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'निठल्ले न साबित हों': नौकरी पर जाने का दिखावा कर रहे चीन के युवा, जानें क्यों-कितना बड़ा संकट बनी बेरोजगारी?

Wed, 13 Aug 2025 07:20 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 13 Aug 2025 07:20 AM IST
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सार
चीन में यह नया ट्रेंड क्या है? युवाओं के नौकरी पर जाने का दिखावा करने के पीछे क्या वजह है? चीन में इस वक्त बेरोजगारी की स्थिति कितनी गंभीर है? आइये जानते हैं...
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China Pretend to Work Service Youth Unemployment Social Pressure Companies paid for offering Workstations news
चीन की हालत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

चीन में बेरोजगारी बड़ा संकट बनकर उभर रही है। स्थिति यह है कि यहां युवाओं को अपने कौशल लायक काम तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग नौकरी पर जाने का दिखावा करने को मजबूर हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नौकरी के इस दिखावे के लिए भी उन्हें रकम खर्च करनी पड़ रही है। चीन में शुरू हुआ ये नया ट्रेंड पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। 


आखिर चीन में यह नया ट्रेंड क्या है? युवाओं के नौकरी पर जाने का दिखावा करने के पीछे क्या वजह है? चीन में इस वक्त बेरोजगारी की स्थिति कितनी गंभीर है? आइये जानते हैं...

चीन में नौकरी के दिखावे का नया ट्रेंड क्या?
चीन में बढ़ती बेरोजगारी के बीच ऐसी कंपनियां बढ़ी हैं, जो कि युवाओं को नौकरी पर जाने का दिखावा करने के लिए प्रस्ताव दे रही हैं। यह ट्रेंड इस कदर बढ़ चुका है कि इसका नाम ही 'प्रिटेन्ड टू वर्क' (काम का दिखावा) सेवा पड़ चुका है। इस तरह की सेवाएं मुहैया करा रही कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और बेरोजगार युवा हर दिन 30 से 50 युआन (करीब 350 से 600 रुपये) तक चुका कर इन कंपनियों में नौकरी का दिखावा करने जा रहे हैं। 

कंपनियां बेरोजगार लोगों को अपनी अलग डेस्क, वाई-फाई कनेक्शन, कंप्यूटर, मीटिंग रूम, नाश्ता और नौकरी जैसा माहौल मुहैया कराती हैं। बदले में इन कंपनियों में जाने वाले लोग इन्हें प्रतिदिन फीस देते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियां लंच और डिनर भी मुहैया कराती हैं। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के शेनझेन, शंघाई, नानजिंग, वुहान, चेंगदू और कुनमिंग जैसे शहरों में नौकरी के दिखावे वाली सेवा मुहैया कराने के लिए कई कंपनियां शुरू हो गई हैं और अब यह सुविधा चीन के दूसरे शहरों में पहुंच रही है। 

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Job - फोटो : Adobe Stock

'नौकरी के दिखावे' के दौरान क्या करते हैं युवा?
कंपनियों में नौकरियों का दिखावा करने वाले लोग आमतौर पर काम पर जाने जैसा माहौल महसूस कर सकते हैं। इसके चलते वे अपनी टीम बनाकर फ्रीलांस काम में जुटते हैं। ये लोग खुद ही अपनी भूमिका भी चुन लेते हैं। मसलन कम अनुभव वाले लोग साधारण कर्मचारी, ज्यादा अनुभव वाले मैनेजर या बॉस। ज्यादातर युवा इन कंपनियों में जाकर अपने लिए असली नौकरी खोजने के काम में भी जुटते हैं। इसके अलावा वे यहां नौकरी के हिसाब से नया कौशल सीखने के लिए या फिर अपना स्टार्टअप बिजनेस शुरू करने की भी योजना तैयार करते हैं। कई लोग यहां अन्य बेरोजगार युवाओं के साथ टीम में भी काम करते हैं। 

युवाओं का नौकरी का दिखावा शुरू करने की वजह क्या?
चीन में जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती जा रही है, वैसे ही यहां बेरोजगारी का संकट काफी बढ़ चुका है। अधिकतर युवा कॉलेज के बाद अपने कौशल के हिसाब से नौकरी पाने में असफल हो रहे हैं। ऐसे में उनके सामने सही नौकरी मिलने तक घर पर ही खाली बैठने का संकट पैदा हुआ है। ज्यादातर युवा इस स्थिति से खुश नहीं हैं। चीन की स्थानीय मीडिया के मुताबिक, लोगों का कहना है कि वे अपने घर तक में बेरोजगारी की बात नहीं बताना चाहते, ताकि लोग उनके बारे में राय न कायम कर लें। वहीं, कुछ और लोगों का कहना है कि वे परिवार, रिश्तेदारों और समाज के सामने खुद को व्यस्त दिखाना चाहते हैं। इसलिए वे नौकरी पर जाने का दिखावा करके ही खुद को बचाने की कोशिश में हैं।

शुई झू नाम के एक युवा, जिसका बिजनेस वेंचर पिछले साल ही असफल हो गया था, वह हर दिन दोंगुआन में एक प्रिटेंड टू वर्क कंपनी में  30 युआन खर्च कर जाते हैं। शुई के मुताबिक, उनके पांच और साथी वहीं काम करते हैं। कुछ और लोगों का कहना है कि साथ काम करने से उन्हें यह अहसास नहीं होता कि वे बेरोजगार हैं या किसी काम के नहीं हैं।  

युवाओं को 'काम का दिखावा' करने की सेवा मुहैया कराने वाली एक कंपनी के प्रमुख फेयू (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनकी कंपनी सिर्फ काम की जगह नहीं देती, बल्कि लोगों को यह अहसास दिलाती है कि वे निठल्ले नहीं हैं और समाज में सम्मान पाने के हकदार हैं। फेयू का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी जब चीन में चरम पर थी, तब उन्हें खुद अपनी नौकरी गंवाकर घर बैठना पड़ा। इसलिए उन्होंने प्रिटेंड टू वर्क कंपनी की स्थापना की। 

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

फेयू का कहना है कि उनके यहां काम का दिखावा करने आने वाले 40 फीसदी उपभोक्ता हालिया ग्रैजुएट हैं। कई लोग अपने परिवार के दबाव में काम का दिखावा करने आते हैं। इसके अलावा 60 फीसदी लोग फ्रीलांसर हैं, जो कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों और साइबरस्पेस कर्मियों के लिए प्रोजेक्ट संभालते हैं। 

चीन में कितनी बड़ी समस्या बन गई है बेरोजगारी?
चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े हालिया आंकड़ों की मानें तो देश में 16 से 24 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर जून 2023 में सबसे उच्च स्तर 21.3 फीसदी, जून 2024 में 17.1 फीसदी और इस साल 14.5 फीसदी रही है। इतना ही नहीं 25 से 29 साल के युवाओं के लिए भी बेरोजगारी दर काफी बढ़ गई थी। 

माना जा रहा है कि चीन की धीमी होती अर्थव्यवस्था, अमेरिका से टैरिफ युद्ध और लगातार बढ़ते ग्रैजुएट्स की संख्या के चलते चीन में 'काम का दिखावा' करने वाले युवाओं का आंकड़ा बढ़ सकता है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, अगले दो महीनों में चीन में बेरोजगारी दर सबसे उच्च स्त पर हो सकती है, क्योंकि इस दौरान 1.22 करोड़ युवा ग्रैजुएट होकर कॉलेजों से निकलेंगे। लेकिन इनके लिए सही नौकरियों की कमी हो सकती है।

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