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CPEC के तहत पीओके में 1,124 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट बनाएगा चीन

Tue, 02 Jun 2020 03:35 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पाकिस्तान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पाकिस्तान Published by: Tanuja Yadav Updated Tue, 02 Jun 2020 03:35 PM IST
सार

  • सीपीईसी के तहत पीओके में चीन बनाएगा 1,124 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट
  • निजी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड की 127वीं बैठक में दी गई जानकारी
  • पाकिस्तान में झेलम नदी के ऊपर बनेगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट

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china construct 1124 megawatt power project in pakistan occupied kashmir under cpec
China-Pak CPEC

विस्तार

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत चीन, भारत के विरोध के बाद भी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 1,124 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट बनाने की तैयारी में है। इस प्रोजेक्ट का नाम कोहला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट रखा गया है।

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पाकिस्तान के निजी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड की 127वीं बैठक में कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की जानकारी दी गई। इस बैठक के अध्यक्ष पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री ऊमर अय्यूब थे। दी एक्सप्रेस ट्रिब्यून में के मुताबिक बैठक में बताया गया कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के तहत एक एग्रीमेंट तैयार किया गया।
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इस एग्रीमेंट में चीन की थ्री जॉर्ज कॉर्पोरेशन, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के अधिकारी और निजी पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (पीपीआईबी) की सहमति बनी। जिसके तहत पीओके में 1,124 मेगावाट का हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।
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यह प्रोजेक्ट कश्मीर में बहने वाली झेलम नदी के ऊपर बनेगा। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पाकिस्तान के लोगों को पांच अरब से ज्यादा साफ और कम लागत वाली बिजली की यूनिट उपलब्ध करानी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर के रूप में होने वाला ये अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।

तीन हजार किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मुख्य उद्देश्य चीन और पाकिस्तान को आपस में रेल, सड़क, पाइपलाइन और ऑप्टिकल केबल फाइबर नेटवर्क के जरिए जोड़ना है। ये गलियारा चीन के शिंजियांग और पाकिस्तान के ग्वादर बंदरहगाह को जोड़ेगा और चीन की अरब सागर तक भी पहुंच बढ़ जाएगी।
 
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पीओके से होकर गुजरेगा और इस पर भारत अपनी असहमति जता चुका है। पिछले महीने भारत ने पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्टिस्तान में डाम बनाने का विरोध किया था। 

पिछले महीने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत की स्थिति एक जैसी और साफ है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्र हमेशा से भारत का अभिन्न अंग है, था और रहेगा। भारत ने हमेशा चीन और पाकिस्तान दोनों देशों को इसपर अपना विरोध जताया है। 


पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष अयुब खान के पोते ऊमर अयुब ने कहा कि सरकार ने पाकिस्तान की जनता को सस्ती दरों पर बिजली सप्लाई करने की फैसला ले लिया है, इसलिए हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर और कोयले पर आधारित प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दी जाएगी।

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