोमीटर लंबे लहासा-नियंगची खंड का एक जुलाई को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के शताब्दी समारोहों से पहले उद्घाटन किया गया है। सरकारी समाचार एजेंसी 'शिन्हुआ' ने खबर दी कि तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में पहले विद्युत चालित रेलवे की शुक्रवार सुबह से शुरुआत हुई जो लहासा से नियंगची तक गई जहां 'फूक्सिंग' बुलेट ट्रेनों का पठारी क्षेत्र में आधिकारिक परिचालन शुरू हुआ।
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चीनी राष्ट्रपति ने दिया था परियोजना का काम तेज गति से करने का निर्देश
सिचुआन-तिब्बत रेलवे किंगहाई-तिब्बत रेलवे के बाद तिब्बत में दूसरी रेलवे होगी। यह किंगहाई-तिब्बत पठार के दक्षिण-पूर्व क्षेत्र से होकर गुजरेगी जो विश्व के भूगर्भीय रूप से सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। नवंबर में, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अधिकारियों को सिचुआन प्रांत को तिब्बत में नियंगची से जोड़ने वाली नई रेलवे परियोजना का काम तेज गति से करने का निर्देश दिया था और कहा था कि नई रेल लाइन सीमा स्थिरता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
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चेंगदू से लहासा की यात्रा 48 घंटे से कम होकर 13 घंटे
सिचुआन-तिब्बत रेलवे की शुरुआत सिचुआन प्रांत की राजधानी, चेंगदू से होगी और यान से गुजरते हुए कामदो के जरिए तिब्बत में प्रवेश करेगी जिससे चेंगदू से लहासा की यात्रा 48 घंटे से कम होकर 13 घंटे रह जाएगी। नियंगची मेडोग का प्रांतीय स्तर का शहर है जो अरुणाचल प्रदेश सीमा से सटा हुआ है।
अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है चीन
चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है जिसे भारत पुरजोर तरीके से खारिज करता है। भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर है। शिंगहुआ यनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट के शोध विभाग के निदेशक कियान फेंग ने सरकारी दैनिक 'ग्लोबल टाइम्स' को पूर्व में बताया था कि, 'चीन-भारत सीमा पर अगर संकट का कोई परिदृश्य बनता है तो रेलवे चीन को रणनीतिक सामग्रियां पहुंचाने में बहुत सुविधा देगी।'