कनाडा में चुनाव: मुश्किल दिख रहा है प्रधानमंत्री ट्रुडो की कुर्सी का बचना
जस्टिन ट्रुडो 2015 से प्रधानमंत्री हैं। उन्हें एक लोकप्रिय नेता समझा जाता रहा है। लेकिन इस बार मध्यावधि चुनाव कराने का उनका दांव उलटा पड़ता दिख रहा है। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि समय से पहले चुनाव कराने के उनके फैसले को मतदाताओं ने पसंद नहीं किया है...
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कनाडा में आम चुनाव के सिलसिले में हुई दूसरी बहस में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो विपक्षी नेताओं के सवालों से घिरे नजर आए। वे इस सवाल पर लड़खड़ाते नजर आए कि जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, तब उन्होंने बेवजह क्यों देश पर मध्यावधि चुनाव थोप दिया। ट्रुडो ने संसद का कार्यकाल पूरा होने से दो साल पहले चुनाव कराने का फैसला किया। अब 20 सितंबर को नई संसद चुनने के लिए मतदान होगा।
दूसरी बहस बुधवार को हुई। इस दौरान मंच पर ट्रुडो के अलावा कंजरेविटव पार्टी के नेता एरिन ओ’टूल, न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह, फ्रेंच भाषी क्यूबेक राज्य की प्रादेशिक पार्टी- ब्लॉक क्यूबेसिस के नेता यवेस-फ्रांस्वां ब्लांशे और ग्रीन पार्टी की नेता एनामी पॉल मौजूद थे। ट्रुडो से बार-बार ये सवाल पूछा गया कि क्या अब वे यह वादा करेंगे कि इस बार जीतने पर चार साल के भीतर दोबारा चुनाव नहीं कराया जाएगा। इस बारे में ट्रुडो का जवाब कमजोर रहा।
कनाडा में अब तक लिबरल पार्टी या कंजरेवेटिव पार्टी ने ही सरकारों का नेतृत्व किया है। बाकी पार्टियां सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा तो रही हैं, लेकिन कभी वे सबसे बड़े दल के रूप में नहीं उभर पाईं। विश्लेषकों के मुताबिक ट्रुडो के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी और कंजरवेटिव पार्टी के एजेंडे में ज्यादा फर्क नहीं है। कल्याणकारी योजनाओं के अमल के तरीकों पर उनमें मतभेद रहे हैं। लेकिन मोटे तौर पर दोनों पार्टियों का एजेंडा एक जैसा रहा है। एरिन ओ’टूल ने इस बार कंजरवेटिव पार्टी का ज्यादा मध्यमार्गी चेहरा पेश करने की कोशिश की है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसलिए नेता का व्यक्तित्व ही सबसे निर्णायक पहलू बन गया है।
जस्टिन ट्रुडो 2015 से प्रधानमंत्री हैं। उन्हें एक लोकप्रिय नेता समझा जाता रहा है। लेकिन इस बार मध्यावधि चुनाव कराने का उनका दांव उलटा पड़ता दिख रहा है। चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि समय से पहले चुनाव कराने के उनके फैसले को मतदाताओं ने पसंद नहीं किया है। चुनाव प्रचार शुरू होने के समय लेकर लगातार उनकी लोकप्रियता गिरने के संकेत मिले हैं।
बुधवार को जारी जनमत सर्वेक्षणों के औसत के मुताबिक कंजरवेटिव पार्टी 33.7 फीसदी मतदाताओं के समर्थन के साथ पहले नंबर पर चल रही है। लिबरल पार्टी को फिलहाल 31.2 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिलने की संभावना है। जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी को 20.4 फीसदी मतदाताओं का समर्थन मिल रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव से कनाडा की जिस नीति पर सबसे ज्यादा फर्क पड़ेगा, वह वहां की आव्रजन नीति है। लिबरल पार्टी ने वादा किया है कि सत्ता में लौटने पर वह नागरिकता शुल्क खत्म कर देगी। साथ ही आव्रजन के लिए दायर की गई अर्जियों का निपटारा तेजी से किया जाएगा। लिबरल पार्टी ने विदेशी कर्मियों के लिए स्थायी निवासी का दर्जा पाना आसान बनाने और विदेशी छात्रों को अधिक संख्या में कनाडा आने की अनुमति देने का वादा किया है।
कंजरवेटिव पार्टी ने कहा है कि उसकी आव्रजन योजना में यह बात शामिल होगी कि अगर कोई आव्रजक जल्द नागरिकता पाना चाहता है, तो ऐसा वह शुल्क देकर कर सकेगा। कंजरवेटिव पार्टी ने आव्रजकों की निगरानी व्यवस्था को सख्त बनाने का वादा भी किया है।