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Britain: ब्रिटेन के संग्रहालय ने लौटाईं 14वीं सदी की सात भारतीय कलाकृतियां, जानें क्या-क्या है शामिल
Sat, 20 Aug 2022 05:41 AM IST
Jeet Kumar
एएनआई, ग्लासगो
एएनआई, ग्लासगो
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 20 Aug 2022 05:41 AM IST
सार
समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सुजीत घोष ने खुशी जाहिर की और कहा कि ये कलाकृतियाँ भारत की सभ्यतागत विरासत का एक अभिन्न अंग हैं और अब इन्हें घर वापस भेजा जाएगा।
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कलाकृति के साथ अधिकारी
- फोटो : ANI
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विस्तार
स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर स्थित संग्रहालय ने भारतीय कलाकृतियों को लौटाने को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत से चोरी की गई सात कलाकृतियों को वापस लाया जाएगा। इस तरह का ब्रिटेन संग्रहालय का पहला कदम है।
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चोरी करके ब्रिटेन संग्राहलय पहुंचाई गई थी कलाकृतियां
इन कलाकृतियों में 14 वीं शताब्दी की इंडो-फारसी तलवार के साथ कानपुर के एक मंदिर से ले जाया गया 11वीं शताब्दी का पत्थर का नक्काशीदार दरवाजा भी है। 19वीं शताब्दी के दौरान उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों के मंदिरों से छह वस्तुओं को चुरा लिया गया था, जबकि सातवीं को मालिक से चोरी के बाद खरीदा गया था। सभी सात कलाकृतियां ग्लासगो के संग्रह को उपहार में दी गई थीं।
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भारतीय उच्चायुक्त सुजीत घोष रहे मौजूद
ग्लासगो लाइफ म्यूजियम के बयान के अनुसार, कलाकृति स्वामित्व का हस्तांतरण शुक्रवार को भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। संग्रहालय चलाने वाले परमार्थ संगठन ग्लासगो लाइफ ने इस साल की शुरुआत में कलाकृतियों को सौंपे जाने की पुष्टि की थी और ब्रिटेन में कार्यवाहक भारतीय उच्चायुक्त सुजीत घोष की उपस्थिति में केल्विंग्रोव आर्ट गैलरी और संग्रहालय में इसे औपचारिक रूप दिया गया।
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ग्लासगो लाइफ की चेयरमैन और ग्लासगो सिटी काउंसिल की संयोजक बेली एनेट क्रिस्टी ने कहा कि इन वस्तुओं का प्रत्यावर्तन ग्लासगो और भारत दोनों के लिए महान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का है, इसलिए इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए हमारे शहर में भारतीय गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
भारत ने दिया धन्यवाद
वहीं समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सुजीत घोष ने खुशी जाहिर की और कहा कि ये कलाकृतियाँ भारत की सभ्यतागत विरासत का एक अभिन्न अंग हैं और अब इन्हें घर वापस भेजा जाएगा। आगे उन्होंने कहा कि हम उन सभी हितधारकों की सराहना करते हैं जिन्होंने इसे संभव बनाया, विशेष रूप से ग्लासगो लाइफ और ग्लासगो सिटी काउंसिल को।
भारतीय उच्चायोग ने उठाई थी मांग
लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस वर्ष के शुरू में ग्लासगोव नगर परिषद से कानपुर, ग्वालियर और बिहार से चुराई गई पुरातात्विक महत्व की छह कलाकृतियां लौटाने का अनुरोध किया था। पिछले माह उच्चायोग के व्यापार सचिव प्रथम जसप्रीत सिंह सुखीजा ने दक्षिण भारत की 14वीं सदी की ऐतिहासिक तलवार और म्यान लौटाने की मांग उठाई थी।
अमेरिका में मिलीं 50 साल पहले चुराईं मूर्तियां
तमिलनाडु में कुंभकोणम शहर के थंडाथोट्टम स्थित नंदनपुरेश्वर सिवन मंदिर से करीब 50 साल पहले चुराई गईं दो मूर्तियां अमेरिका के अलग-अलग निलामी घरों में मिलीं। मूर्तियों की तलाश में जुटे तमिलनाडु पुलिस के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) ने बताया कि दोनों प्रतिमाएं चोल काल की हैं, जो बीते 50 वर्ष से गायब थीं। इनमें से एक देवी पार्वती की प्रतिमा अाठ अगस्त को न्यूयॉर्क के बोनहम्सो नीलामी घर में मिली।
तमिलनाडु पुलिस के प्रतिमा प्रकोष्ठ की निरीक्षक एम चित्रा के मुताबिक, 12-13वीं सदी में चोल शासन के दौरान मिश्रित धातु से बनी प्रत्येक मूर्ति की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं, दूसरी मूर्ति नृत्य करते हुए शैव कवि संत संबंदर की है, जो न्यूयॉर्क के क्रस्टीज नीलामी घर में शनिवार को मिली है।
मूर्तियों के चोरी होने की शिकायत 1971 दर्ज की गई थी। प्रतिमा प्रकोष्ट ने दोनों नीलामी घरों को मूर्तियां लौटाने के लिए पत्र लिखा है, साथ ही मूर्तियों के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं, ताकि इन्हें भारत लौटाकर नंदनपुरेश्वर सिवन मंदिर में स्थापित किया जा सके। .
आठ साल में लौटीं 228 कलाकृतियां
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के मुताबिक, बीते आठ साल में यानी 2014 से अब तक 228 कलाकृतियां भारत को लौटाई गई हैं। इनमें कई बेहद मशहूर व बेसकीमती कलाकृतियां भी शामिल हैं।