China: अब चीन ने खुलकर जताई डॉलर की जगह युवान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने की इच्छा
China: विशेषज्ञों ने इसे चीन के पूंजी बाजार को देश और विदेश व्यापार के मामले में नियंत्रण मुक्त करने की प्रक्रिया माना है। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार और खुलेपन की जो नीति अपनाई गई थी, ताजा कदम उसका स्वाभाविक परिणाम है...
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चीन अब तक जो काम गुपचुप कर रहा था, अब उसने उसे खुलेआम करने की रणनीति घोषित कर दी है। चीन डॉलर की जगह अपनी मुद्रा युवान को अंतरराष्ट्रीय कारोबार की मुद्रा बनाना चाहता है, ये चर्चा काफी समय से रही है। लेकिन अब तक इस बारे में चीन की कोई घोषित नीति सामने नहीं थी। लेकिन अब चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने विदेशी निवेशकों के लिए युवान में वित्तीय संपत्तियां खरीदने की प्रक्रिया को आसान बनाने की नीति घोषित की है। साथ ही उसने आसियान के सदस्य दस दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ स्थानीय मुद्रा में करेंसी सेटलमेंट करने का फैसला किया है।
इन निर्णयों की जानकारी पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीओबीसी) ने एक लेख में दी है। इसमें इस बात का जिक्र है कि युवान के ग्लोबलाइजेशन की प्रक्रिया की धीरे-धीरे आगे बढ़ी है। इसका कारण विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का बढ़ा महत्त्व है। उधर चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि युवान को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने की प्रक्रिया का सीधा संबंध दुनिया में अमेरिकी मुद्रा डॉलर का इस्तेमाल घटाने की चल रही कोशिशों से है।
पीओबीसी ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश में अब चीन में युवान में मौजूद वित्तीय संपत्तियों को विदेशी निवेशकों के लिए बड़े पैमाने पर खोलने की पहल की है। विदेशी निवेशकों को मांग के मुताबिक युवान प्राप्त हो सकें, इसके लिए उसने बाजार में नकदी की मात्रा बढ़ाने का फैसला किया है। पीओबीसी ने कहा है कि विदेशी निवेशक चीन के पूंजी बाजार में अपना पैसा लगा सकें, इसके लिए संबंधित प्रक्रियाओं को लगातार आसान बनाया जाएगा। साथ ही दूसरे देशों के सेंट्रल बैंक अपने भंडार में अधिक युवान रख सकें, इसकी व्यवस्था भी की जाएगी।
आसियान और चीन के अन्य पड़ोसी देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में सेटलमेंट करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का तरीका भी ढूंढने का इरादा पीओबीसी ने जताया है। बैंक ने अपना अगला लक्ष्य विदेश में युवान की उपलब्धता बढ़ाना रखा है। विश्लेषकों ने कहा है कि पीओबीसी की ताजा पहल दुनिया का ध्यान खींचेगी। अगर चीन अपनी इस मंशा में कामयाब हुआ, तो उसका दूरगामी असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। लेकिन इस रास्ते में यह खतरा भी है कि चीन के अब तक नियंत्रित वित्तीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की भरमार हो जाए और उसके बाद चीन सरकार के लिए अर्थव्यवस्था पर अभी की तरह पूरा नियंत्रण रख पाना संभव ना रहे। इसका चीन की अर्थव्यवस्था पर भी दूरगामी प्रभाव हो सकता है।
विशेषज्ञों ने इसे चीन के पूंजी बाजार को देश और विदेश व्यापार के मामले में नियंत्रण मुक्त करने की प्रक्रिया माना है। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार और खुलेपन की जो नीति अपनाई गई थी, ताजा कदम उसका स्वाभाविक परिणाम है। इस बीच पीओबीसी ने वित्तीय संस्थानों के पास रिजर्व के रूप में विदेशी मुद्रा रखने की तय मात्रा में कटौती भी की है। इसे भी युवान के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक कदम माना गया है।