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China Dam Near Brahmaputra: क्या भारतीय सीमा के पास अब तक का सबसे बड़ा डैम बनेगा? चीन ने परियोजना को दी मंजूरी
Thu, 26 Dec 2024 04:40 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 26 Dec 2024 04:40 PM IST
सार
चीन भारतीय सीमा के पास अब तक का सबसे बड़ा डैम बनाने की तैयारी कर रहा है। खबरों के मुताबिक चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाले इस बांध की परियोजना को मंजूरी दे दी है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी बांध निर्माण परियोजना भी माना जा रहा है।
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चीन ने ब्रह्मपुत्र पर दुनिया के सबसे बड़े बांध परियोजना को मंजूरी दी (नदी की फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
पड़ोसी देश चीन एक बार फिर भारत की सीमा पर चौंकाने वाली गतिविधियों को अंजाम देने में लगा है। 137 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाली दुनिया की सबसे बड़ी बांध निर्माण परियोजना को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या भारतीय सीमा के पास चीन अब तक का सबसे बड़ा डैम बनाएगा? चीन की तरफ से परियोजना को दी गई मंजूरी के बाद नदी के किनारे बसे देशों - भारत और बांग्लादेश में चिंता बढ़ गई है। चीन की प्रस्तावित योजना के मुताबिक बांध का निर्माण तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर भारतीय सीमा के पास किया जाएगा।
ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक जलविद्युत परियोजना को मंजूरी
बुधवार को सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ पर जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, चीनी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है। तिब्बत में इस नदी को यारलुंग जांगबो नाम से जाना जाता है। परियोजना के लिए एक बांध बनाया जाना है। इसे हिमालय के करीब एक विशाल घाटी में बनाया जाएगा। इसी स्थान से ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश की तरफ मुड़ जाती है।
चीन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा, 137 बिलियन डॉलर की है बांध परियोजना
चीन के इस बड़े फैसले के बारे में गुरुवार को हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर में भी चर्चा की गई। इसके मुताबिक चीन के बांध में कुल निवेश एक ट्रिलियन युआन (137 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से भी अधिक हो सकता है। इतनी बड़ी राशि से बनने वाला यह बांध अगर तैयार होता है चीन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा। फिलहाल चीन का थ्री गॉर्जेस बांध दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है। 137 बिलियन डॉलर की यह परियोजना दुनिया की किसी भी अन्य एकल बुनियादी ढांचा परियोजना को बौना साबित कर देगी।
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2020 में चीन ने प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी
बता दें कि चीन 1.5 बिलियन डॉलर लागत जैम हाइड्रोपावर स्टेशन की शुरुआत 2015 में ही कर चुका है। यह तिब्बत की सबसे बड़ी परियोजना है। ब्रह्मपुत्र पर डैम की यह परियोजना चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-25) का हिस्सा है। 2020 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) ने जिस प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी थी, यह उसी का हिस्सा है। चीन इस परियोजना को देश के आर्थिक-सामाजिक विकास और 2035 तक अमल में लाए जाने वाले दीर्घकालिक उद्देश्यों का अंग बताता है।
ड्रैगन भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है
इस परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत में चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि बांध के आकार और पैमाने के कारण चीन ब्रह्मपुत्र के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकेगा। जल प्रवाह पर अधिकार मिलने पर पड़ोसी देश के साथ टकराव की स्थिकि में चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है।
भारत भी ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है
यह भी दिलचस्प है कि चीन के अलावा ब्रह्मपुत्र पर भारत भी बांध बना रहा है। हालांकि, यह परियोजना तिब्बत नहीं, अरुणाचल प्रदेश में है। भारत और चीन ने सीमा पार की नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए 2006 में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की स्थापना की थी। इसके तहत चीन बाढ़ के मौसम में भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी के जलस्तर से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी मुहैया कराता है।
चीनी विदेश मंत्री के साथ वार्ता के समय भारत ने उठाया मुद्दा
सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता के दौरान भी इस पर चर्चा हुई थी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 18 दिसंबर को बीजिंग में हुई बातचीत में सीमा पार की नदियों के डेटा साझा करने पर चर्चा हुई थी।
संबंधित वीडियो-
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ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक जलविद्युत परियोजना को मंजूरी
बुधवार को सरकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ पर जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, चीनी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी है। तिब्बत में इस नदी को यारलुंग जांगबो नाम से जाना जाता है। परियोजना के लिए एक बांध बनाया जाना है। इसे हिमालय के करीब एक विशाल घाटी में बनाया जाएगा। इसी स्थान से ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश की तरफ मुड़ जाती है।
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चीन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा, 137 बिलियन डॉलर की है बांध परियोजना
चीन के इस बड़े फैसले के बारे में गुरुवार को हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की खबर में भी चर्चा की गई। इसके मुताबिक चीन के बांध में कुल निवेश एक ट्रिलियन युआन (137 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से भी अधिक हो सकता है। इतनी बड़ी राशि से बनने वाला यह बांध अगर तैयार होता है चीन अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा। फिलहाल चीन का थ्री गॉर्जेस बांध दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है। 137 बिलियन डॉलर की यह परियोजना दुनिया की किसी भी अन्य एकल बुनियादी ढांचा परियोजना को बौना साबित कर देगी।
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2020 में चीन ने प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी
बता दें कि चीन 1.5 बिलियन डॉलर लागत जैम हाइड्रोपावर स्टेशन की शुरुआत 2015 में ही कर चुका है। यह तिब्बत की सबसे बड़ी परियोजना है। ब्रह्मपुत्र पर डैम की यह परियोजना चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना (2021-25) का हिस्सा है। 2020 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) ने जिस प्रमुख नीतिगत दस्तावेज को स्वीकृति दी थी, यह उसी का हिस्सा है। चीन इस परियोजना को देश के आर्थिक-सामाजिक विकास और 2035 तक अमल में लाए जाने वाले दीर्घकालिक उद्देश्यों का अंग बताता है।
ड्रैगन भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है
इस परियोजना को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत में चिंताएं पैदा हो गई हैं, क्योंकि बांध के आकार और पैमाने के कारण चीन ब्रह्मपुत्र के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकेगा। जल प्रवाह पर अधिकार मिलने पर पड़ोसी देश के साथ टकराव की स्थिकि में चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए भारी मात्रा में पानी छोड़ने की कुटिल चाल भी चल सकता है।
भारत भी ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है
यह भी दिलचस्प है कि चीन के अलावा ब्रह्मपुत्र पर भारत भी बांध बना रहा है। हालांकि, यह परियोजना तिब्बत नहीं, अरुणाचल प्रदेश में है। भारत और चीन ने सीमा पार की नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए 2006 में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) की स्थापना की थी। इसके तहत चीन बाढ़ के मौसम में भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी के जलस्तर से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी मुहैया कराता है।
चीनी विदेश मंत्री के साथ वार्ता के समय भारत ने उठाया मुद्दा
सीमा मुद्दे पर चीन के विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की वार्ता के दौरान भी इस पर चर्चा हुई थी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 18 दिसंबर को बीजिंग में हुई बातचीत में सीमा पार की नदियों के डेटा साझा करने पर चर्चा हुई थी।
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