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कोरोना के टीके से बनने वाले थक्के के इलाज का पता चला, कनाडा के वैज्ञानिकों ने तैयार की दवा
Fri, 02 Jul 2021 07:39 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, टोरंटो
एजेंसी, टोरंटो
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 02 Jul 2021 07:39 AM IST
सार
- कनाडा के मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा, थिनर और इम्युनोग्लोबिन की हाई डोज से इलाज संभव
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कोरोना वैक्सीन के बाद खून के थक्के जमने की शिकायत (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोरोना के टीके से दुर्लभ मामलों में ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) जमने के मामले सामने आए थे। कनाडा के वैज्ञानिकों ने इस तकलीफ से निजात दिलाने के लिए नई जीवनरक्षक दवा तैयार कर ली है। मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसे मामलों के लिए एंटी क्लॉटिंग दवाओं के साथ नसों के जरिए हाई डोज की इम्युनो ग्लोबिन देने की सलाह दी है। इससे टीके से बने खून के थक्के को ठीक किया जा सकता है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन इंड्युज्ड इम्युन थ्रोम्बोटिक थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया (वीआईटीटी) एक दुर्लभ प्रकार का दुष्प्रभाव है जो कोरोना के टीके की एडीनोवायरस वेक्टर वैक्सीन से देखा गया है। ये तब होता है जब एंटीबॉडीज ब्लड प्रोटीन पर हमला बोल देती हैं जिसके कारण रक्त में प्लेटलेट सक्रिय हो जाता है। इस कारण दोनों मिलकर रक्त वाहिकाओं में खून का थक्का बना देते हैं।
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वीआईटीटी का सटीक इलाज पता
मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के डॉ. इसैक नेजी का कहना है कि वीआईटीटी का इलाज हमारे पास है। हम समय पर इसकी पहचान कर उसका इलाज कर सकते हैं और इसका सटीक तरीका हमें पता है। उनका कहना है कि इलाज के नए तरीके से हमने देखा है कि एंटीबॉडी के कारण सक्रिय हुए प्लेटलेट्स की मात्रा कम होती है जिससे ब्लड क्लॉट ठीक होने लगता है।
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जांच के तरीके में किया बदलाव
वैज्ञानिकों की टीम ने एचआईटी एंटीबॉडी टेस्ट के जरिए वीआईटीटी का पता लगाने की कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हुए। इसके बाद एचआईटी जांच में बदलाव किया। इसके बाद वीआईटीटी का पता चला जो एक दुर्लभ तरह की तकलीफ है। डॉक्टरों का कहना है कि इम्युनोग्लोबिन की हाई डोज और ब्लड थिनर दवाओं के जरिए इस तरह की तकलीफ से गुजरने वाले मरीजों का इलाज संभव है।