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China CPC Congress: चीन का पैंतरा, सीपीसी बैठक में चलाया गलवां घाटी संघर्ष का वीडियो क्लिप

Mon, 17 Oct 2022 01:11 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 17 Oct 2022 01:11 AM IST
सार

क्यूई फबाओ (Qi Fabao) पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के 304 प्रतिनिधियों में से एक थे, जिन्हें पार्टी की सभी महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए चुना गया है। 20वीं कांग्रेस की बैठक का उद्घाटन राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया। उन्होंने उद्घाटन में लगभग 2,300 प्रतिनिधियों और आमंत्रितों को संबोधित करते हुए एक लंबी रिपोर्ट पढ़ी।

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China CPC 20th Congress: Galwan Valley clash clip shown at key China meet opening
सीपीसी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस। - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब

विस्तार

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस का सप्ताह भर चलने वाला सत्र रविवार को शुरू हुआ, यह बैठक 22 अक्तूबर तक चलेगी। बैठक के उद्घाटन समारोह में चीन को गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुआ संघर्ष याद आया। जून, 2020 में गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ संघर्ष में घायल हुए चीनी सैन्य कमांडर ने रविवार को बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में  सीपीसी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के उद्घाटन में भाग लिया।

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क्यूई फबाओ (Qi Fabao) पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के 304 प्रतिनिधियों में से एक थे, जिन्हें पार्टी की सभी महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने के लिए चुना गया है। 20वीं कांग्रेस की बैठक का उद्घाटन राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने किया। उन्होंने उद्घाटन में लगभग 2,300 प्रतिनिधियों और आमंत्रितों को संबोधित करते हुए एक लंबी रिपोर्ट पढ़ी। इस दौरान जिनपिंग ने स्थानीय जंग और सीमा मुद्दों का जिक्र करते हुए किसी देश विशेष का नाम नहीं लिया। फबाओ जून 2020 में गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ संघर्ष में घायल हो गये थे। शी और अन्य नेताओं के कार्यक्रम स्थल ‘ग्रेट हॉल ऑफ पीपल’ में पहुंचने से पहले वहां बड़ी स्क्रीनों पर पीएलए के गलवां में हुए संघर्ष के वीडियो फुटेज के हिस्से चलाये गये, जिसमें फबाओ भी शामिल थे।
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ग्रेट हॉल ऑफ पीपल में गलवां संघर्ष का फुटेज चलाने के बाद पीएलए रेजिमेंट कमांडर फबाओ को राष्ट्रीय कांग्रेस के एक प्रतिनिधि के रूप में दिखाया गया जिससे उनका कद और ऊंचा हो गया है। वीडियो क्लिप में उन्हें 15 जून, 2020 को दोनों देशों के सीमावर्ती सैनिकों के बीच हिंसक झड़प से पहले भारतीय सैनिकों की ओर भागते हुए दिखाया गया। संक्षिप्त फुटेज विभिन्न क्षेत्रों में सीपीसी की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले एक लंबे वीडियो का हिस्सा था। फुटेज विशेष रूप से पीएलए से संघर्ष के दौरान का प्रतीत होता है, जो गलवां घाटी की घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था।
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क्यूई चीन की भारत विरोधी कहानी का मुख्य किरदार
क्यूई चीन की भारत विरोधी कहानी का एक मुख्य हिस्सा रहे हैं क्योंकि उसका नाम फरवरी, 2021 में गलवां संघर्ष में घायल हुए अधिकारी के रूप में सामने आया था। उन्हें "सीमा की रक्षा के लिए हीरो रेजिमेंटल कमांडर" की उपाधि से सम्मानित किया गया था। इस साल फरवरी में, भारत ने बीजिंग में हुए शीतकालीन ओलंपिक 2022 में खेलों के उद्घाटन और समापन समारोह दोनों के राजनयिक बहिष्कार की घोषणा की थी क्योंकि चीन ने खेलों के उद्घाटन से पहले क्यूई को ओलंपिक मशाल वाहक के रूप में चुना था। बीजिंग खेलों के लिए मशाल रिले में 1,200 मशाल वाहकों में क्यूई भी शामिल थे। 

चीन की सेना लड़ने और जीतने के लिए सैन्य प्रशिक्षण और लड़ाकू तैयारियां बढ़ाएगी: जिनपिंग
बैठक के उद्घाटन के बाद अपने भाषण में शी जिनपिंग ने कहा कि चीन "युद्ध की परिस्थितियों में सैन्य प्रशिक्षण को तेज करेगा, संयुक्त प्रशिक्षण, फोर्स ऑन फोर्स प्रशिक्षण और उच्च तकनीक प्रशिक्षण पर जोर देगा।  उनकी अगुवाई में चीन की सेना ‘रणनीतिक प्रतिरोध’ की मजबूत प्रणाली बनाने के साथ ही ‘लड़ने और जीतने’ के लिए सैन्य प्रशिक्षण औक लड़ाकू तैयारियों को तेज करेगी। शी ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की पांच साल में एक बार होने वाली कांग्रेस में अपनी कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए यह बात कही। हालांकि शी ने 'स्थानीय युद्धों' के संदर्भ में किसी विशेष देश का उल्लेख नहीं किया। पीएलए की सर्वोच्च कमान केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) की अगुवाई करने वाले शी ने अपनी 63 पन्नों की रिपोर्ट का एक विशेष हिस्सा सेना को समर्पित किया।

अपनी रिपोर्ट में शी ने कहा कि 2027 में पीएलए के पूर्ण सत्र के लक्ष्यों को प्राप्त करना और चीन के सशस्त्र बलों को और अधिक तेजी से विश्वस्तरीय मानकों तक पहुंचाना एक आधुनिक समाजवादी देश के निर्माण के लिए रणनीतिक कार्य हैं। उन्होंने कहा कि हम रणनीतिक प्रतिरोध की मजबूत प्रणाली स्थापित करेंगे, नई लड़ाकू क्षमताओं के साथ नए क्षेत्रीय बलों का अनुपात बढ़ाएंगे, मानवरहित एवं कुशाग्र लड़ाकू क्षमताओं के विकास को गति प्रदान करेंगे और नेटवर्क सूचना प्रणाली के समन्वित विकास और अनुप्रयोग को बढ़ावा देंगे।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य अभियानों के बीच शी के बयान महत्वपूर्ण
शी ने कहा कि हम संयुक्त परिचालनों के लिए कमान प्रणाली को उन्नत करेंगे और निगरानी और त्वरित चेतावनी, संयुक्त हमलों, युद्ध क्षेत्रों में सहयोग एवं एकीकृत साजो-सामान समर्थन के लिए अपनी प्रणाली और क्षमता का विस्तार करेंगे। संसाधन संपन्न हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य अभियानों के बीच शी के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है, हालांकि ताइवान, फिलीपीन, ब्रूनेई, मलेशिया और वियतनाम इसके हिस्सों पर अपना दावा करते हैं। बीजिंग ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं। चीन के पूर्वी चीन सागर में जापान के साथ भी क्षेत्रीय विवाद चल रहा है।

शी ने कहा कि हम नियमित आधार पर और विविध प्रकार से अपने सैन्य बलों को तैनात करने में सक्षम बनेंगे और हमारी सेना अपने अभियानों में दृढ़ और लचीला दोनों तरह का रुख रखेगी। यह हमें हमारे सुरक्षा अवस्थाओं को आकार देने, संकटों और संघर्षों का प्रतिरोध और प्रबंधन करने एवं स्थानीय युद्धों को जीतने में समर्थ बनाएगा। उन्होंने कहा कि हम सेना और सरकार के बीच एवं सेना और जनता के बीच एकता को मजबूत करेंगे।

ताइवान के बलपूर्वक विलय के वादे से जिनपिंग ने किया कांग्रेस का आगाज
ताइवान के बलपूर्वक विलय, क्वाड और ऑकस की चुनौती का डर दिखाकर जिनपिंग ने दो घंटे के भाषण में अपनी दावेदारी पेश की। ताइवान के चीन में विलय की योजना पेश करते हुए जिनपिंग ने कहा कि ताकत का इस्तेमाल कर ताइवान का चीन में पूर्ण विलय हमेशा उनकी योजना का हिस्सा रहेगा। उन्होंने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन बलपूर्वक कुचलने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

भारत के खिलाफ पाकिस्तान, म्यांमार व अन्य देशों संग गुटबंदी में जुटे जिनपिंग ने क्वाड और ऑकस को क्षेत्रीय शांति व स्थिरता के लिए खतरा बताते कहा कि चीन एकपक्षवाद का विरोध करता है। जिनपिंग ने कहा कि क्वाड और ऑकस जैसे गुट चीन के उदय के खिलाफ तैयार हो रहे हैं। उइगर मुस्लिमों के नरसंहार में जुटे जिनपिंग ने महासचिव के तौर पर  सरकार के पांच वर्ष के कामकाज की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र संग मिलकर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सुरक्षा कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को स्वतंत्र जांच से रोकने और आए दिन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन को संरक्षण देने वाले जिनपिंग ने दावा किया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संबंधों का बुनियादी मानदंड मानती है।

दोहरे मापदंड
अपने दो कार्यकाल के दौरान पूरे दक्षिणी चीन सागर को हड़पने के लिए सैन्य आक्रामकता और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कृत्रिम द्वीपों के निर्माण को बढ़ावा देने वाले शी ने कहा कि चीन ताकत की राजनीति और शीत युद्ध जैसी कूटनीति के खिलाफ है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में भारत के विरोध के बावजूद सीपैक का निर्माण करने वाले शी ने कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखलंदाजी को गलत मानता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दोहरे मापदंडों का विरोधी है।

विस्तारवाद का विरोध
तिब्बत, मंगोलिया और अक्साई चिन से लेकर कई समुद्री द्वीपों पर अवैध कब्जा जमाकर बैठे और लगातार सीमा पर विस्तावादी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाले चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने अधिवेशन में कहा कि चीन आधिपत्य व विस्तारवाद के खिलाफ है और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के पांच सिद्धांतों का कठोरता से पालन करता है। अफ्रीकी देशों को उपनिवेश जैसा इस्तेमाल करने की परिपाटी शुरू करने वाले शी ने तीसरे कार्यकाल के लिए समर्थन जुटाने के लिए कहा कि वह नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने, समानता, खुलेपन व सहयोग के आधार पर साझेदारी बढ़ाने और अन्य देशों के साथ हितों को व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

दुनिया में लोकतंत्र की गुहार
चीन को अघोषित तानाशाही की तरफ ले जा रहे जिनपिंग ने कहा कि चीन वैश्विक शासन प्रणाली के सुधार और विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बलपूर्वक लोगों को नास्तिकता अपनाने को मजबूर करने वाली शासन व्यवस्था को शी ने बहुपक्षवाद को कायम रखने वाला बताया।


संप्रभुता से नहीं करेंगे समझौता
जिनपिंग की ताइवान के बलपूर्वक विलय की टिप्पणी पर ताइवान के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता चांग तुन हान ने कहा कि यह ताइवानी लोगों का दृढ़ संकल्प है कि किसी भी कीमत पर अपनी क्षेत्रीय अखंडता व संप्रभुता की रक्षा की जाएगी।

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