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कुरान और बाइबल को अपने तरीके से लिखने जा रहा चीन, कम्युनिस्ट विचारधारा रहेगी हावी
Tue, 31 Dec 2019 09:13 AM IST
अनवर अंसारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 31 Dec 2019 09:13 AM IST
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शी जिनपिंग
- फोटो : Social media
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चीन उइगुर अल्पसंख्यकों को बड़ी संख्या में हिरासत केंद्र में रखने के साथ वह धार्मिक ग्रंथों को दोबारा लिखने का काम भी करने जा रहा है। चीन की कम्यूनिस्ट सरकार ने फैसला किया है कि यह समाजवादी मूल्यों को प्रतिबिंबित करने के लिए फिर से कुरान और बाइबल को लिखेगा। माना जा रहा है कि इस तरह वह अपनी विचारधारा को चीनी अल्पसंख्यकों तक पहुंचा पाएगा।
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चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक उच्च अधिकारी के अनुसार, इन दोनों पवित्रों ग्रंथों के नए संस्करण में कोई भी ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए, जो कम्युनिस्ट पार्टी की मान्यताओं के खिलाफ हो। अधिकारी के अनुसार, सेंसर द्वारा गलत समझे जाने वाले पैराग्राफ में संशोधन या उसे फिर से अनुवाद किया जाएगा।
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हालांकि संशोधनों के लिए बाइबल और कुरान का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया था, कम्युनिस्ट पार्टी ने ऐसे धार्मिक धर्मशास्त्रों के व्यापक मूल्यांकन का आह्वान किया, जो उन सामाग्रियों को लक्षित करते हैं जो वर्तमान समय की प्रगति के अनुरूप नहीं हैं या उनमें पुरातन विचारों की झलक है।
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इन धार्मिक ग्रथों में संशोधन का यह आदेश नवंबर में चीन की 'जातीय और धार्मिक मामलों की समिति' के एक अंग 'चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेंट कॉन्फ्रेंस' द्वारा आयोजित एक बैठक के दौरान दिया गया था, जो चीन में जातीय और धार्मिक मामलों की देखरेख करता है।
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, पिछले महीने में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की केंद्रीय समिति के 16 विशेषज्ञों, विश्वासियों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के एक समूह ने इस बैठक में भाग लिया। बैठक की देखरेख 'चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेंट कॉन्फ्रेंस' के अध्यक्ष वांग यांग ने की थी।
बैठक में वांग ने जोर देकर कहा कि धार्मिक अधिकारियों को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देशों का पालन करना चाहिए और विभिन्न धर्मों की विचारधाराओं की व्याख्या समाजवाद के मूल मूल्यों और वर्तमान युग की आवश्यकताओं के अनुसार करनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से चीनी विशेषताओं के साथ चलने वाली एक धार्मिक प्रणाली बनाने का आग्रह किया। अधिकारियों ने वांग के निर्दशों पर अपनी सहमित व्यक्त की। अधिकारियों ने कहा कि वह धार्मिक पुस्तकों का पुनर्मूल्यांकन करके, वे चरम विचारों और विधर्मी विचारों को देश को खत्म करने से रोकेंगे।