Cambodia: एक और ‘कम्युनिस्ट’ देश में 'पुत्र-उदय', प्रधानमंत्री हुन सेन अपने बेटे को सौपेंगे राजनीतिक विरासत
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कंबोडिया में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। लेकिन सत्ता का केंद्र वर्तमान प्रधानमंत्री हुन सेन के घर में ही बना रहेगा। 40 साल से देश पर राज कर रहे हुन सेन अब अपने बेटे को अपना पद सौंपने की तैयारी में हैं। सत्ताधारी कंबोडियन पीपुल्स पार्टी (सीपीपी) ने पिछले महीने एलान किया था कि प्रधानमंत्री के सबसे बड़े बेटे हुन मानेत जुलाई में होने वाले संसदीय चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार होंगे। हुन मानेत हाल तक रॉयल कंबोडियन आर्मी में कमांडर थे। बीते 24 अप्रैल को मानेत ने सेना का अपना पद छोड़ दिया। इसके बाद से वे खुल कर अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। संसदीय चुनाव जीतने के बाद उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
हुन मानेत 45 साल के हैं और अर्थशास्त्र में उन्होंने डॉक्टरेट कर रखा है। हुन सेन ने पहले कहा था कि 2028 के चुनाव तक वे सत्ता में बने रहेंगे। लेकिन अब उनकी उम्र 70 वर्ष से ऊपर हो चुकी है और बताया जाता है कि हाल में उनकी सेहत में तेजी से गिरावट आई है। इसे देखते हुए उन्होंने अपने उत्तराधिकारी को तैयार करने का काम तेज कर दिया है। संकेत हैं कि सत्ता हस्तांतरण इस वर्ष ही हो जाएगा।
सीपीपी पहले मार्क्सवादी पार्टी थी। लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद उसने अपनी विचारधारा में परिवर्तन किया। उसने तब मिश्रित अर्थव्यवस्था को स्वीकार कर लिया। सीपीपी पर भाई-भतीजावाद के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। कंबोडिया के राज्यों में अक्सर मंत्री और गवर्नरों के पद पुराने नेताओं के रिश्तेदारों को दिए जाते रहे हैं। इसलिए हुन मानेत को आगे बढ़ाने की प्रधानमंत्री को कोशिश का ज्यादा विरोध होने की संभावना नहीं है।
वैसे सीपीपी ने अभी तक इस बारे में कोई औपचारिक एलान नहीं किया है। पार्टी प्रवक्ता सोक इसेन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा- ‘हुन मानेत (प्रधानमंत्री पद के लिए) भविष्य के उम्मीदवार हैं। भविष्य का मतलब है कि फिलहाल वे उम्मीदवार नहीं हैं।’ सोक ने बताया कि अगर प्रधानमंत्री हुन सेन ने अगले चुनाव के बाद रिटायर्ड होने का फैसला किया, तो राजा नोरोडम सिंहामणि संसद में विश्वास-मत के आधार पर अगले प्रधानमंत्री की घोषणा करेंगे।
कंबोडिया में संवैधानिक राजतंत्र की व्यवस्था है। यह व्यवस्था कम्युनिस्ट शासन के तहत भी बनी रही। विश्लेषकों के मुताबिक हुन सेन सीपीपी के भीतर के सत्ता हस्तांतरण की तैयारी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। वे सीपीपी नेताओं के बच्चों को शासन तंत्र में जगह देने की व्यवस्था कर रहे हैं। वर्तमान नेताओं के बाल-बच्चों को प्रतिष्ठा और प्रभाव वाले पद सौंपे जाएंगे, ताकि हुन मानेत को प्रधानमंत्री बनाने का उनकी तरफ से विरोध ना हो।
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में तानाशाही राजनीति पर अनुसंधान करने वाले विशेषज्ञ नील लॉफलिन ने कहा है- ‘कंबोडिया में सर्वोच्च पद योग्यता के आधार पर नहीं दिया जाएगा। इस पर निर्णय सत्ता को हुन परिवार के अंदर बनाए रखने के उद्देश्य से होगा। इस प्रयास की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि सिस्टम के भीतर मौजूद लोग वंशानुगत सत्ता हस्तांतरण की वैधता को स्वीकार करते हैं या नहीं।’