डिजिटल करेंसी शुरू करने वाली दुनिया की पहली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने जा रहा चीन
- चीन के चार शहरों में अगले हफ्ते से चलेगी डिजिटल करेंसी
- सूजौ शहर में परिवहन सब्सिडी भी इसी मुद्रा में दी जाएगी
- शिआंग में भोजन और खुदरा क्षेत्र में होगा इसका इस्तेमाल
- चीन डिजिटल मुद्रा संचालित करने वाला पहला देश होगा
- फेसबुक के लिब्रा प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद चीन ने शुरू किया था काम
- चीन अपनी करंसी रॅन्मिन्बी का उपयोग बढ़ाना चाहता है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दुनिया को कोरोना वायरस महामारी देकर चौतरफा आलोचना झेल रहा चीन अब बड़े बदलाव की ओर है। अगले हफ्ते से यह देश अपने चार प्रमुख शहरों में डिजिटल करेंसी में भुगतान करने जा रहा है। बीते महीनों में, चीन के केंद्रीय बैंक ने ई-रॅन्मिन्बी (चीनी मुद्रा का इलेक्ट्रॉनिक रूप) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए, अगर यह प्रयोग सफल रहा तो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक चीन डिजिटल मुद्रा संचालित करने वाला पहला देश होगा। बीते महीनों में, चीन के केंद्रीय बैंक ने ई-रॅन्मिन्बी (चीनी मुद्रा का इलेक्ट्रॉनिक रूप) को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए, अगर यह प्रयोग सफल रहा तो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक चीन डिजिटल मुद्रा संचालित करने वाला पहला देश होगा। वैसे बीजिंग लंबे समय से चाहता था कि चीन की करेंसी रॅन्मिन्बी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार और फाइनेंस में अधिक उपयोग हो।
इन चार शहरों में होगा प्रयोग
शेन्जेन, सूजौ, चेंग्दू के साथ बीजिंग के दक्षिण में बसाया गया नए शहर शिआंगॉन में ट्रायल के रूप में डिजिटल मुद्रा की शुरुआत होने वाली है। साथ ही साथ 2022 के बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक को देखते हुए सरकार ने अपनी कमर कस ली है। चीन की स्थानीय मीडिया की माने तो मई से ही चारों शहरों के कुछ सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल मुद्रा में वेतन मिलना शुरू हो जाएगा।
अप्रैल से ही इस करेंसी के बारे में लोगों को जानकारी देने का काम शुरू हो चुका है, जिसके लिए डिजिटल मुद्रा को स्टोर करने और उपयोग करने के लिए आवश्यक ऐप के स्क्रीनशॉट की मदद ली जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में तो यहां तक कहा गया है कि मैकडॉनल्ड्स और स्टारबक्स जैसे बड़ी व्यवसायिक कंपनियां भी डिजिटल मुद्रा के ट्रायल्स का हिस्सा बनने को तैयार हो गईं हैं।
वैसे चीन में पहले से ही बड़े पैमाने पर लोग डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते आए हैं। अलीबाबा एंट फाइनेंशियल के स्वामित्व वाली अलीपेय और Tencent के मालिकाना हक वाले वीचैट एप से लोग बिना नकद के भुगतान करते हैं, लेकिन ये इलेक्ट्रानिक मुद्रा की जगह नहीं ले सकते।
ई-करेंसी से मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग थमेगी?
पीकिंग विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय विकास अनुसंधान संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर जू युआन ने ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी को बताया कि क्योंकि नकद लेनदेन ऑफलाइन था और मौजूदा भुगतान प्लेटफॉर्मों से लेनदेन का आंकड़ा बेहद उलझा और बिखरा हुआ था, इसलिए केंद्रीय बैंक नकदी प्रवाह की निगरानी करने में असमर्थ था। दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो चीन की इस डिजिटल भुगतान प्रणाली के उपयोग से मनी लॉन्ड्रिंग, जुआ और टेरर फंडिंग से निपटने में मदद मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक मुद्रा विकसित करने वाले पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के डिजिटल मुद्रा अनुसंधान संस्थान ने 17 अप्रैल को बताया था कि, 'डिजिटल रॅन्मिन्बी पर तेजी से काम हो रहा है और शीर्ष स्तर का डिजाइन, रिसर्च का काम पूरा हो चुका है, हालांकि केंद्रीय बैंक पर्यवेक्षण भविष्य के हिसाब से वित्त, भुगतान, व्यापार को अलग-अलग लिहाज से देखते हुए उपयोगकर्ता के लिए थोड़ा और बदलाव करना चाहता है।
कोरोना वायरस के इस भीषण हालात में लोग सामाजिक दूरी बरकरार रखते हुए न सिर्फ भीड़भाड़ वाली जगह जाकर नकदी के उपयोग से बच रहे हैं बल्कि तेजी से डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक करेंसी भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय होगी।