पोप फ्रांसिस ने कहा, अर्थव्यवस्था से अधिक लोगों का जीवन महत्वपूर्ण है
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ईसाई धर्मगुरू पोप फ्रांसिस ने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लोग निराशावादी हुए हैं। उन्होंने कहा है कि लोगों को निराशावादी बनने से बचाना होगा। पोप फ्रांसिस ने कहा है कि लंबे वक्त से लगाए गए लॉकडाउन से बाहर आने के बाद लोग कह रहे हैं कि अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रह जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को सेंट पीटर बैसिलिका के समारोह में पोप फ्रांसिस ने ये बातें कहीं। फ्रांसिस ने कहा कि लोगों में ये धारणा बन चुकी है कि अब कुछ भी पहले जैसा सामान्य नहीं रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसी सोच से एक बात तो सौ फीसदी होगी और वो है उम्मीद वापस नहीं लौटेगी। उन्होंने खुद के चर्च के बंटवारे की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा है कि ऐसे वक्त में हमें एक-दूसरे के साथ रहना होगा। पोप फ्रांसिस ने कहा कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। लेकिन सभी चीजों से बढ़कर है कि हम सब भगवान की संतान हैं। सभी आस्तिकों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वो कैसे एक दूसरे के साथ मिलकर रहें। पोप फ्रांसिस ने कहा है कि महामारी ने हमें सिखाया है कि अहंकार कितना गलत है। सिर्फ अपनी जरूरतों का ख्याल रखना, लोगों से भेदभाव रखना, अपनी गलती को स्वीकार नहीं करना, कितना गलत है।
अहंकार को कैसे खत्म क्या जाए, इसके बारे में सोचना है। हर चीज को खराब नजरिए से देखने से रोकना है और हर बार ये कहना कि कोई भी चीज पहले की तरह नहीं रह जाएगी, इससे बचना है। पोप फ्रांसिस ने कहा कि अगर हर वक्त यही सोचते रहेंगे कि कोई भी चीज पहले की तरह नहीं जाएगी तो हम सारी उम्मीदें खो देंगे। पोप फ्रांसिस के इस समारोह में कुछ लोग मास्क लगाकर उपस्थित हुए थे।
वेटिकन को खोल दिया गया है लेकिन सुरक्षा के उपायों का अभी तक इस्तेमाल किया जा रहा है। पोप के आदेश से संक्रमण को फैलने से रोकने के एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं।
लोगों का जीवन बचाना अर्थव्यवस्था बचाने से ज्यादा महत्वपूर्ण
पोप फ्रांसिस ने कहा कि अर्थव्यवस्था से अधिक लोगों का जीवन महत्वपूर्ण है। ईसाई धर्मगुरु की यह टिप्पणी उस परिप्रेक्ष्य में आई है कि कोरोना महामारी पर नियंत्रण न पाने के बावजूद अनेक देशों ने अपने देश की अर्थव्यवस्था को खोलना शुरू कर दिया है। सेंट पीटर्स स्क्वॉयर में अपने संदेश में पोप ने कहा, बीमार लोगों की मदद जरूरी है। उनका जीवन बचाना जरूरी है। लोगों का जीवन बचाना अर्थव्यवस्था बचाना से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
हालांकि, अपने संबोधन में पोप ने किसी देश का नाम नहीं लिया। कोरोना जैसी महामारी के बीच अनेक देशों ने नौकरियों और लोगों के जीवन संघर्ष को देखते हुए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलना शुरू कर दिया है।
हालांकि, अभी तक इस महामारी पर काबू नहीं पाया जा सका है। पोप के संबोधन के दौरान सेंट पीटर्स स्क्वॉयर में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। अधिकांश लोग मास्क लगाए हुए थे। एक दूसरे से वे लोग शारीरिक दूरी बनाए हुए थे। बता दें कि सेंटपीटर्स स्क्वॉयर को गत सोमवार से आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया है।