जिनपिंग का साझा समृद्धि अभियान: छोटी कंपनियों के लिए अलग स्टॉक एक्सचेंज क्यों बना रहा है चीन?
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रयोग का अनुभव कैसा रहता है, उस पर सारी दुनिया की नजर रहेगी। गुरुवार को अपने भाषण के दौरान शी ने यह भी कहा कि चीन की बहुचर्चित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में छोटी कंपनियों की भूमिका अब बढ़ाई जाएगी...
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चीन ने बीजिंग में एक नया स्टॉक एक्सचेंज बनाने का फैसला किया है। ये घोषणा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की। उन्होंने कहा कि इस स्टॉक एक्सचेंज का मकसद छोटी कंपनियों की मदद करना है, ताकि वे नई तकनीक अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकें। शी ने कहा- ‘हम छोटे उद्यमों को आविष्कार और विकास के लिए मदद करना जारी रखेंगे। साथ ही सुधारों को आगे बढ़ाएंगे। इसके लिए बीजिंग स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की जाएगी।’
लेकिन अभी चीन सरकार ने इस बारे में कोई ब्योरा जारी नहीं किया है। पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि ये एलान उस समय किया गया है कि जब चीन सरकार बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई को लगातार आगे बढ़ा रही है। शी जिनपिंग सरकार ने ‘साझा समृद्धि’ लाना अपना मकसद घोषित किया है। इसके तहत वह मुक्त बाजार पर नियंत्रण कसने और धन का बंटवारा अधिक व्यापक रूप से करने की कोशिश कर रही है।
इस वक्त चीन में दो स्टॉक एक्सचेंज हैं। ये शंघाई और शेनझेन शहरों में मौजूद हैं। उसके अलावा चीन के अर्ध स्वायत्त क्षेत्र हांगकांग में एक स्टॉक एक्सचेंज है, जो दुनिया का एक बड़ा वित्तीय केंद्र है। अब छोटी कंपनियों के लिए अलग से स्टॉक एक्सचेंज बनाने की कोशिश की जा रही है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रयोग का अनुभव कैसा रहता है, उस पर सारी दुनिया की नजर रहेगी। गुरुवार को अपने भाषण के दौरान शी ने यह भी कहा कि चीन की बहुचर्चित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में छोटी कंपनियों की भूमिका अब बढ़ाई जाएगी।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम में छपी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ समय पहले चीन ने शंघाई और शेनझेंन शेयर बाजारों में अमेरिका के नैसडैक की तरह की लिस्टिंग प्रक्रिया लागू की थी। उसका मकसद भी नई टेक कंपनियों को धन जुटाने की सुविधा देना था। जानकारों का कहना है कि चीन वैसी कंपनियों को तरजीह दे रहा है, जो सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। बीजिंग स्टॉक एक्सचेंज से इस मकसद को लेकर बनने वाली नई कंपनियों को मदद मिल सकती है।
जानकारों के मुताबिक नए स्टॉक एक्सचेंज का एक और मकसद सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देना हो सकता है। चीन का सेवा क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में काफी छोटा है। लेकिन गुजरे वर्षों में पर्यटन और तकनीक केंद्रित सेवाओं के उपयोग में बढ़ोतरी होने से सर्विस सेक्टर में नए उद्यम स्थापित हुए हैं। कोरोना महामारी आने के पहले चीन का सर्विस सेक्टर 838 अरब डॉलर मूल्य का हो चुका था। लेकिन 2020 में महामारी के कारण इसमें भारी गिरावट आई। फिलहाल, चीन की अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग के कुल कारोबार के 14 फीसदी के बराबर ही है।
बीते एक साल में चीन के शेयर बाजारों में विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ा है। इसकी एक वजह चीन का अपने वित्तीय क्षेत्र को अधिक उदार बनाना है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन सरकार इस निवेश का लाभ छोटे कारोबारियों तक पहुंचाना चाहती है। अब यह देखने की बात होगी कि नए स्टॉक एक्सचेंज की स्थपना से उसका ये मकसद किस हद तक पूरा होता है।