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चीन : 120 करोड़ लोगों के पास सिर्फ 100 सरनेम, वांग, ली, झांग, लिउ और चेन सबसे ज्यादा प्रचलित
Mon, 18 Jan 2021 03:12 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 18 Jan 2021 03:12 PM IST
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बीजिंग में ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में चीनी पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में फेस मास्क पहनने के प्रतिनिधि।
- फोटो : PTI
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चीन में पांच ऐसे सरनेम (उपनाम) हैं जिसे देश की 30 फीसदी आबादी यानि कि 43.3 करोड़ लोगों ने अपनाया है। वो सरनेम हैं - वांग, ली, झांग, लिउ या फिर चेन। चीन में सरनेम का अकाल पड़ गया है, चीन के लोकसुरक्षा मंत्रालय के दस्तावेजों का विश्लेषण कर इस बात की जानकारी मिली है।
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इन दस्तावेजों के मुताबिक, 2010 की जनगणना की तुलना में 86 फीसदी आबादी के बीच सिर्फ 100 सरनेम ही लोकप्रिय हैं। एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में पहले 23,000 सरनेम प्रचलित थे, जो अब घटकर 6,000 रह गए हैं।
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बीजिंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर चेन जियावेई का इस पर कहना है कि सरनेम की संख्या में कमी आने के पीछे तीन कारण हैं, पहला - सांस्कृतिक विविधता का अभाव, दूसरा- भाषाई समस्या और तीसरा और आखिरी- डिजिटल युग में तकनीकी समस्या।
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एसोसिएट प्रोफेसर चेन जियावेई ने बताया कि चीन में नस्ल या समुदायों के हिसाब से विविधता नहीं है। भाषाई कारणों से कोई भी अतिरिक्त अक्षर जोड़-घटाकर कोई सरनेम बना लेना, चीनी भाषा में अंग्रेजी की तरह आसान नहीं है। कई लोगों ने पुराने सरनेम छोड़कर नए सरनेम इसलिए अपनाएं हैं ताकि डिजिटल दुनिया में वो पीछे ना छूट जाएं।
प्रोफेसर जियावेई का कहना है कि चीन में मंदारिन जैसी कई बोलियों को डिजिटल सिस्टम में शामिल नहीं किया गया। कैरेक्टक स्टैंडर्ड अपनाने से सरकार को क्यूआर कोड, पासवर्ड या पिन जनरेट करने में दिक्कत आ रही थी। इस प्रक्रिया से बचने के लिए लोगों ने अपना सरनेम में बदल दिया। हालांकि यहां के लोगों को इस बात का दुख है कि उनकी पीढ़ियां अपने इतिहास, पहचान और परंपरा को भूल जाएगी।