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ई-मेल का जवाब नहीं मिलता था तो चिट्ठी लिखकर दिया बिजनेस ऑफर, आज 7000 करोड़ रुपये का कारोबार चलाते हैं

Wed, 20 Feb 2019 02:06 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 20 Feb 2019 02:06 PM IST
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celonis owner alexander rinke used unique way to attract companies for business
सेलोनिस के सीईओ एलेक्जेंडर रिंके
डिजीटल होती दुनिया में जब इंटरनेट और ई-मेल और सोशल मीडिया के जरिए ज्यादातर बातचीत करते हैं, ऐसे में हाथ से लिखे पत्रों का चलन काफी कम हो गया है। विशेष रूप से व्यावसायिक जगत में तो इसका इस्तेमाल नहीं के बराबर होता है। लेकिन जर्मनी की टेक्नोलॉजी कंपनी सेलोनिस की सफलता के पीछे हाथ से लिखी चिट्ठियों का बड़ा योगदान रहा। 
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साल 2011 में म्यूनिख में 22 साल के एलेक्जेंडर रिंके ने अपने दो दोस्तों मार्टिन क्लेंक और बास्तियन के साथ सेलोनिस नाम की कंपनी खोली। यह एक हाई टेक डेटा माइनिंग आधारित स्टार्ट अप था जो अलग-अलग कंपनियों को सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कारोबार और कर्मचारियों के प्रदर्शन का आकलन करने, कमियों का पता लगाने और समाधान सुझाने का काम करता था।
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टाइप चिट्ठी भी काम नहीं आई

एलेक्जेंडर ने कई बड़ी कंपनियों को बिजनेस का प्रस्ताव देने के लिए ई-मेल भेजा। लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि किसी भी कंपनी ने उनके ई-मेल का जवाब नहीं दिया। फिर उन्होंने टाइप की हुई चिट्ठी भेजी। फिर भी कहीं से जवाब नहीं आया। 
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आखिरकार हाथ से लिखी चिट्ठी

आखिरी विकल्प के तौर पर एलेक्जेंडर ने अलग-अलग कंपनियों के सीईओ को हाथ से लिखा पत्र भेजना शुरू किया। इन पत्रों ने कमाल दिखाना शुरू किया और उन्हें मीटिंग के लिए जवाब आने लगे। 

एलेक्जेंडर बताते हैं, "हमने यह महसूस किया कि ज्यादातर कंपनियां अनजान सोर्स से आने वाले ई-मेल को ओपन तक नहीं करती है। टाइप किए हुए पत्र भी सेक्रेटरी स्तर से आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। लेकिन हाथ से लिखी चिट्ठियों से आत्मीयता पैदा होती है। इसलिए हमारे हाथ से लिखे पत्र अपने लक्ष्य तक पहुंचने लगे और हमें जवाब भी मिलने लगा। 

बीएमडब्ल्यू, लॉरियल, उबर जैसी कंपनियां बनी ग्राहक
आज की तारीख में कंपनी के पास बीएमडब्ल्यू, एक्सोन मोबाइल, जनरल मोटर्स, लॉरियल, सीमेंस, उबर और वोडाफोन जैसे ग्राहक हैं। कंपनी का नेटवर्थ 1 अरब डॉलर (करीब 7100 करोड़ रुपए) है। 

15 साल की उम्र में शुरू की थी पहली कंपनी 

बर्लिन के रहने वाले एलेक्जेंडर शुरुआत से ही उद्यमी बनना चाहते थे। उन्होंने 15 साल की उम्र में अपनी पहली कंपनी खोली थी। वह कंपनी हाईस्कूल छात्रों को ट्यूशन के लिए शिक्षक मुहैया कराती थी। इसके बाद 2011 में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करते हुए उन्हें सेलोनिस का आइडिया आया। 


वे एक प्रोजेक्ट के तहत मार्टिन और बास्तियन के साथ मिलकर एक कंपनी को कस्टमर सर्विस में सुधार करने के काम में जुटे। वहां काम करते हुए उन्हें पता चला कि किसी समस्या को दूर करने में कंपनी को पांच दिन तक का समय लग रहा था। लेकिन कोई देरी की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं था। 

फिर उन्होंने खामी खोजने के लिए ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया, जिसमें मानवीय और राजनीतिक दखल की गुंजाइश न हो। इसी से सेलोनिस का जन्म हुआ। 
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