फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Britain france and iran election results and change of populist ideologies in 2024 election

World Politics: ब्रिटेन, ईरान-फ्रांस में क्यों हारे सत्ताधारी, क्या बताते हैं 2024 के वैश्विक चुनाव नतीजे?

Thu, 11 Jul 2024 03:18 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 11 Jul 2024 03:18 PM IST
विज्ञापन
सार
World Politics: 2024 एक चुनावी साल है। अकेले यूरोप में कम से कम 64 देशों में राष्ट्रीय चुनाव हैं। इनमें से कई देशों में चुनाव हो भी चुके हैं। दुनिया के 10 सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से आठ में 2024 चुनावी साल है। इनमें भी भारत समेत कई देशों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। 
loader
Britain france and iran election results and change of populist ideologies in 2024 election
विदेश में चुनाव - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

बीते हफ्ते ब्रिटेन, फ्रांस, ईरान जैसे बड़े देशों में चुनाव हुए। इन देशों में सत्ताधारियों को झटका लगा है। ब्रिटेन में ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी 14 साल बाद देश की सत्ता से बाहर हो गई। फ्रांस में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ की पार्टी रेनेशां को वामपंथी गठबंधन से शिकस्त मिली। वहीं ईरान में सुधारवादी नेता मसूद पेजेशकियान ने कट्टरपंथी सईद जलीली को हराकर राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया। 


ये केवल तीन चुनाव नहीं थे जिनमें सत्ताधारियों को झटका लगा है। इस साल हुए कई देशों के आम चुनावों के नतीजों ने दुनिया को चौंकाया है। आइये जानते हैं कि इस साल किन बड़े देशों में चुनाव हुए? यहां के नतीजे कैसे रहे? ये नतीजे क्या बताते हैं? 

इस साल किन बड़े देशों में चुनाव हुए?
2024 एक चुनावी साल रहा है। टाइम्स पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विश्व स्तर पर इतिहास में पहले से कहीं अधिक मतदाता चुनाव में भाग लेंगे। अकेले यूरोप में कम से कम 64 देशों में राष्ट्रीय चुनाव हैं, जो दुनिया में लगभग 49% लोगों की कुल आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। दुनिया के 10 सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से आठ में 2024 में चुनाव में निर्धारित थे। ये देश हैं - बांग्लादेश, ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, रूस और अमेरिका। हालांकि, इनमें से ज्यादातर देशों में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। इसके अलावा, फ्रांस, ब्रिटेन, ईरान और यूरोपीय संघ के चुनाव भी इसी साल हुए हैं। 

फ्रांस संसदीय चुनाव 2024
फ्रांस संसदीय चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
कहां कैसे रहे नतीजे?
फ्रांस:
फ्रेंच मतदाताओं ने 30 जून और 7 जुलाई को दो चरणों में नेशनल असेंबली सांसदों के चुनाव के लिए मतदान किया। यहां संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली की कुल 577 सीटों पर चुनाव हुए जिनमें बहुमत के लिए 289 सीटें जरूरी होती हैं। 

फ्रांस के इस चुनाव में तमाम बड़े दल गठबंधन के तहत उतरे थे। रविवार को हुए दूसरे दौर के मतदान के बाद वामपंथी गठबंधन न्यू पॉपुलर फ्रंट ने फ्रांसीसी संसद में सर्वाधिक सीटें जीत लीं। इसने दक्षिणपंथी गठबंधन को पटखनी दी। वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट ने 182 सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के मध्यमार्गी एनसेम्बल गठबंधन ने 163 सीटें जीतीं। वहीं पहले चरण में बढ़त हासिल करने वाली अति दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल रैली और उसके सहयोगी दल 143 सीटें जीतकर तीसरे स्थान पर खिसक गए। नेशनल रैली पार्टी का नेतृत्व अति दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन कर रही हैं। इन नतीजों के बाद फ्रांस राजनीतिक अनिश्चितता में फंस गया है, क्योंकि कोई भी गठबंधन पूर्ण बहुमत हासिल करने के करीब नहीं पहुंच पाया है। 

मसूद पेजेशकियान
मसूद पेजेशकियान - फोटो : अमर उजाला
ईरान: पिछले हफ्ते ईरान की जनता ने भी अपना जनादेश सुनाया। देश में राष्ट्रपति चुनाव के लिए 28 जून और 5 जुलाई को मतदान कराए गए, जिसमें सुधारवादी नेता मसूद पेजेशकियन ने जीत हासिल की। 19 मई को एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की मृत्यु के बाद ईरान में समय से पहले चुनाव हुए। चार उम्मीदवारों ने चुनाव के पहले दौर में चुनाव लड़ा, जिसमें 6 जुलाई को आए नतीजों में सुधारवादी मसूद पेजेशकियन ने कट्टरपंथी नेता सईद जलीली को हराकर जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही पेजेशकियन ने ईरान के नए राष्ट्रपति का पद संभाल लिया है। 

ब्रिटेन चुनाव 2024
ब्रिटेन चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
ब्रिटेन: 4 जुलाई को ब्रिटेन में 650 संसदीय सीटों के लिए मतदान हुआ। ये चुनाव यूनाइटेड किंगडम के सभी हिस्सों इंग्लैंड, उत्तरी आयरलैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में हुए। 6 जुलाई को ब्रिटेन चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित किए गए। इन चुनावों में कुल 392 पंजीकृत पार्टियां रहीं लेकिन मुख्य मुकाबला ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव और मुख्य विपक्षी नेता कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी के बीच हुआ। विपक्षी लेबर पार्टी ने 650 में से 412 सीटें जीत ली हैं। वहीं मौजूदा सत्ताधारी दल कंजर्वेटिव महज 121 सीटें जीत सकी। वहीं अन्य छोटे दलों की बात करें तो लिबरल डेमोक्रेट्स ने 71, स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) नौ, सिन फेन सात, डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) पांच और रिफॉर्म पार्टी ने चार सीटें जीतीं।

बड़े विपक्षी दल लेबर ने 2005 के बाद ब्रिटिश चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की। लेबर पार्टी को भारी जीत दिलाने के बाद कीर स्टार्मर देश के नए प्रधानमंत्री बन गए हैं।

यूरोपीय संघ: कुल 27 देशों वाले यूरोपीय संघ में लोगों ने 6-9 जून को वोट किया। 44 करोड़ से अधिक आबादी वाले यूरोपीय संघ में कुल 720 यूरोपीय संसद सदस्य (एमईपी) चुने जाते हैं। 9 जून 2024 को उर्सुला वॉन डेर लेयेन के नेतृत्व वाली यूरोपीय पीपुल्स पार्टी ने यूरोपीय संसद में सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। इन चुनावों में मध्यमार्गी, उदारवादी और पर्यावरणवादी पार्टियों को नुकसान हुआ, जबकि दक्षिणपंथी दलों को फायदा हुआ। दक्षिणपंथी यूरोपीय कंजर्वेटिव और सुधारवादी समूह ने मध्यमार्गी रिन्यू यूरोप समूह को पछाड़ा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : एएनआई (फाइल)
पाकिस्तान: पड़ोसी देश में 8 फरवरी को नेशनल असेंबली के लिए वोट डाले गए थे। नेशनल असेंबली पाकिस्तान की संसद का निचला सदन है जो सरकार के प्रति जवाबदेह होता है। 24 करोड़ वाले पकिस्तान में चुनाव से पहले कार्यवाहक सरकार चल रही थी। ये चुनाव पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रधानमंत्री इमरान खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटाए जाने के बाद दो साल बाद ये चुनाव हुए थे। इसके बाद इमरान खान को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया और दोषी ठहराया गया और पांच साल के लिए राजनीति से प्रतिबंधित कर दिया गया। चुनावों से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने पीटीआई से उनके चुनाव चिह्न को भी छीन लिया। 

इन सब घटनाक्रमों के बावजूद चुनाव नतीजे आए तो मौजूदा सरकार के खिलाफ उतरे पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा 93 सीटें आईं। इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) (पीएमएल-एन) को 75 और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को 54 सीटें मिलीं। नेशनल असेंबली में किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं होने पर, पीपीपी, पीएमएल-एन समेत अन्य छोटे दलों के समर्थन से शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने।

शेख हसीना
शेख हसीना - फोटो : एएनआई
बांग्लादेश: देश में इस साल की शुरुआत में 7 जनवरी को ही आम चुनाव हुए थे। 17 करोड़ से अधिक आबादी वाले बांग्लादेश में राष्ट्रीय संसद के लिए लोगों ने मतदान किया। इस चुनाव में प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग ने लगातार चौथी बार चुनाव जीता। हसीना की अवामी लीग केंद्र और मध्य-वामपंथी पार्टी मानी जाती है। 

राजनीतिक असंतोष पर हुई कार्रवाई के विरोध में देश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार किया। मध्य-दक्षिणपंथी दल का मानना था कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने में असमर्थ है।

...तो क्या दुनियाभर में किसी खास विचारधारा की हार या जीत हो रही है?
जेएनयू में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसर संजय पांडे कहते हैं, 'ब्रिटेन में लेबर पार्टी की जीत हुई है जिसे वामपंथी नहीं कहा जा सकता है। जेरेमी कोर्बिन होते तो उन्हें वामपंथी कहा जाता। फ्रांस में भी अति वामपंथी दलों को बहुमत नहीं मिला है। यदि इन्हें सरकार बनाना है तो अन्य विचारधारा वाले लोगों से गठबंधन करना होगा। ऐसे में इन्हें अपनी नीतियां भी बदलनी होगी। इसके अलावा ईरान में सुधारवादी नेता मसूद पेजेशकियन की जीत हुई है लेकिन ये मानना कि वो ईरान की सत्ता से अलग हटकर सुधार कर देंगे, मुझे ऐसा नहीं लगता। क्योंकि यहां गार्जियन काउंसिल की अनुमति के बिना कोई कानून नहीं बनता जिस पर ईरान के सर्वोच्च नेता पर प्रभाव होता है। एक तरह से ये मध्यमार्गी सरकारें होंगी।'

दुनियाभर में किसी विचारधारा की हार या जीत के प्रश्न पर प्रोफेसर संजय कहते हैं, 'हाल के चुनाव कोई ऐसा ट्रेंड नहीं दिखता है कि दुनियाभर में किसी खास विचारधारा के लोग हार रहे हैं। इसे सरकारों के खिलाफ गुस्सा के तौर पर देखा जाना चाहिए। अपने 10 साल तक शासन किया, लोगों की आकांक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाए तो लोगों ने बदलाव के लिए मतदान किया है। भारत और दक्षिण अफ्रीका में सरकारें दोबारा आई हैं लेकिन बहुमत से दूर रही हैं। इन्हें बाकी दलों का सहारा लेना पड़ा है जो नीतियों में असर डालता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed