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कामयाबी: मंगल पर अपना रोवर जू रॉन्ग उतारने में सफल रहा चीन
Sun, 16 May 2021 06:21 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला रिसर्च टीम, बीजिंग
अमर उजाला रिसर्च टीम, बीजिंग
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 16 May 2021 06:21 AM IST
सार
- अमेरिका के बाद ऐसा करने वाला दूसरा देश बना
- रूस, भारत और यूरोपीय संघ ने भी भेजे मिशन, लेकिन रहे विफल
- इसे पृथ्वी पर सिग्नल भेजने में 17 मिनट लगे
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सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
चीन ने मंगल ग्रह पर अपना मिशन उतारने में सफलता हासिल कर ली। चीन ने शनिवार सुबह बताया कि उसका रोवर जू रॉन्ग मंगल के दक्षिणी हिस्से में सफलता से उतर चुका है। अगले 90 मंगल-दिवस यह रोवर सतह पर खनिजों, पानी और भौगोलिक संरचनाओं का अध्ययन करेगा।
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केवल अमेरिका ही मंगल ग्रह पर सफल मिशन उतार सका है। चीन के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 7:18 मिनट पर रोवर मंगल पर उतरा। इसे पृथ्वी पर सिग्नल भेजने में 17 मिनट लगे। चीन नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन का यह मिशन करीब 7 महीने पहले अंतरिक्ष यान तियानवेन -1 के जरिये 23 जुलाई 2020 में लांच किया गया था।
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ऐसे चला अभियान ...
पहला चरण
तीन महीने से परिक्रमा कर रहा था ऑर्बिटर: ऑर्बिटर फरवरी से ही मंगल की कक्षा से ग्रह के उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित यूटोपिया प्लेनीशिया का अध्ययन कर रहा था, जहां रोवर उतारा जाना था। इस क्षेत्र को चुना गया, क्योंकि यहां बड़े पत्थर व ऐसी संरचनाएं नहीं हैं, जो रोवर को अध्ययन में बाधा बनें।
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दूसरा चरण
70 किमी ऊंचाई से लैंडर उतरा: ऑर्बिटर से लैंडर को 70 किमी की ऊंचाई से अलग करके सतह की ओर भेजा। नीचे आने तक 5 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार थी।
भय के 9 मिनट : करीब 32 करोड़ किमी दूर मंगल पर रोवर उतारने की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित थी। इसमें मानव दखल नहीं हो सकता था। वजह, 32 करोड़ किमी दूरी पर रेडियो सिग्नल पहुंचने में 17 मिनट लगते हैं, जिससे यह व्यवहारिक नहीं था। इसी वजह से करीब 9 मिनट की लैंडिंग प्रक्रिया को भय के 9 मिनट नाम दिया गया है।
अंतिम चरण
पैराशूट से सॉफ्ट - लैंड : रोवर को एयरोशेल में कवर कर ऑर्बिटर से ग्रह की सतह पर भेजा गया , जिससे तेज गति से पैदा हुई भारी गर्मी रोवर को जला न सके। 8 मिनट सतह की ओर बढ़ने के बाद गति धीमी की गई , पैराशूट खोले गए और रोवर को एयरोशेल से अलग कर मंगल की सतह पर सॉफ्ट-लैंड करवाया गया।
मंगल की सतह पर मिशन सफलता से उतारना आज भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यहां अमेरिका और चीन के अलावा रूस, भारत और यूरोपीय संघ भी मिशन भेज चुके हैं। लेकिन वे सतह पर उतारने के मिशन नहीं थे, या ऐसा करने में विफल रहे।
- चीन ने 2011 में रूस के साथ भी मंगल पर एक मिशन भेजा, लेकिन यह विफल रहा था। अन्य देशों के प्रयास भी विफल रहे या उनके मिशन सतह पर क्रैश हो गए
- चीन ने इससे पहले चंद्रमा पर अपने रोवर उतारे, वहां से सैंपल वापस लाया। वह अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का काम भी शुरू कर चुका है।
- अब मंगल की उपलब्धि उसे अग्रणी देशों में खड़ा कर देती है । वहीं , मंगल पर अमेरिका के रोवर क्यूरियोसिटी और पर्सीवरेंस अभी भी काम कर रहे हैं