ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से अलग होना तय, महारानी की हरी झंडी के बाद ‘ब्रेग्जिट’ को मंजूरी

एजेंसी, लंदन Updated Fri, 24 Jan 2020 12:16 AM IST
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महारानी एलिजाबेथ द्वितीय
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय - फोटो : एएनआई

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कई वर्षों तक चली लंबी बहस के बाद अंतत: ब्रिटिश संसद ने यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन के अलग होने वाले ब्रेग्जिट विधेयक को मंजूरी दे दी। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने गुरुवार को संसद से पारित किए गए ऐतिहासिक विड्रॉल एग्रीमेंट बिल को कानूनी तौर पर मंजूरी देने की औपचारिकता पूरी कर दी। इसके साथ ही जनवरी के अंत में ब्रिटेन का यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होना तय हो गया है। यह कानून 31 जनवरी को ब्रिटिश सरकार को ईयू से बाहर निकलने का कानूनी हक देता है।
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ब्रेग्जिट सचिव स्टीव बार्कले ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि महारानी ने ब्रेग्जिट बिल को अपनी शाही मंजूरी देते हुए ब्रेग्जिट कानून बना दिया है। 31 जनवरी को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
निचला सदन हाउस ऑफ कॉमंस पहले ही ईयू से निकलने से संबंधित इस विधेयक पर मुहर लगा चुका है। ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में इस बिल पर व्यापक चर्चा हुई और कुछ सुझाव भी पेश किए गए। इसके तहत, यूरोपीय यूनियन के नागरिकों के अधिकार और बाल शरणार्थी से संबंधित कुछ बदलाव थे। हालांकि, इस बार सदन में चर्चा के दौरान शरणार्थी बच्चों पर बताए गए पांच सुझाव अस्वीकृत कर दिए गए हैं। इस अस्वीकृति पर पूर्व सांसद अल्फ डब्स ने कहा, हाउस ऑफ लॉर्ड्स में जीत के बाद हाउस ऑफ कॉमंस में शरणार्थी बच्चों से संबंधित सुझाव को नामंजूर कर दिया गया, यह निराशाजनक है।

पीएम बोरिस जॉनसन को फायदा

संसद में ब्रेग्जिट विधेयक को मंजूरी ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन के लिए राहत भरा फैसला है। कंजर्वेटिव पार्टी के नेता जॉनसन ब्रेग्जिट के प्रबल समर्थक रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि चाहे कुछ भी हो जाए ब्रिटेन 31 अक्टूबर तक बिना समझौते के ईयू से बाहर निकल जाएगा। यहां तक कि जॉनसन ने कहा था कि वह इसके परिणामों के लिए तैयार हैं। 
इससे पहले बुधवार को ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स ने बिल में ऊपरी सदन हाउस ऑफ लार्ड्स की तरफ से शामिल बातों को बदल दिया था। इनमें ब्रेग्जिट के बाद बाल शरणार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें ब्रिटेन में उनके परिवारों से मिलवाने का वादा भी शामिल था।

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने विड्रॉल एग्रीमेंट बिल में ऐसे किसी भी बदलाव को स्वीकारने से इनकार कर दिया था, जो ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की राह रोक सकता था। विपक्षी सांसदों ने अपनी शर्तों को लेकर कठोर होने की बात कहते हुए उनकी आलोचना भी की थी। हाउस ऑफ लार्ड्स इन बदलावों को दोबारा बिल में जोड़ सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं करते हुए बिल को उसकी मंजूरी का आखिरी पायदान पार करने की अनुमति दे दी थी। 

करीब पांच दशक पुरानी सदस्यता समाप्त होगी

ब्रिटेन साल 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय यूनियन का सदस्य बना था। ब्रेग्जिट के साथ ब्रिटेन की करीब पांच दशक पुरानी सदस्यता खत्म हो जाएगी। ऐसा करने वाला ब्रिटेन पहला देश होगा। हालांकि, ईयू के नियमों के तहत 31 दिसंबर तक वह कारोबार करेगा। 

क्या है ब्रेग्जिट

ब्रेग्जिट का मतलब है 'ब्रिटेन एग्जिट' यानी ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना। साल 2016 में ब्रिटेन में ब्रेग्जिट को लेकर जनमत संग्रह किया गया था। इसमें 50 फीसदी से ज्यादा लोगों का मानना था कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना चाहिए। बीते साल ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी को 650 सीटों वाली संसद में 364 सीटें मिली थीं। चुनाव परिणाम के साथ ही ब्रेग्जिट का रास्ता साफ हो गया था। इस चुनाव में एक दर्जन से अधिक भारतवंशी उम्मीदवारों ने भी जीत का परचम लहराया था।

1980 के दशक में मार्गरेट थैचर के दौर के बाद कंजरवेटिव पार्टी की यह सबसे बड़ी जीत रही थी। नतीजों का एलान होने के बाद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने दो-टूक कहा था कि हम यूरोपीय संघ (ईयू) से ब्रिटेन को अलग करने वाले ब्रेग्जिट को 31 जनवरी तक हर हाल में पारित कराएंगे। 
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