Hindi News ›   World ›   China has formally applied for membership of the Comprehensive and Progressive Agreement for Trans-Pacific Partnership

जापान के लिए पेश की चुनौती: अमेरिका और उसके साथी देशों को बांटने की चीन ने चली चाल

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 20 Sep 2021 06:36 PM IST

सार

विश्लेषकों के मुताबिक 2017 में जब ट्रंप प्रशासन ने टीपीपी की वार्ता से अमेरिका को हटाने का फैसला किया, तब से ही चीन इसमें शामिल होने पर विचार करता रहा है। ये संधि एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच होनी है...
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चीन - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार

चीन ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच टकराव पैदा करने के लिए एक नई चाल चली है। बीते हफ्ते उसने कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव एग्रीमेंट फॉर ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) की सदस्यता ग्रहण करने के लिए औपचारिक अर्जी दे दी। जानकारों के मुताबिक जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति थे, तब उनके प्रशासन ने इस मुक्त व्यापार समझौते की कल्पना चीन को अलग-थलग करने के लिए की थी। लेकिन अब इसकी सदस्यता लेकर चीन ने अमेरिका को ही अलग-थलग कर देने का दांव चला है।

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ओबामा के जमाने में इस मुक्त व्यापार समझौते को ट्रांसपैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) कहा गया था। लेकिन उनके बाद जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तब उन्होंने इस करार से अमेरिका को निकाल लिया। चीन की पिकिंग यूनिवर्सिटी स्थित स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में प्रोफेसर जिया चिनगुओ ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि चीन की अर्जी से जापान के लिए चुनौती खड़ी होगी। अगर वह अर्जी ठुकराने पर जोर डालता है, तो उसका मतलब चीन से टकराव बढ़ाना होगा। जबकि दूसरी तरफ जापान इसका समर्थन भी नहीं कर सकता, क्योंकि उसका ऐसा करना अमेरिका को पसंद नहीं आएगा।


जिया चीन सरकार से जुड़े पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के सदस्य हैं। इस रूप में चीन की विदेश और व्यापार नीति तय करने में उनमें उनकी भूमिका रहती है। विश्लेषकों के मुताबिक 2017 में जब ट्रंप प्रशासन ने टीपीपी की वार्ता से अमेरिका को हटाने का फैसला किया, तब से ही चीन इसमें शामिल होने पर विचार करता रहा है। ये संधि एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों के बीच होनी है। चीन इसमें शामिल हो कर इस क्षेत्र के लिए व्यापार नियम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाना चाहता है।

चीन के इसमें शामिल होने का विचार सबसे पहले मई 2020 में चीन के प्रधानमंत्री ली कीचियांग ने सामने रखा था। उसके पहले अप्रैल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जापान जाने का कार्यक्रम था। लेकिन ये यात्रा कोरोना महामारी के कारण रद्द हो गई। अमेरिका से चीन के बिगड़ते संबंधों के बीच शी की प्रस्तावित जापान यात्रा को बहुत अहमियत दी जा रही थी। उस समय तक चीन ने सीपीटीपीपी में शामिल होने का इरादा नहीं जताया था। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन को यह मालूम था कि उसके ऐसा इरादा जताने से जापान के लिए असहज स्थिति पैदा होगी।

लेकिन उसके बाद से जापान से भी चीन के रिश्ते अधिक तनावपूर्ण होते गए हैं। इसी बीच पिछले साल नवंबर में शी ने सीपीटीपीपी में शामिल होने का एलान कर दिया। अब उसके लिए औपचारिक अर्जी चीन ने दे दी है। जानकारों का कहना है कि निकट भविष्य में चीन को इस मुक्त व्यापार समझौते में प्रवेश मिलने की कोई संभावना नहीं है। इसे जानते हुए भी चीन ने अर्जी दी है, तो उसका अर्थ यही समझा गया है कि वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में दरार डालना चाहता है।

अभी सीटीपीपीपी में 11 सदस्य हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई, कनाडा, जापान, मलेशिया, मेक्सिको, न्यूजीलैंड, पेरू, सिंगापुर और वियतनाम इसके सदस्य हैं। ब्रिटेन ने भी इसमें शामिल होने के लिए अर्जी दे रखी है। बताया जाता है कि सदस्य देशों के बीच कई ऐसे हैं, जो चीन को इस करार में शामिल करने का उत्साह से समर्थन करेंगे। लेकिन जिया ने निक्कई एशिया से कहा कि इससे जापान के लिए कठिन स्थिति बनेगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन ने ऐसी ही हालत पैदा करने के लिए ये अर्जी दी है।
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