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सीनेट में सुनवाई: अमेजन में यूनियन बनाने के सवाल पर सफाई पेश करने से मुकर गए जेफ बेजोस

Sat, 13 Mar 2021 04:17 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 13 Mar 2021 04:17 PM IST
सार

सैंडर्स ने शुक्रवार को सीएनएन से कहा- ‘जेफ बेजोस दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं। कई रूपों में वे उस निरंकुश पूंजीवाद के प्रतीक हैं, जिसे हम अमेरिका में देख रहे हैं।’

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CEO of the Amazon Jeff Bezos denied to testify before the US Senate Budget Committee on the workers union in Amazon
अमेजन - फोटो : pixabay

विस्तार

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति और अमेजन कंपनी के सीईओ जेफ बेजोस ने अमेरिका में बढ़ती गैर-बराबरी के सवाल पर सीनेट की बजट समिति के सामने आ कर गवाही देने से इनकार कर दिया है। बजट समिति के अध्यक्ष और सोशलिस्ट नेता बर्नी सैंडर्स ने अगले हफ्ते इस मुद्दे पर सुनवाई करने का फैसला किया है। उनके इस फैसले को अमेजन कंपनी में यूनियन बनाने की चल रही कोशिशों से जोड़ कर देखा गया है। जब बजट समिति ने ये एलान किया, तो अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने उसकी हेडिंग दी- 'अमेजन में यूनियन की लड़ाई को सैंडर्स राजधानी ले आए।'

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सैंडर्स के प्रवक्ता माइक कास्का के मुताबिक बेजोस ने बजट समिति को भेजे अपने पत्र में गैर-बराबरी के मुद्दे पर गवाही देने में अपनी असमर्थता जताई है। ई-कॉमर्स की दुनिया की इस सबसे बड़ी कंपनी ने एक बयान में कहा कि वह प्रति घंटे 15 डॉलर न्यूनतम वेतन के प्रस्ताव की समर्थक है। वह पहले अपने कर्मचारियों के लिए ये नीति लागू कर चुकी है। अमेजन के एक प्रवक्ता ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हम न्यूनतम वेतन 15 डॉलर प्रति घंटा करके आमदनी की गैर-बराबरी घटाने के सीनेटर सैंडर्स की कोशिशों का समर्थन करते हैं। हमने 2018 में ही अपने यहां वे वेतन नीति लागू कर दी थी।’
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अगले हफ्ते होने वाली सुनवाई में अमेजन की कर्मचारी जेनिफर बेट्स की गवाही भी होगी। बेट्स अलाबामा राज्य में अमेजन कंपनी में यूनियन बनाने की चल रही मुहिम की नेताओं में एक हैं। सैंडर्स ने शुक्रवार को सीएनएन से कहा- ‘जेफ बेजोस दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं। कई रूपों में वे उस निरंकुश पूंजीवाद के प्रतीक हैं, जिसे हम अमेरिका में देख रहे हैं।’
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सैंडर्स का यह इंटरव्यू प्रसारित होने के थोड़ी देर बाद खबर आई कि बेजोस ने सीनेट समिति के सामने आने से इनकार कर दिया है। ये खबर आने के बाद बर्नी सैंडर्स ने एक ट्विट में कहा- ‘मुझे अफसोस है कि बेजोस आय और धन विषमता के सवाल पर हमारी सुनवाई में शामिल नहीं होंगे। चूंकि वे दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति हैं, इसलिए मैं इस बारे में उनके तर्क सुनना चाहूंगा कि वे यूनियन बनाने की कोशिशों का पुरजोर विरोध क्यों कर रहे हैं, जबकि मजदूरों के संगठित होने से उनके लिए वेतन और दूसरे लाभों में सुधार होगा।’

सीएनएन को दिए इंटरव्यू में सैंडर्स ने कहा था कि उन्होंने बेजोस को इसलिए बुलाया ताकि वे इस बारे में सफाई दे सकें कि बेसेमेर स्थित अमेजन कर्मचारियों को गरिमा से वंचित रखने के लिए वे इतनी बड़े पैमाने पर धन क्यों खर्च कर रहे हैं, जबकि महामारी के काल में उनकी अपनी संपत्ति 78 अरब डॉलर और बढ़ गई और अब उनकी कुल संपत्ति 183 अरब डॉलर की है।

गौरतलब है कि अलबामा राज्य के बेसेमेर में स्थित अमेजन फुलफिलमेंट सेंटर के कर्मचारियों के यूनियन बनाने की कोशिश पूरे अमेरिका के मेहनतकश तबके के संघर्ष के प्रतीक बनी हुई है। पिछले नवंबर में आए चुनाव नतीजों से यूनियन बनाने के मामले में मजदूरों का हौसला बढ़ा है। राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी बेसेमेर में यूनियन बनाने की मजदूरों की कोशिश का समर्थन किया है।  

सैंडर्स जब राष्ट्रपति चुनाव से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने की मुहिम चला रहे थे, तब से उन्होंने यूनियन बनाने के अधिकार को अपना एक अहम एजेंडा बनाया हुआ है। अब सीनेट की बजट समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्हें बढ़ती आर्थिक गैर-बराबरी को चर्चा के केंद्र में लाने की ताकत मिल गई है। न्यूनतम मजदूरी को बढ़ा कर 15 डॉलर प्रति घंटे करने के लिए वे लगातार अभियान चला रहे हैं।


रिपब्लिकन पार्टी यूनियन बनाने की कोशिशों की विरोधी रही है। अब उसके नेता दलील दे रहे हैं कि यूनियन बनाना मजदूरों के लिए हानिकारक होता है, क्योंकि इससे उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं और उस कारण कमजोर रोजगार पैदा होता है। लेकिन बढ़ती गैर-बराबरी ने ऐसी दलीलों को कमजोर किया है।

 

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