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चीन: कर्मचारियों को देर से सेवानिवृत्ति देने का फैसला, सरकारी खजाने पर बोझ कम करने के लिए उठाया कदम

Sun, 27 Mar 2022 08:44 PM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 27 Mar 2022 08:44 PM IST
सार

चीन की ओर से लिया गया यह फैसला 30 दिसंबर को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्टेट काउंसिल की ओर से जारी बुजुर्ग देखभाल सेवा प्रणाली के लिए 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत आया है।

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China: Decision to give late retirement to employees steps taken to reduce burden on government treasury
शी जिनपिंग - फोटो : Agency

विस्तार

चीन में कठोर ‘एक बच्चे की नीति’ के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। अपनी बूढ़ी होती आबादी को लेकर सांसत में आए चीन ने सरकारी खजाने पर पेंशन के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने 1 मार्च से सरकारी कर्मचारियों के लिए विलंबित सेवानिवृत्ति लागू की है। 

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चीन की ओर से लिया गया यह फैसला 30 दिसंबर को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्टेट काउंसिल की ओर से जारी बुजुर्ग देखभाल सेवा प्रणाली के लिए 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत आया है। चीन के विशेषज्ञ और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी के प्रोफेसर फेंग चोंगई ने एपोक टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इस फैसले की वजह यह है कि स्थानीय सरकारें आर्थिक समस्याओं का सामना कर रही हैं। इस नीति पर 2013 से काम हो रहा था मगर जबर्दस्त विरोध की वजह से इसका कार्यान्वयन टलता रहा। 
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फेंग ने कहा, सीसीबी की परिवार नियोजन की क्रूर ‘एक बच्चे नीति’ ने जनसंख्या को प्रभावित किया। इसकी वजह से न केवल महिला-पुरुष के लिंग अनुपात में असंतुलन पैदा हुआ बल्कि इससे देश का श्रम बल बुरी तरह प्रभावित हुआ और चीन में तेजी से समाज बूढ़ा होने लगा। 
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उन्होंने कहा, सीसीपी की नई नीति से भी समस्या ही पैदा होगी क्योंकि हर साल लाखों की संख्या में युवा स्नातक हो रहे हैं मगर उनके पास नौकरी के अवसर नहीं होंगे क्योंकि लोग देर से सेवानिवृत्त होंगे। ऐसे में बेरोजगारी बढ़ेगी। 


एक ताइवानी अर्थशास्त्री वू जियालॉन्ग ने कहा, सीसीपी के लिए विलंबित सेवानिवृत्ति आर्थिक बोझ से बचने का अंतिम हथियार था। उन्होंने इसके साथ ही आशंका जताई कि भविष्य में आर्थिक दबाव के कारण विद्रोह भी हो सकता है। 

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