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ब्रिटेन: भटके हुए सिखों से किनारा करें, ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने बैसाखी पर कहा
Wed, 14 Apr 2021 01:28 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 14 Apr 2021 01:28 AM IST
सार
- लंदन में दिए संदेश में कहा, वे लोग सिख गुरुओं की शिक्षाओं से दूर जा रहे, उनके कामों से गुरु व उनके मानने वालों के सम्मान को क्षति पहुंच रही।
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Lord Rami Ranger, Chairman of British Sikh Association
- फोटो : ANI
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विस्तार
बैसाखी पर शुभकामना संदेश जारी करते हुए ब्रिटिश सिख एसोसिएशन ने कहा है कि सिख समुदाय भटके हुए सिखों से दूर रहें, उनसे किनारा करें। एसोसिएशन अध्यक्ष लॉर्ड रामी रेंजर ने कहा कि कुछ सिख कनाडा और यूनाटेड किंगडम में रहते हुए भारत के खिलाफ जहर उगलते हैं, और खालिस्तान के लिए अलगाववाद को बढ़ावा देते हैं। ऐसे लोग सिख गुरुओं की शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ जा रहे हैं। उनके कामों से गुरुओं और उनके मानने वालों के सम्मान को क्षति पहुंची है।
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उन्हाेंने कहा कि वे सिख भारतीय होने पर गर्व करते हैं और भारत को सिखों पर गर्व होता है। एक देश के रूप में संगठित रहते हुए बैसाखी उत्सव मनाएं। रामी ने भारत सरकार द्वारा सिख गुरुओं की शिक्षाओं और जीवन के बारे में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजनों के लिए आभार जताया।
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उन्हाेंने कहा कि यह खालसा का भाईचारा ही था, जिसने खैबर दर्रे से होने वाले अनंतहीन हमलों को रोका और भारतीय सभ्यता की रक्षा की। बैसाखी केवल सिखों का त्यौहार नहीं, बल्कि गुरुओं और उनके मानने वालों द्वारा किए गए त्याग की वजह से हर भारतीय को मिली धार्मिक स्वतंत्रता का उत्सव है। रामी ने कहा कि इसी दिन 1699 में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी ताकि अत्याचारी और अन्यायी मुगल शासक औरंगजेब का मुकाबला कर सकें।
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औरंगजेब भारत की विविधता खत्म करना चाहता था। गुरु गोविंद सिंह जी ने विविधता को स्वीकार करने, सम्मान देने और जरूरत हो तो उसकी रक्षा करने की सीख दी। आज भारत उसी विविधता का आनंद ले रहा है।