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Prince Harry: फोन हैकिंग केस में राजकुमार की बड़ी जीत; लंदन हाईकोर्ट का आदेश- ₹1.48 करोड़ हर्जाना भरें प्रकाशक

Fri, 15 Dec 2023 08:32 PM IST
ज्योति भास्कर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 15 Dec 2023 08:32 PM IST
सार

ब्रिटेन के बहुचर्चित फोन हैकिंग मामले में प्रिंस हैरी को बड़ी सफलता मिली है। लंदन हाईकोर्ट ने प्रकाशक को करीब 1.48 करोड़ रुपये (1.40 लाख पाउंड) हर्जाना भरने का फरमान सुनाया है। आदेश के अनुसार प्रिंस छह साल तक हैकिंग के शिकार रहे।

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Britain phone hacking lawsuit Prince Harry London High Court award tabloid publisher
प्रिंस हैरी (फाइल) - फोटो : ani

विस्तार

ब्रिटिश टैब्लॉइड प्रकाशक के खिलाफ फोन हैकिंग मुकदमे में प्रिंस हैरी को बड़ी जीत मिली है। लंदन हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोषी पाए गए प्रकाशक हैकिंग के शिकार प्रिंस को 1.40 लाख पाउंड (जीबीपी) हर्जाने के तौर पर देंगे। इस कानूनी कामयाबी और अदालत के फैसले को प्रिंस हैरी ने 'सच्चाई के साथ-साथ जवाबदेही' के नजरिए से महान बताया। लंदन उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने फैसले में कहा, प्रिंस हैरी एक ब्रिटिश टैब्लॉइड (समाचार पत्र का प्रकार) की तरफ से की गई फोन हैकिंग के शिकार हुए। अब हर्जाने के तौर पर प्रिंस को 1,40,600 पाउंड मिलेंगे।
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किन प्रकाशकों के खिलाफ शिकायत
बता दें कि ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III के सबसे छोटे बेटे प्रिंस हैरी को फोन हैकिंग मामले में लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अमेरिका में रह रहे प्रिंस और उनकी पत्नी मेगन मर्कल निजी जीवन से जुड़े प्रसंगों के कारण लंबे समय तक सुर्खियों में रहे। 39 वर्षीय हैरी ने लंदन हाईकोर्ट में जो मुकदमा जीता है, इसमें उन्होंने मिरर ग्रुप न्यूजपेपर्स (एमजीएन) के तीन अखबार- द मिरर, द संडे मिरर और द पीपल पर गंभीर आरोप लगाए थे।
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जानकारी जुटाने के लिए गैरकानूनी तरीके अपनाए गए
न्यायमूर्ति टिमोथी फैनकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 2003 के अंत से अप्रैल 2009 तक हैरी के फोन मामूली रूप से हैक किए गए। हाईकोर्ट ने कहा कि 'ड्यूक ऑफ ससेक्स' प्रिंस हैरी के आरोप 'आंशिक रूप से साबित हुए।' हैकिंग के सबूत के रूप में अदालत में पेश किए गए 33 लेखों में से 15 सही पाए गए। इनके आधार पर फोन हैकिंग के साथ-साथ जानकारी जुटाने के लिए गैरकानूनी तरीके इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है।
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20 साल पुराना मामला, हाईकोर्ट ने हैकिंग पर कही यह बात
जस्टिस फैनकोर्ट ने कहा, टैब्लॉइड में प्रिंस से जुड़े जिन लेखों का प्रकाशन हुआ है, उन्हें देखने पर हैकिंग या फोन पर की गई बातों को अनाधिकृत तरीके से सुनने की पुष्टि होती है। अदालत ने माना कि फोन की रिकॉर्डिंग में जो बातें हुई हैं, लेख में उन्हें हूबहू लिखा गया है। उस समय मिरर ग्रुप के भीतर फोन हैकिंग हो रही थी। भले ही मामला करीब 20 साल पुराना है, लेकिन इसके बावजूद 'फोन हैकिंग एकमात्र पत्रकारिता उपकरण' नहीं माना जा सकता। लंदन हाईकोर्ट के मुताबिक 18 लेखों के संबंध में प्रिंस के दावों का सटीक विश्लेषण नहीं किया जा सका।

हैकिंग से अनजान नहीं थे संपादक, व्यापक आपराधिक गतिविधियों के सबूत
अदालत ने पाया कि एमजीएन में प्रमुख बोर्ड निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी और पियर्स मॉर्गन जैसे संपादक स्पष्ट रूप से इन अवैध गतिविधियों (फोन हैकिंग) के बारे में जानते थे या खुद भी इसमें शामिल थे। अदालत के फैसले के बाद प्रिंस हैरी ने कहा, लंदन हाईकोर्ट के आदेश से साफ होता है कि मिरर समूह के तीनों अखबारों में एक दशक से अधिक समय से आदतन और व्यापक गैरकानूनी और आपराधिक गतिविधियां हो रही थीं।

कानूनी जीत पर राजकुमार का बयान; प्रकाशक ने मानी गलती, जुर्माना देने को तैयार
फैसले के बाद प्रिंस के वकील ने उनकी तरफ से जारी बयान में कहा, यह मामला सिर्फ हैकिंग के बारे में नहीं है। यह गैरकानूनी और भयावह व्यवहार को प्रणाली या प्रथा बना लेने का सबूत है। अपराध के बाद दोष छिपाने के प्रयास हुए। सबूतों को नष्ट किया गया। लंदन हाईकोर्ट के फैसले के बाद एमजीएन के प्रवक्ता ने कहा, हम फैसले का स्वागत करते हैं। कई साल पहले हुई घटनाओं से आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। ऐतिहासिक रूप से हुई गलतियों के लिए संस्था बिना शर्त माफी मांगती है। पूरी जिम्मेदारी लेते हुए एमजीएन उचित मुआवजा देगा।


140 से अधिक लेखों के प्रकाशन का आरोप
गौरतलब है कि एमजीएन पर फोन हैकिंग सहित गैरकानूनी जानकारी जुटाने के आरोप लगे हैं। 140 से अधिक लेखों का हवाला देते हुए प्रिंस हैरी ने आरोप लगाया था कि निजी जानकारी अवैध रूप से हासिल की गई। इन लेखों में प्रिंस हैरी के परिवार और पूर्व प्रेमिका चेल्सी डेवी के साथ उनके संबंधों पर भी बात हुई। उनकी बीमारियों, सैन्य सेवा और नशीली दवाओं के उपयोग के आरोपों से जुड़ी कई कहानियां भी लिखी गईं।
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