'ट्रंप' की वापसी: चीन के लिए चिंता की खबर हैं दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति
यून को ‘दक्षिण कोरिया का ट्रंप’ बताते हैं। महिलाओं के खिलाफ उनके पूर्वाग्रह भरी सोच और समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने वाली उनकी रणनीति से देश का एक बड़ा हिस्सा चिंतित रहा है। यहां के अखबारों ने अब यून से अपील की है कि चुनाव प्रचार वाले तेवर छोड़ कर उन्हें देश को एकजुट करने की कोशिश करनी चाहिए...
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चीन ने दक्षिण कोरिया के नए चुने गए राष्ट्रपति को बधाई दी है, लेकिन आम राय यही है कि ये चुनाव नतीजा चीन के लिए एक झटका है। नए चुने गए राष्ट्रपति यून सुक-यिओल कंजरवेटिव हैं। उन्हें अमेरिका समर्थक माना जाता है। जबकि निवर्तमान राष्ट्रपति मूंग जाये-इन ने अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाने की नीति अपना रखी थी। मूंग की डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को ही हरा कर पीपुल्स पॉवर पार्टी के यून इस बुधवार को राष्ट्रपति चुने गए।
दक्षिण कोरियाई अखबारों ने अपने विश्लेषण में लिखा है कि 1987 में लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाए जाने के बाद राष्ट्रपति चुनाव में जितनी कांटे की टक्कर इस बार हुई, उतना पहले कभी नहीं हुआ था। यून को इस चुनाव में 48.56 फीसदी वोट मिले। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के ली जाये-म्युंग को हराया, जिन्हें 47.83 फीसदी मत प्राप्त हुए।
चीन और उत्तर कोरिया के प्रति सख्त
विश्लेषकों का कहना है कि ये कांटे की टक्कर देश में विवादास्पद मुद्दों पर बंटे जनमत का संकेत है। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने तीखी जुबान बोली। उसका जिक्र करते हुए दक्षिण कोरियाई मीडिया में इसे ‘अब तक का सबसे बदतर चुनाव’ कहा गया है। प्रचार अभियान के दौरान दोनों उम्मीदवारों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार और घोटालों में शामिल रहने के आरोप लगाए। दक्षिण कोरिया इस समय जायदाद की महंगाई, जीवन स्तर की बढ़ती लागत और आबादी घटने की समस्या से जूझ रहा है।
निर्वाचित राष्ट्रपति यून ने कहा है कि वे अमेरिका और जापान के साथ दक्षिण कोरिया के संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। दूसरी तरफ चीन और उत्तर कोरिया के प्रति वे सख्त रुख दिखाएंगे। निवर्तमान राष्ट्रपति मून ने अपने कार्यकाल के दौरान उत्तर कोरिया के साथ मेलमिलाप की नीति अपनाई थी। यून की पार्टी इस नीति की कड़ी आलोचक रही है। यून ने कहा है कि वे उत्तर कोरिया से अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करने की मांग करेंगे।
थाड से घबराता है चीन
मार्केट एजेंसी कैपिटल इकॉनमिक्स में अर्थशास्त्री एलेक्स होल्म्स ने कहा है कि दक्षिण कोरिया ने अगर चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया, तो उसे गंभीर आर्थिक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। होल्म्स ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- यून ने अमेरिका से अपील की है कि वह अपनी टर्मिनल हाई एल्टीट्यड एरिया डिफेंस (थाड) मिसाइलें दक्षिण कोरिया में तैनात करे। जब पहली बार दक्षिण कोरिया में इन मिसाइलों को तैनात किया गया था, तब चीन ने बदला लेने के लिए आर्थिक कार्रवाई की थी। उस कारण दक्षिण कोरिया आने वाले चीनी पर्यटकों की संख्या बेहद घट गई। उधर चीन में दक्षिण कोरिया में निर्मित वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आई। इन सबका दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत खराब असर हुआ था।
लेकिन कई टीकाकारों का कहना है कि यून के रुख से चीन के लिए टकराव का एक और मोर्चा उभरेगा। जिस समय वह दूसरे मोर्चों पर उलझा हुआ है, ऐसा होना उसके लिए अच्छी खबर नहीं है।
कई विश्लेषक यून को ‘दक्षिण कोरिया का ट्रंप’ बताते हैं। महिलाओं के खिलाफ उनके पूर्वाग्रह भरी सोच और समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने वाली उनकी रणनीति से देश का एक बड़ा हिस्सा चिंतित रहा है। यहां के अखबारों ने अब यून से अपील की है कि चुनाव प्रचार वाले तेवर छोड़ कर उन्हें देश को एकजुट करने की कोशिश करनी चाहिए। अखबार चोसुन आइबो ने लिखा है- अगर यून विभाजित देश को एकजुट करने की राह पर चलते हैं, तो वे लोग भी उनकी तारीफ करेंगे, जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिया है।