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कोरोना वायरस को छिपाने के लिए चीन ने अपने ही नागरिकों को दिया धोखा, दस्तावेज में हुआ खुलासा

Thu, 16 Apr 2020 09:39 PM IST
श्रीधर मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग,
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग, Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Thu, 16 Apr 2020 09:39 PM IST
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China cheated its own citizens to hide the corona virus, documents reveal
China CoronaVirus - फोटो : Social Media

चीन की तरफ से कोरोना वायरस को छिपाने को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। चीन की शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी ने 14 जनवरी को प्रांतीय अधिकारियों को बता दिया था कि नए कोरोना वायरस की वजह से वे महामारी जैसे हालत का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने छह दिनों तक लोगों को सतर्क नहीं किया।

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एसोसिएटेड प्रेस को मिले आंतरिक दस्तावेजों से पता चला है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने गुप्त रूप से महामारी से निपटने की तैयारियों के आदेश दिए। जबकि, राष्ट्रीय टेलीविजन पर उन्होंने महामारी के फैलने को तवज्जो नहीं दी।
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राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सातवें दिन यानी की 20 जनवरी 2020 को लोगों को इस वायरस के बारे में जानकारी दी। पूर्व प्रभावी संक्रमण आंकड़ों के मुताबिक तब तक करीब एक हफ्ते की चुप्पी के कारण तीन हजार से अधिक लोग कोरोना वायरस के संक्रमण से संक्रमित हो चुके थे।
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आंतरिक दस्तावेजों के मुताबिक, चीन के रोग नियंत्रण केंद्र ने स्थानीय अधिकारियों से मिले किसी भी मामले को रजिस्टर नहीं किया। इस दौरान पांच जनवरी से 17 जनवरी के बीच अस्पतालों में सैकड़ों रोगी भर्ती हो रहे थे। ऐसा न केवल वुहान में हो रहा था बल्कि पूरे देश में हो रहा था।

वुहान में डॉक्टरों और नर्सों ने कहा कि इस तरह के कई संकेत हैं कि दिसंबर के अंत तक कोरोना वायरस लोगों के बीच फैलेगा। लेकिन अधिकारियों ने इस तरह के मामले बताने वाले मेडिकल कार्यकर्ताओं की आवाजें दबा दी।

सूचना को ऊपर भेजने से पहले निरीक्षकों को कर्मचारियों की तरफ से रिपोर्ट देना जरूरी था। इस दौरान बीमारी के बारे में चेतावनी देने वाले सभी डॉक्टरों को सजा दी गई।

चेतावनी को दबाए जाने से शीर्ष के नेता अंधेरे में रहे। चीन के बाहर संक्रमण का पहला मामला 13 जनवरी को थाईलैंड में आया, जिससे बीजिंग में नेतृत्व को महामारी की संभावना का आभास हुआ। चीन के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी मा शियावेई ने कहा कि वायरस के विदेशों में फैलने की संभावना से स्थिति काफी बदली।

मा की तरफ से 14 जनवरी को की गई गुप्त टेलीकांफ्रेंस से पता चलता है कि चीन के अधिकारी काफी चिंतित थे। वो जनता को जो जानकारी दी गई उससे कहीं अधिक भवायह स्थिति का आकलन कर रहे थे।


कुछ हफ्ते तक अधिकारी यही दोहराते रहे कि मानव से मानव में संचरण का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं है और बीमारी को रोकने लायक और नियंत्रण करने लायक बताया। लेकिन टेलीकांफ्रेंसिंग में मा ने कहा कि क्लस्टर मामलों से पता चलता है कि मानव से मानव में संचरण संभव है।

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