{"_id":"62344bd85cb7dd7c6607f259","slug":"china-is-looking-at-the-possibility-of-political-instability-in-pakistan-with-concerned-eyes","type":"story","status":"publish","title_hn":"टेंशन में ड्रैगन: पाकिस्तान में सियासी उथलपुथल से चिंतित हुआ चीन, अधर में लटकी हैं कई परियोजनाएं","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
टेंशन में ड्रैगन: पाकिस्तान में सियासी उथलपुथल से चिंतित हुआ चीन, अधर में लटकी हैं कई परियोजनाएं
Fri, 18 Mar 2022 02:37 PM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Fri, 18 Mar 2022 02:37 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
इमरान खान और शी जिनपिंग
- फोटो :
self
विस्तार
पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने की संभावना को चीन चिंतित निगाहों से देख रहा है। इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के खिलाफ विपक्ष की तरफ से पेश अविश्वास प्रस्ताव से अस्थिरता का अंदेशा बना है। पाकिस्तान चीन का प्रमुख आर्थिक और भू-राजनीतिक सहयोगी है। चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की घटनाओं से सीधे तौर पर चीन के हित जुड़े हुए हैँ।पाक में इमरान सरकार गिरने के बाद की स्थिति पर गंभीरता से विचार कर रहा चीन
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 342 सदस्य हैँ। 27 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान के दौरान प्रधानमंत्री इमरान खान अगर 172 सदस्यों का समर्थन हासिल नहीं कर सके, तो उनकी सरकार गिर जाएगी। ऐसा होने की मजबूत संभावना मानी जा रही है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाक में इमरान खान सरकार गिरने के बाद की स्थिति पर चीन गंभीरता से विचार कर रहा है। समझा जाता है कि अगर नई सरकार बनने की नौबत आई, तो चीन चाहेगा कि उसका नेतृत्व पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) करे। चीन अभी पाकिस्तान की ताजा सियासी घटनाओं पर टिप्पणी करने से बच रहा है। वह इस संभावना को भी लेकर चल रहा है कि इमरान खान सरकार बच सकती है। फिलहाल चीन की रणनीति पाकिस्तान के किसी प्रमुख राजनीतिक दल में अपने प्रति विरोध भाव पैदा ना करने की है।
अधर में लटकीं हैं चीन की कई परियोजनाएं
चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत पाकिस्तान में 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है। चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को बीआरआई का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। पाकिस्तानी विश्लेषकों की राय है कि अगर पाकिस्तान में नई सरकार बनी, तो उससे सीपीईसी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पीएमएल-नवाज पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी तो वह अधिक उत्साह के साथ सीपीईसी की परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगी।
विशेषज्ञों की अलग-अलग राय
इस्लामाबाद स्थित कायद-ए-आजम यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पॉलिटिक्स एंड इंटरनेशनल रिलेशन्स में प्रोफेसर इश्तिहाक अहमद ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि असल में चीन पीटीआई से नाराज रहा है। पीटीआई के शासनकाल में सीपीईसी परियोजनाओं पर काम धीमी गति से आगे बढ़ा है। पीएमएल-नवाज की पूर्व सरकार के समय चीनी अधिक खुश थे। अगर पीएमएल-नवाज की सत्ता में वापसी हुई, तो उससे चीन उत्साहित होगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी इस राय सहमत दिखते हैँ। वॉशिंगटन स्थित विल्सन सेंटर में एशिया प्रोग्राम के उप निदेशक माइकल कुगेलमैन ने निक्कई एशिया से कहा- ‘चीन पीएमएल-नवाज सरकार के साथ अधिक सहज स्थिति में था। इमरान खान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाई, जिससे चीन चिंतित हुआ। फिर चीन इसको लेकर भी चिंतित रहा है कि इमरान खान सरकार ने उसकी परियोजनाओं और उसके नागरिकों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ठीक से हल नहीं किया।’
लेकिन पाकिस्तान की सरगोधा यूनिवर्सिटी में स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ चाइना स्टडीज के निदेशक फजल रहमान ने इससे अलग राय जताई है। उनके मुताबिक चीन नहीं चाहेगा कि मौजूदा सरकार गिरे। वह चाहेगा कि पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन अगले साल होने वाले आम चुनाव के जरिए हो। रहमान ने कहा- ‘अविश्वास प्रस्ताव के क्रम में आंदोलन होने और राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने की आशंका है। आर्थिक मुसीबत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए ये अच्छी बात नहीं होगी।'