China Pakistan Military alliance: पाकिस्तान से सैनिक गठजोड़ बनाने की चीन ने साफ कर दी अपनी मंशा?
China Pakistan Military alliance: विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की नजर अरब सागर तक उसकी पहुंच बनाने के लिहाज से पाकिस्तान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अगर मलक्का जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण रास्ता बंद हो गया, तो उस समय अरब सागर के जरिए चीन अपने आयात-निर्यात को सुरक्षित करना चाहता है। इसमें पाकिस्तान की नौ सेना की सहायता की जरूरत चीन को पड़ेगी...
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चीन अब पाकिस्तान को अपनी सैनिक धुरी में और भी ज्यादा जकड़ने की कोशिश कर रहा है। यह बात सोमवार को चीन के रक्षा मंत्री और पाकिस्तान के नौ सेनाध्यक्ष की मुलाकात के बाद जाहिर हो गई। चीन के रक्षा मंत्री ली शांगफू ने पाकिस्तान के नौ सेनाध्यक्ष से कहा कि दोनों देशों की नौ सेनाओं सहित तमाम सेनाओं को ‘नए क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार’ करना चाहिए, ताकि ‘इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने’ की अपनी क्षमता को वे बढ़ा सकें।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस टिप्पणी का मतलब यह है कि चीन पाकिस्तान को अपनी सैन्य रणनीति और सैन्य तैयारियों का हिस्सा बनाना चाहता है। वह दोनों देशों की सेनाओं में एक तरह निकट जुड़ाव कायम करना चाहता है, जिससे युद्ध के समय जरूरत पड़ने पर वे मिल कर लड़ सकें। चीन और पाकिस्तान की सेनाओं में संबंध वर्षों पुराने हैं। दोनों देशों की वायु सेनाएं और नौ सेनाएं साझा अभ्यास भी करती रही हैं। चीन अब इस संबंध को एक स्तर और ऊंचा ले जाना चाहता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक चीन की नजर अरब सागर तक उसकी पहुंच बनाने के लिहाज से पाकिस्तान की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अगर मलक्का जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण रास्ता बंद हो गया, तो उस समय अरब सागर के जरिए चीन अपने आयात-निर्यात को सुरक्षित करना चाहता है। इसमें पाकिस्तान की नौ सेना की सहायता की जरूरत चीन को पड़ेगी।
कूटनीति जानकारों के मुताबिक चीन की पाकिस्तान की सेना के साथ निकटता बढ़ाने की चीन की कोशिश पर अमेरिका और उसके साथी देश निकट निगाह रख रहे हैं। इसके पहले 2017 में चीन ने हिंद महासागर के उत्तर-पश्चिमी छोर पर जबूती में अपना एक सैनिक अड्डा बनाया था। उसके बारे में भी समझा गया था कि चीन युद्ध की स्थिति में अपने व्यापार हितों को सुरक्षित करने के एहतियाती कदम उठा रहा है।
चीनी रक्षा मंत्री ली शांगफू ने चीन की यात्रा पर आए पाकिस्तान के नौ सेनाध्यक्ष अमजद खान नियाजी से दो टूक कहा कि चीन और पाकिस्तान के द्विपक्षीय रिश्तों में सैन्य संबंध का सबसे प्रमुख स्थान है। चीनी रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के मुताबिक उन्होंने कहा- ‘दोनों देशों की सेनाओं को अपने आदान-प्रदान को नए क्षेत्रों तक बढ़ाना चाहिए। उन्हें सहयोग को एक नई ऊंचाई देनी चाहिए, जिससे तमाम तरह की चुनौतियों और खतरों का मुकाबला करने की उनकी क्षमता बढ़े और वे मिल कर दोनों देशों और इस क्षेत्र में अपने सुरक्षा हितों को बरकरार रख सकें।’
नियाजी की बीजिंग यात्रा से पहले चीन के केंद्रीय सैनिक आयोग के उपाध्यक्ष झांग यूशिया ने कहा था कि चीनी सेना पाकिस्तान की सेना के साथ अपने संबंध को अधिक गहरा और अधिक विस्तृत करना चाहती है। ऐसी चर्चा है कि चीन पाकिस्तान के ग्वादार में बने बंदरगाह पर अपनी सेना तैनात करना चाहता है। लेकिन अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं हुई है। इस बंदरगाह को चीन ने ही बनाया है।
कुछ समय पहले अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने कहा था कि चीन अपना अगला सैनिक अड्डा संभवतः पाकिस्तान में बनाएगा। संभवतः यह अड्डा ग्वादार में बनाया जाएगा।