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चीन की संसद में विवादित हांगकांग सुरक्षा विधेयक पारित, ट्रंप ने जताई थी नाराजगी

Thu, 28 May 2020 02:45 PM IST
अनवर अंसारी पीटीआई, बीजिंग
पीटीआई, बीजिंग Published by: अनवर अंसारी Updated Thu, 28 May 2020 02:45 PM IST
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China approves Hong Kong security legislation, defying Donald Trump Statement
हांगकांग प्रदर्शन - फोटो : PTI

चीन की संसद ने गुरुवार को हांगकांग के लिए एक नए विवादास्पद सुरक्षा कानून को मंजूरी दे दी जिससे पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी में बीजिंग के अधिकार को कमजोर करना एक अपराध हो जाएगा। इस नए कानून से चीनी सुरक्षा एजेंसियां पहली बार हांगकांग में अपने प्रतिष्ठान खोल सकती हैं।

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सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने हांगकांग के लिए नए सुरक्षा कानून समेत आखिरी दिन कई विधेयकों को मंजूरी दी। अब कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति ने यह विधेयक पारित कर दिया है और यह अगस्त तक कानून बन सकता है।
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विधेयक की पूरी जानकारी अभी मालूम नहीं है। हांगकांग में अधिकारियों ने कहा कि यह कानून बढ़ती हिंसा और आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक है और क्षेत्र के निवासियों को इससे डरने की जरूरत नहीं है।
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आलोचकों को डर है कि इस कानून से बीजिंग में नेतृत्व पर सवाल उठाने, प्रदर्शन में शामिल होने और स्थानीय कानून के तहत अपने मौजूदा अधिकारों का उपयोग करने के लिए हांगकांग निवासियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

चीन के इस कदम से हांगकांग में प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो गया है। हांगकांग की संसद ने जब एक अलग प्रस्तावित कानून पर चर्चा शुरू की तो बुधवार को फिर से झड़पें शुरू हो गई। इस विवादित कानून से चीन के राष्ट्रगान का अपमान करना अपराध के दायरे में आ जाएगा। अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने नए सुरक्षा कानून की निंदा करते हुए इसे हांगकांग वासियों की आजादी पर हमला बताया। 

कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के बीच अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के साथ ही व्हाइट हाउस ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हांगकांग के लिए चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से नाखुश हैं।

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को कांग्रेस को सूचित किया कि ट्रंप प्रशासन अब हांगकांग को चीनी भूभाग का स्वायत्त क्षेत्र नहीं मानता जिससे पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी को अमेरिका द्वारा दिए व्यापार और वित्तीय दर्जे में प्राथमिकता को वापस लेने की संभावना पैदा हो गई है।

बहरहाल ‘हांगकांग बार एसोसिएशन’ ने कहा कि चीन का प्रस्तावित नया सुरक्षा कानून अदालतों में दिक्कतों में फंस सकता है क्योंकि बीजिंग के पास अपने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी के लिए लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

हांगकांग में नए सुरक्षा कानूनों को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ी तनातनी

वहीं, हांगकांग पर अपना नियंत्रण कड़ा करने के लिए पेश किए गए चीन के विवादास्पद राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर अमेरिका द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाए जाने के बीच अमेरिका और चीन ने एक दूसरे पर तीखे प्रहार किए।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन ने कहा कि अमेरिका चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस के उन कदमों से बेहद चिंतित है जो 1984 के चीनी-ब्रितानी संयुक्त घोषणा पत्र के तहत हांगकांग को प्रदत्त अधिक स्वायत्तता एवं स्वतंत्रता को आधारभूत रूप से कमजोर करते हैं। यह घोषणा पत्र संयुक्त राष्ट्र में कानूनी रूप से बाध्य संधि के रूप में दर्ज है।

अमेरिका मिशन ने कहा कि यह वैश्विक चिंता का विषय है जो अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को खतरा पहुंचाता है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस मामले पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। अमेरिकी मिशन ने कहा कि इस प्रकार के कदम चीन द्वारा अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की अवमानना और पूरी अवहेलना को दर्शाते हैं। 

उसने बताया कि अमेरिका ने हांगकांग की लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं नागरिक स्वतंत्रता को खतरा पैदा करने वाले चीन के प्रस्तावित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पर चर्चा के लिए बधुवार को सुरक्षा परिषद की वर्चुअल बैठक बुलाई।

अमेरिकी मिशन ने बुधवार को कहा कि अपेक्षा के अनुसार चीन ने सुरक्षा परिषद की इस वर्चुअल बैठक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी। उसने कहा कि यह इस बात का एक और उदाहरण है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पारदर्शिता और अपने कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से डरती है।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका सुरक्षा परिषद की बैठक में चीन के निराधार अनुरोध को सिरे से खारिज करता है। उन्होंने ट्वीट किया कि हांगकांग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी विधेयक चीन का पूरी तरह आंतरिक मामला है। इसका सुरक्षा परिषद के जनादेश से कोई लेना-देना नहीं है। 

चीनी दूत ने कहा कि तथ्य बार-बार यह साबित करते हैं कि अमेरिका दुनिया के लिए संकट पैदा करता है। 

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