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ड्रैगन की होशियारी: बिना वादा निभाए ही डब्ल्यूटीओ की सदस्यता का खूब फायदा उठा लिया चीन ने

Mon, 08 Nov 2021 06:31 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 08 Nov 2021 06:31 PM IST
सार

चीन दिसंबर 2001 में डब्ल्यूटीओ का सदस्य बना था। उसके बाद से उसने आयात शुल्क घटाते हुए आयात की मात्रा काफी बढ़ा ली है। इसमें गुजरे 20 साल में 740 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि उसके निर्यात में 870 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है...

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China became a member  World Trade Organization in 2001 and Since then its international trade has increased nine times
डब्ल्यूटीओ - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की सदस्यता का चीन ने जमकर फायदा उठाया है। चीन 20 साल पहले इस अंतरराष्ट्रीय संस्था का सदस्य बना था। उसके बाद से उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नौ गुना बढ़ोतरी हुई है। इस रूप में उसने विश्व व्यापार में अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। जबकि उसने डब्ल्यूटीओ से किए अपने वायदे के मुताबिक अपने देश के पब्लिक सेक्टर उद्यमों में जरूरी सुधार लागू नहीं किए हैं।

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20 साल में 740 फीसदी का इजाफा

वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूटीओ की सदस्यता मिलने का ही यह नतीजा रहा कि चीन की छवि ‘दुनिया भर के कारखाने’ के रूप में बन गई। चीन दिसंबर 2001 में डब्ल्यूटीओ का सदस्य बना था। उसके बाद से उसने आयात शुल्क घटाते हुए आयात की मात्रा काफी बढ़ा ली है। इसमें गुजरे 20 साल में 740 फीसदी का इजाफा हुआ है। जबकि उसके निर्यात में 870 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) के आंकड़ों के मुताबिक बीते 20 साल में चीन के व्यापार मूल्य में 810 फीसदी वृद्धि हुई है, जबकि इस दौरान वैश्विक व्यापार का कुल मूल्य सिर्फ 180 फीसदी बढ़ा है।

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विश्लेषकों कहना है कि डब्ल्यूटीओ की सदस्यता लेते वक्त चीन ने वादा किया था कि वह देश के अंदर सरकारी उद्यमों को मिलने वाली सब्सिडी खत्म करेगा। इसके अलावा उन्हें दी जाने वाली दूसरी सुविधाएं खत्म की जाएंगी। लेकिन उसने ऐसा असल में नहीं किया। इसके बावजूद बीते गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दावा किया था कि उनके देश ने अपने सारे वादे निभा दिए हैं। शंघाई में चल रहे चाइना इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो में अपने संबोधन में उन्होंने कहा- ‘चीन ने डब्ल्यूटीओ की सदस्यता लेते समय वादा किया था कि वह आयात शुल्क को 15.3 फीसदी से घटा कर 9.8 फीसदी पर ले आएगा। जबकि अब असल चीन में आयात शुल्क 7.4 फीसदी ही है।’
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लेकिन शी ने सरकारी उद्यमों को दी जाने वाली सब्सिडी का जिक्र नहीं किया। लेकिन जानकारों का कहना है कि ये ऐसा मुद्दा है, जिसकी वजह से चीन को डब्ल्यूटीओ से बाहर की व्यापार संधियों की सदस्यता पाने में दिक्कत पेश आई है। हाल में उसने सीपीटीपीपी संधि का सदस्य बनने के लिए अर्जी दी है। लेकिन इस संधि में शामिल एशिया प्रशांत क्षेत्र और लैटिन अमेरिका के कई देश उसे सदस्यता देने के मूड में नहीं हैं।

विश्व व्यापार में हिस्सा 13 फीसदी

चीन का आज विश्व व्यापार में हिस्सा 13 फीसदी है। 2001 में उसका हिस्सा सिर्फ चार फीसदी था। 2013 में इस मामले में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया था। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौतों में शामिल होने की अपनी अनिच्छा के कारण अमेरिका इस मामले में पिछड़ा है। जबकि चीन इस बीच 15 देशों के क्षेत्रीय कॉम्प्रिहेंसिव इकॉनमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) का सदस्य बन गया है और सीपीटीपीपी का सदस्य बनने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है।



डब्ल्यूटीओ ने चीन की व्यापार नीति की पिछले महीने समीक्षा की थी। वहां डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों ने चीन के व्यापार व्यवहारों के बारे में 2,500 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराईं। यह 2018 में हुई ऐसी समीक्षा की तुलना में 16 फीसदी ज्यादा है। इस आधार पर विश्लेषकों ने कहा है कि चीन के अनुचित व्यापार व्यवहार को लेकर दुनिया में चिंता लगातार बढ़ रही है।

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