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China: चीन ने ट्रंप के 'गुप्त परमाणु परीक्षण' के दावे को किया खारिज, चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
Tue, 04 Nov 2025 03:49 AM IST
लव गौर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: लव गौर
Updated Tue, 04 Nov 2025 03:49 AM IST
सार
Nuclear Test: चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को पूरी तरह झूठा बताते हुए खारिज कर दिया है कि बीजिंग गुप्त रूप से परमाणु हथियारों के परीक्षण कर रहा है। ट्रंप ने सीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया था कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान जैसे देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, इसलिए अमेरिका को भी अपने परमाणु परीक्षण कार्यक्रम को फिर से शुरू करना चाहिए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो)
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें दावा किया गया कि चीन गुप्त रूप से परमाणु हथियार परीक्षण कर रहा है। चीन ने इस आरोप को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से झूठा करार दिया है।
रविवार को सीबीएस के साथ एक साक्षात्कार में ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार (03 नवंबर) को कहा कि बीजिंग एक आत्मरक्षात्मक परमाणु रणनीति पर कायम है और परमाणु परीक्षणों पर अपने प्रतिबंध का पालन करता है।
चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
ग्लोबल टाइम्स के हवाले से माओ ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक स्थायी सदस्य और एक परमाणु-हथियार संपन्न देश के रूप में चीन परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल ना करने की नीति का पालन करता है, एक आत्मरक्षात्मक परमाणु रणनीति बनाए रखता है और परमाणु परीक्षण स्थगित करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करता है।"
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अमेरिका से वैश्विक स्थिरता की अपील
उन्होंने आगे कहा कि चीन व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) का समर्थन करता है और अमेरिका से उसी संधि के तहत "अपने दायित्वों का पालन" करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि अमेरिका भी परमाणु परीक्षण पर अपनी रोक बरकरार रखेगा और वैश्विक स्थिरता में योगदान देगा।"
ये भी पढ़ें: Trump: 'हमारे पास दुनिया को तबाह करने के लिए पर्याप्त हथियार', परमाणु परीक्षण पर ट्रंप का चौंकाने वाला बयान
ट्रंप ने चीन सहित कई देशों को लेकर किया दावा
दरअसल, इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश पहले से ही परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, और उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अपना परीक्षण कार्यक्रम फिर से शुरू करना चाहिए। सीबीएस से ट्रंप ने कहा, “रूस और चीन परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन कोई इस पर बात नहीं करता। हम एक खुले समाज हैं। अन्य देश परीक्षण कर रहे हैं, और हम अकेले हैं जो नहीं कर रहे। इसलिए हम भी परीक्षण करेंगे।”
ट्रंप ने ये टिप्पणियां तब की, जब उनसे रूस के हाल ही में पोसाइडन अंडरवाटर ड्रोन सहित उन्नत परमाणु-सक्षम प्रणालियों के परीक्षणों के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, "आपको देखना होगा कि वे कैसे काम करते हैं। मैं परीक्षण इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि रूस ने घोषणा की थी कि वे परीक्षण करने जा रहे हैं। अगर आप गौर करें, तो उत्तर कोरिया लगातार परीक्षण कर रहा है। दूसरे देश भी परीक्षण कर रहे हैं। हम अकेले ऐसे देश हैं जो परीक्षण नहीं करते। और मैं अकेला ऐसा देश नहीं बनना चाहता जो परीक्षण ना करे।"
ये भी पढ़ें: Op Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य संघर्ष PAK-चीन गठजोड़ का सबूत'; पूर्व विदेश सचिव ने दिया बड़ा बयान
अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार
ट्रंप ने साक्षात्कार के दौरान कहा, "हम भी दूसरे देशों की तरह परमाणु हथियारों का परीक्षण करेंगे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास "किसी भी अन्य देश से ज्यादा परमाणु हथियार" हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास इतनी परमाणु हथियार क्षमता है कि हम दुनिया को 150 बार नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत होंगे। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने रूस द्वारा हाल ही में उन्नत परमाणु-सक्षम प्रणालियों के परीक्षणों का हवाला देते हुए परमाणु हथियारों के परीक्षण को तुरंत फिर से शुरू करने की घोषणा की, जो दोनों परमाणु शक्तियों के बीच एक बड़े तनाव का संकेत है।
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रविवार को सीबीएस के साथ एक साक्षात्कार में ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार (03 नवंबर) को कहा कि बीजिंग एक आत्मरक्षात्मक परमाणु रणनीति पर कायम है और परमाणु परीक्षणों पर अपने प्रतिबंध का पालन करता है।
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चीनी विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
ग्लोबल टाइम्स के हवाले से माओ ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक स्थायी सदस्य और एक परमाणु-हथियार संपन्न देश के रूप में चीन परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल ना करने की नीति का पालन करता है, एक आत्मरक्षात्मक परमाणु रणनीति बनाए रखता है और परमाणु परीक्षण स्थगित करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करता है।"
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अमेरिका से वैश्विक स्थिरता की अपील
उन्होंने आगे कहा कि चीन व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) का समर्थन करता है और अमेरिका से उसी संधि के तहत "अपने दायित्वों का पालन" करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि अमेरिका भी परमाणु परीक्षण पर अपनी रोक बरकरार रखेगा और वैश्विक स्थिरता में योगदान देगा।"
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ट्रंप ने चीन सहित कई देशों को लेकर किया दावा
दरअसल, इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश पहले से ही परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, और उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अपना परीक्षण कार्यक्रम फिर से शुरू करना चाहिए। सीबीएस से ट्रंप ने कहा, “रूस और चीन परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन कोई इस पर बात नहीं करता। हम एक खुले समाज हैं। अन्य देश परीक्षण कर रहे हैं, और हम अकेले हैं जो नहीं कर रहे। इसलिए हम भी परीक्षण करेंगे।”
ट्रंप ने ये टिप्पणियां तब की, जब उनसे रूस के हाल ही में पोसाइडन अंडरवाटर ड्रोन सहित उन्नत परमाणु-सक्षम प्रणालियों के परीक्षणों के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, "आपको देखना होगा कि वे कैसे काम करते हैं। मैं परीक्षण इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि रूस ने घोषणा की थी कि वे परीक्षण करने जा रहे हैं। अगर आप गौर करें, तो उत्तर कोरिया लगातार परीक्षण कर रहा है। दूसरे देश भी परीक्षण कर रहे हैं। हम अकेले ऐसे देश हैं जो परीक्षण नहीं करते। और मैं अकेला ऐसा देश नहीं बनना चाहता जो परीक्षण ना करे।"
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अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार
ट्रंप ने साक्षात्कार के दौरान कहा, "हम भी दूसरे देशों की तरह परमाणु हथियारों का परीक्षण करेंगे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के पास "किसी भी अन्य देश से ज्यादा परमाणु हथियार" हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास इतनी परमाणु हथियार क्षमता है कि हम दुनिया को 150 बार नष्ट कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत होंगे। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने रूस द्वारा हाल ही में उन्नत परमाणु-सक्षम प्रणालियों के परीक्षणों का हवाला देते हुए परमाणु हथियारों के परीक्षण को तुरंत फिर से शुरू करने की घोषणा की, जो दोनों परमाणु शक्तियों के बीच एक बड़े तनाव का संकेत है।