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कूटनीतिक संबंध: लैटिन अमेरिका में चीन की बढ़ती पैठ बन रही है अमेरिकी बड़ी चिंता, जानिए पूरा मामला
Sun, 20 Feb 2022 03:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वॉशिंगटन
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 20 Feb 2022 03:42 PM IST
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विस्तार
लैटिन अमेरिका में चीन की बढ़ती पैठ से अमेरिका की चिंता बढ़ रही है। हाल की जिस घटना ने यहां सबसे ज्यादा चिंता पैदा की है, वह चीन और अर्जेंटीना के बीच हुए समझौते हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति अल्बर्तो फर्नांडिज विंटर (शीतकालीन) ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने फरवरी के पहले हफ्ते में चीन गए थे। उस मौके पर उन्होंने कई खास समझौते किए। इनमें से एक के तहत अर्जेंटीना ने चीन के बहुचर्चित बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में शामिल होने का फैसला किया। दूसरे समझौते के तहत चीन अर्जेंटीना में परमाणु बिजली का संयंत्र लगाएगा।
अमेरिकी टीकाकारों ने ध्यान दिलाया है कि लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई क्षेत्र में मौजूद कुल 33 में से 20 देश अब बीआरआई का हिस्सा बन चुके हैं। इससे इस क्षेत्र के देशों की चीन पर आर्थिक निर्भरता बढ़ रही है। अर्जेंटीना लैटिन अमेरिका का एक बड़ा देश है। उसने अब चीन के नेतृत्व वाले एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (एआईआईबी) बैंक से कर्ज लेने का भी फैसला किया है।
इस रकम से बीआरआई से जुड़ी परियोजनाओं का निर्माण किया जाएगा। विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि एआईआईबी से कर्ज लेने का मतलब यह है कि अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पर अर्जेंटीना की निर्भरता घट गई है। आईएमएफ में अमेरिका की निर्णायक भूमिका मानी जाती है।
अमेरिकी अधिकारियों की अर्जेंटीना के नए कूटनीतिक संबंधों पर खास नजर है। उन्होंने इसे अहम माना है कि बीजिंग जाने के पहले फर्नांडिज मास्को गए। उसके बाद उन्होंने चीन से अपने देश के गहरे रिश्ते बनाने की पहल की। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि अर्जेंटीना के साथ अपने संबंधों को चीन दीर्घकालिक नजरिए से देखता है।
जानकारों के मुताबिक, अर्जेंटीना ऐसे कम देशों में एक है, जो व्यापार लाभ की स्थिति में हैं। यानी अर्जेंटीना जितना निर्यात करता है, उससे कम आयात करता है। 2021 में उसके निर्यात में 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अर्जेंटीना मुख्य रूप से कृषि उत्पाद, कारखाना उत्पाद और प्राथमिक वस्तुओं का निर्यात करता है। नए समझौतों के तहत उसके इन सभी उत्पादों की चीन के बड़े बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी।
लैटिन अमेरिका के मामले में अमेरिका आज भी मुनरो सिद्धांत से चलता है। जेम्स मुनरो अमेरिका के राष्ट्रपति थे। 1823 में उन्होंने लैटिन अमेरिका को अमेरिका बैकयार्ड (पीछे का इलाका) घोषित किया था। अभी हाल में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अब अमेरिका लैटिन अमेरिका को अपना फ्रंटयार्ड मानता है। इसका मतलब है कि लैटिन अमेरिकी देशों को अमेरिका ने अपना प्रभाव क्षेत्र मानना जारी रखा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने जिस तेजी से इस क्षेत्र में पैठ बनाई है, उससे मुनरो सिद्धांत के लिए कड़ी चुनौती पैदा हो रही है। कुछ ही समय पहले इस क्षेत्र का एक और देश निकरागुआ बीआरआई का हिस्सा बना था। होंडूरास भी अब ऐसा करने के संकेत दे रहा है। मगर अमेरिका के लिए सबसे अधिक चिंताजनक पहलू अर्जेंटीना का रुख है। इसकी एक वजह यह भी है कि उसने चीन को इस क्षेत्र में अपनी परमाणु तकनीक लाने का अवसर दे दिया है।