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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का अध्ययन, यूरोप के धुर दक्षिणपंथी नेता ट्रंप जैसे नहीं
Fri, 18 Dec 2020 06:12 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 18 Dec 2020 06:12 PM IST
सार
अध्ययनकर्ताओँ का कहना है कि यूरोप में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों का रुख-रुख अलग-अलग देशों में अलग रहा। हंगरी और पोलैंड की सत्ताधारी धुर दक्षिणपंथी पार्टियों ने महामारी के दौरान कड़े नियम लागू किए हैं...
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President Donald Trump
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विस्तार
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल के चुनाव में हार से बनी इस धारणा में ज्यादा दम नहीं है कि कोरोना वायरस महामारी को हलके से लेने के कारण पूरी पश्चिमी दुनिया में धुर दक्षिणपंथी नेताओं और पार्टियों की लोकप्रियता घटी है। ये बात कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन से सामने आई है। इस अध्ययन के मुताबिक ये धारणा भी सही नहीं है कि हर देश में धुर दक्षिणपंथी नेताओँ या पार्टियों ने कोरोना महामारी को हलके से लिया। यूरोप में कोविड-19 के बारे में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के रुख पर हुए इस अध्ययन के नतीजे यहां के अखबार द गार्जियन में छपे हैं।
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इसके मुताबिक कोविड-19 पर धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के रुख और उनकी लोकप्रियता पर महामारी के खराब असर के बारे में धारणाएं डोनाल्ड ट्रंप की हार से बनीं। लेकिन यूरोप में जो जमीनी सच्चाई है, उसे देखते हुए अध्ययनकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे कि ये धारणाएं सिरे से गलत हैं। यह सोचना भी गलत है कि हर धुर दक्षिणपंथी नेता ने कोरोना महामारी को ट्रंप की तरह हलके से लिया।
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इस सिलसिले में अध्ययनकर्ताओं ने इटली के धुर दक्षिणपंथी नेता मेटियो सालविनी और उनकी लीग पार्टी का जिक्र किया है। शुरुआती दिनों में इस पार्टी ने कोविड-19 को एक बड़े खतरे के रूप में लिया, हालांकि बाद में जब स्थिति सुधर गई तो उसके रुख में उतार-चढ़ाव देखा गया।
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दूसरी तरफ शुरुआती दिनों में विपक्ष में मौजूद कई धुर दक्षिणपंथी पार्टियों ने धीमी गति से कदम उठाने के लिए अपने देशों की सरकारों की आलोचना की, लेकिन जल्द ही वे लॉकडाउन जैसे कदमों की विरोधी हो गईं। इनमें जर्मनी की पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) भी है। उसने लॉकडाउन को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। उधर ऑस्ट्रिया की फ्रीडम पार्टी ने कहा कि लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंध नागरिकों की निगरानी करने की बड़ी योजना का हिस्सा हैं।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि यूरोप में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों का रुख-रुख अलग-अलग देशों में अलग रहा। यह इससे भी तय हुआ कि ये पार्टियां सत्ता में हैं या विपक्ष में। मसलन, हंगरी और पोलैंड की सत्ताधारी धुर दक्षिणपंथी पार्टियों ने महामारी के दौरान कड़े नियम लागू किए हैँ। इस अध्ययन में यूरोपियन यूनियन के सदस्य देशों की कुल 31 पार्टियों के रुख का विश्लेषण किया गया।
मार्च से जून तक की महामारी के पहले दौर की अवधि में इन 31 में से सिर्फ आधी पार्टियों का जन समर्थन घटा। पांच का समर्थन बढ़ा, जबकि दस पार्टियों के समर्थन में कोई अंतर नहीं पड़ा। जनमत सर्वेक्षणों के आधार पर किए गए विश्लेषण के मुताबिक जहां अंतर पड़ा, वहां औसतन फर्क सिर्फ एक फीसदी का था। महामारी के दूसरे दौर में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के समर्थन में कुछ गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन यह अंतर भी बहुत कम रहा है।
कोरोना महामारी के प्रति सत्ताधारी धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के रुख की सफलता का जहां तक सवाल है, यह भी वैसा नहीं है, जैसी धारणा ट्रंप के रिकॉर्ड के मद्देनजर बनी है। यूरोप में सत्ताधारी धुर दक्षिणपंथी पार्टियां महामारी से निपटने में अकुशल साबित नहीं हुई हैँ। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक महामारी से निपटने के लिए सबसे सख्त किस्म के उपाय उन्हीं देशों में अपनाए गए हैं, जहां धुर दक्षिणपंथी पार्टियों की सरकारें हैं।
दरअसल, अब तक उन देशों का रिकॉर्ड महामारी के कारण हुए नुकसान के लिहाज से भी बेहतर है। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने इस तरफ भी ध्यान दिलाया है कि ये पार्टियां ज्यादातर मध्य और पूर्वी यूरोप में सत्ता में हैं, जहां पहले दौर में कोविड- 19 का संक्रमण ज्यादा नहीं फैला था।
अपने विश्लेषण के आधार पर कैंब्रिज के अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा है कि धुर दक्षिणपंथी और कोविड-19 के बारे में आमतौर पर चली सार्वजनिक बहस बेबुनियाद है। दरअसल, ऐसी पार्टियों के रुख और नजरिए के बारे में कोई एक जैसी राय नहीं बनाई जा सकती है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा- “हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि हमें यूरोपीय धुर दक्षिणपंथ को ट्रंप के नजरिए से देखना बंद करना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति कई मायनों में अपवाद हैं। (फिर यह भी गौरतलब है कि जहां) ट्रंप सत्ता से बाहर हो रहे हैं, वहीं धुर दक्षिणपंथी पार्टियां यूरोप में बड़ी ताकत बनी हुई हैं।”