ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को झटका, ब्रेग्जिट में देरी के लिए सांसदों ने किए वोट

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 20 Oct 2019 06:46 AM IST
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Boris Johnson
Boris Johnson - फोटो : ANI

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सार

  • ब्रिटिश संसद ने ब्रेग्जिट डील को नहीं दी मंजूरी, जॉनसन ने ईयू को लिखा पत्र
  • 31 अक्तूबर तक डील या नो डील ब्रेग्जिट के लिए ईयू को बताना है
  • ईयू से ब्रिटेन के अलग होने में और देरी के विरुद्ध सांसदों को चेताया

विस्तार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को शनिवार को तब तगड़ा झटका लगा जब सांसदों ने ब्रेग्जिट में देरी के लिए वोट किया। 31 अक्तूबर को ब्रेग्जिट नहीं कराने के पक्ष में 322 जबकि विरोध में 306 मत ही मिल सके। 37 साल में पहली बार सप्ताहांत को संसद पहुंचे सांसदों के ब्रेग्जिट समझौते के निर्णय को टालने के फैसले से जॉनसन सरकार के इस महीने के आखिर तक यूरोपीय यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन को बाहर लाने की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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ब्रिटेन को 31 अक्तूबर तक डील या नो डील ब्रेग्जिट के लिए ईयू को बताना है। इस दौरान सांसदों ने एक संशोधन का समर्थन किया, जिसके तहत ब्रेग्जिट के लिए अगले साल जनवरी तक का समय मांगने का अनुरोध है। इससे पहले प्रधानमंत्री जॉनसन ने ईयू से ब्रिटेन के अलग होने में और देरी के विरुद्ध सांसदों को चेताया और कहा कि, ब्रेग्जिट में और देरी का मतलब नहीं है।
 
संसद में चर्चा के दौरान 10 लाख से अधिक की संख्या में ब्रेग्जिट विरोधी संसद के बाहर व अन्य स्थानों पर एकत्रित हो गए और प्रधानमंत्री जॉनसन के पुतलों की झांकियां निकाली।  

बता दें कि इससे पहले ब्रिटेन के सांसद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ब्रेग्जिट सौदे पर ऐतिहासिक मतदान करने के लिए शनिवार को एकत्र हुए। मतदान के बाद आए फैसले के तहत ब्रिटेन इस महीने यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा या देश एक बार फिर नई अनिश्चितता में घिर जाएगा।

हाउस ऑफ कॉमन्स ने 1982 के बाद से पहली बार शनिवारीय बैठक की इसके बाद जॉनसन द्वारा गुरुवार को यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ ब्रेक्जिट के संबंध में हुए समझौते की शर्तों पर चर्चा होगी।

विपक्षी दलों और उत्तरी आयरलैंड के जॉनसन के अपने सहयोगियों ने इस सौदे को खारिज किया है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले 48 घंटों में अथक प्रयास किए हैं। इस पेचीदा प्रक्रिया के चलते ब्रिटेन 2016 से राजनीतिक संकट में घिरा हुआ है।
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