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चीन-पाकिस्तान को सता रही आर्थिक गलियारे की सुरक्षा की चिंता, इतने सैनिकों की होगी तैनाती
Fri, 04 Dec 2020 06:29 PM IST
दीप्ति मिश्रा
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Fri, 04 Dec 2020 06:29 PM IST
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चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की सुरक्षा के लिए दोनों देश मिलकर करीब 25 हजार से अधिक सैनिकों को तैनात करेंगे। सैनिकों की तैनाती के साथ ही तोपें भी तैनात की जाएंगी ताकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के विवादित क्षेत्र के माध्यम से भारतीय सीमा के पास बनी बुनियादी ढांचा परियोजना को सुरक्षित किया जा सके।
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चीन सीपीईसी के तहत पाकिस्तान में 87 अरब डॉलर की मदद से बंदरगाह, सड़कें, रेलवे और पॉवर प्लांट बना रहा है। चीन का मकसद मलक्का स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करते हुए ग्वादर पोर्ट के रास्ते दुनिया को सामानों की निर्यात करना है। चीन को हमेशा यह डर बना रहता है कि मलक्का स्ट्रेट में भारत और अमेरिका उसके लिए संकट का सबब बन सकते हैं। इसीलिए उसने अपनी पूरी ताकत पाकिस्तान में झोक दी है।
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इस मुद्दे की जानकारी रखने वाले भारतीय सैन्य सूत्रों के मुताबिक, दो डिवीजनों- 34 और 44 लाइट इन्फैंट्री डिवीजनों को विशेष सेवा प्रभाग, नॉर्थ कहा जाता है और विशेष सेवा प्रभाग दक्षिण को सीपीईसी पर तैनात किया जाएगा। इन दोनों डिवीजनों में तीन ब्रिगेड होंगे, कुल मिलाकर छह ब्रिगेड होंगे। इनमें पाकिस्तान सेना के कमांडो, पंजाब और सिंध के रेंजर्स और फ्रंटियर कोर अर्धसैनिक बल शामिल होंगे। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि दोनों डिवीजन पर लगभग 25 हजार सुरक्षाबल तैनात किए जाएंगे। उन्होंने दो फील्ड आर्टिलरी रेजिमेंटों और एक मध्यम रेजिमेंट पर सवाल उठाया, जो प्रत्येक डिवीजन के साथ एकीकृत हैं।
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बलूची विद्रोहियों को ध्यान में रख तोपें तैनात की जाएंगी
अधिकारी ने बताया कि सीपीईसी परियोजनाओं की सुरक्षा करने वाले विशेष सेवा प्रभाग (एसएसडी) को तोपखाने की आवश्यकता क्यों है? स्टैंडर्ड ऑर्डर ऑफ बैटल के अनुसार, पारंपरिक ऑपरेशन के यह काफी अधिक है और इसे निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर बलूची विद्रोहियों को ध्यान में रख कर यह तैनाती की गई, तो भी इसमें जरूरत से ज्यादा लंबी दूरी की मारक क्षमता है।
भारत से टकराने को चीन के साथ पाकिस्तान
चीन-पाकिस्तान सहयोग से पाकिस्तान की नौसेना के लिए आठ पनडुब्बियों का उत्पादन होगा। भारत के अपाचे हेलीकॉप्टर के हमले को टक्कर देने के लिए पाकिस्तान चीनी Z-10 हेलीकॉप्टर का अधिग्रहण कर रहा है। इसके अलावा, भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान में सीपीईसी की निर्माण परियोजनाओं के लिए गए चीनी ठेकेदार भी चीनी सैन्य और अर्धसैनिक संबद्ध अधिकारी हैं, जो अपनी योजना और दृष्टिकोण के अनुसार एसएसडी के गठन को नेविगेट कर सकते हैं।