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मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी : मैनपावर की जगह ह्यूमनपावर और मां-पिता की जगह पैरेंट्स शब्द के इस्तेमाल पर जोर
Mon, 15 Mar 2021 08:37 AM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 15 Mar 2021 08:37 AM IST
सार
- मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने लैंगिक असामनता खत्म करने के लिए शुरू की पहल
- आधिकारिक कामों में मैनपावर की जगह ह्यूमनपावर का इस्तेमाल करने के निर्देश
- मां-पिता जैसे शब्दों की जगह पैरेंट्स, गार्जियन शब्द इस्तेमाल करने के निर्देश
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मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
ब्रिटेन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी ने लैंगिक असामनता को खत्म करने के लिए एक ऐसी पहल की शुरुआत की है, जिसकी एक तरफ सराहना हो रही है तो दूसरी तरफ आलोचना भी की जा रही है। यूनिवर्सिटी ने लैंगिक असामनता वाले शब्दों को इस्तेमाल ना करने के निर्देश दिए हैं।
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यूनिवर्सिटी ने अपने स्टाफ और कर्मचारियों के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसके तहत यूनिवर्सिटी ने अपने स्टाफ से कहा है कि वो ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से बचें, जिसमें स्त्री और पुरुष का भेद झलकता हो। संस्थान ने इसके लिए अपने स्टाफ को एक-एक कॉपी भी जारी की है, जिसमें विस्तार से दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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संस्थान की ओर से जारी कॉपी में कहा गया है कि माता के मदर लिए और पिता के लिए फादर की जगह पैरेंट्स और गार्जियन जैसे शब्दों का इस्तेमाल करें। इसके अलावा संस्थान ने अपने स्टाफ से कहा कि बोलचाल और आधिकारिक कामों में मैनपावर की जगह ह्यूमनपावर, मैनकाइंड की ह्यूमनकाइंड और मैन मेेड की जगह आर्टिफिशियल या सिंथेटिक शब्दों का इस्तेमाल करें।
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यूनिवर्सिटी ने बताया कि कुछ सहयोगियों की शिकायत के बाद ये नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं। यूनिवर्सिटी में कार्यरत कुछ लोगों का मानना था कि लिंग भेद मिटाने के लिए किस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। यूनिवर्सिटी ने कहा कि जो शब्द सुझाए गए हैं, उनके इस्तेमाल में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि वो पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
हालांकि कुछ लोगों ने यूनिवर्सिटी की इस पहल की आलोचना की है। सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों ने कहा कि ये मां जैसे शब्दों को खत्म करने का प्रयास है। लोगों का तर्क है कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों ने दशकों से मां-पिता की जगह पैरेंट्स और गार्जियन शब्दों का इस्तेमाल करवाकर भाषाई बंदिशें लगाई हैं, जो बोलने की आजादी के अधिकार को खत्म करने जैसा है।
बता दें कि यूनिवर्सिटी ने गाइडलाइंस के अलावा कुछ दूसरे शब्दों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, ही और शी की जगह दे, देयर, देम का इस्तेमाल करें। इसके अलावा मैन, वुमन की जगह पीपुल या पर्सन या इंडीविजुअल का इस्तेमाल करें। इसके अलावा ब्रदर और सिस्टर की जगह सिब्लिंग्स का इस्तेमाल करना जैसे निर्देश शामिल हैं।