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..तो चीन ने भी मदद से खींचे हाथ!: पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने फैलाई झोली, आर्थिक मदद फिर शुरू करने की मांग

Sat, 29 Apr 2023 09:32 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 29 Apr 2023 09:32 AM IST
सार

दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री एलिजाबेथ होर्स्ट ने साफ कह दिया है कि पाकिस्तान आईएमएफ के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और आईएमएफ जिन सुधारों पर सहमत हुए हैं, वे आसान नहीं हैं।

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Cash-Strapped Pakistan Urges America To Restore Military Financing and Sales
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बिगड़ती आर्थिक स्थिति के बीच अमेरिका से मांगी मदद। - फोटो : Social Media

विस्तार

कंगाली से जूझ रहा पाकिस्तान आए दिन किसी न किसी देश से मदद की गुहार लगाता दिख जाता है। थोड़े दिन पहले ही चीन के आगे हाथ फैलाया था, अब अमेरिका के आगे आर्थिक तंगी का रोना रो रहा है। तंगी से बेहाल पाकिस्तान ने गुरुवार को संयुक्त राज्य अमेरिका से ट्रंप प्रशासन के निलंबित किए गए सैन्य वित्तपोषण और बिक्री को हटाने का आग्रह किया है। 

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अमेरिका ने संबंध महत्वपूर्ण बताए तो पाक ने फैला दी झोली 

गौरतलब है, हाल ही में अमेरिका के एक अधिकारी ने कहा था कि क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध के काफी महत्व हैं। अब पाकिस्तान ने बाइडेन प्रशासन के सामने एक मांग रख दी है, जिससे साफ हो जाएगा कि रिश्ते कितने मजबूत हैं। दरअसल, पाकिस्तान के दूत मसूद खान ने वाशिंगटन में एक सेमिनार में कहा कि अमेरिका-पाकिस्तान के लिए यह महत्वपूर्ण है कि विदेशी सैन्य वित्तपोषण और सैन्य बिक्री को बहाल करे, जिसे पिछले प्रशासन द्वारा निलंबित कर दिया गया था।

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अमेरिका नहीं देगा खैरात

वहीं, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिका के प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री एलिजाबेथ होर्स्ट ने साफ कह दिया है कि पाकिस्तान आईएमएफ के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और आईएमएफ जिन सुधारों पर सहमत हुए हैं, वे आसान नहीं हैं। लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान देश को मजबूत वित्तीय स्तर पर वापस लाने के लिए ये कदम उठाए। अगर उसे आगे कर्ज में गिरने से बचना है और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाा है तो उसे अच्छे से आईएमएफ के साथ कामम करना पड़ेगा। 

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इस बयान से साफ है कि अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि हर बार खैरात नहीं मिलेगी, बल्कि अपने लिए काम भी करना पड़ेगा। 

सम्मेलन में हुई बातचीत से उम्मीद जगी

हाल ही में, उच्च-स्तरीय कूटनीतिक संवादों के कारण पाकिस्तान को अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की आशा की किरण दिखाई दी है। वॉशिंगटन में हुए सम्मेलन में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि कैसे अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को मजबूत किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट के अुसार, एक सवाल के जवाब में राजदूत खान ने कहा कि अमेरिकी सरकार के परामर्श से पाकिस्तान ने रूसी तेल के लिए अपना पहला ऑर्डर दिया है। खा ने अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में भी बात की। यह उल्लेख करते हुए कि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन दोनों अफगानिस्तान में आतंकवाद के विकास के बारे में चिंतित थे। 

उन्होंने कहा कि इस खतरे को खत्म करने के लिए मिलकर काम करेंगे। आज यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए एक खतरा है। अगर इसे रोका हीं गया, तो यह पूरी दुनिया में फैल जाएगा।

 

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