{"_id":"6334416790c05871261610e4","slug":"blood-test-could-predict-people-at-risk-of-long-covid-lancet-study","type":"story","status":"publish","title_hn":"Covid-19: लांसेट के अध्ययन में दावा, ब्लड टेस्ट बता सकता है लंबे समय वाले संक्रमण की कितनी संभावना","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Covid-19: लांसेट के अध्ययन में दावा, ब्लड टेस्ट बता सकता है लंबे समय वाले संक्रमण की कितनी संभावना
Wed, 28 Sep 2022 06:13 PM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 28 Sep 2022 06:13 PM IST
सार
यूसीएल के अध्ययन के प्रमुख लेखक गेबी कैप्टर ने कहा कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि हल्के या बिना लक्षण वाले कोविड-19 भी हमारे रक्त प्लाज्मा में प्रोटीन के प्रोफाइल को बाधित करते हैं।
विज्ञापन
blood test
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
रक्त परीक्षण से यह अनुमान लग सकता है कि क्या कोरोना वायरस (SARS-CoV-2) से संक्रमित व्यक्ति में लंबे समय लक्षण बने रहेंगे, लैंसेट eBioMedicine जर्नल में यह अध्ययन प्रकाशित किया गया है। कोविड-19 से संक्रमित कुछ लोगों में संक्रमण का लंबे समय तक असर रहता है, जिसे लॉन्ग कोविड के रूप में जाना जाता है। यूके में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के शोधकर्ताओं ने SARS-CoV-2 से संक्रमित स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों के रक्त में प्रोटीन का विश्लेषण किया, उनकी तुलना उन लोगों के नमूनों से की जो संक्रमित नहीं थे। उन्होंने संक्रमण के छह सप्ताह बाद तक प्रोटीन के स्तर में नाटकीय अंतर पाया, जो कई महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रियाओं में व्यवधान को दर्शाता है।
विज्ञापन
लोगों में लंबे कोविड विकसित होने की संभावना का अनुमान लग सकता है
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एल्गोरिथम का उपयोग करते हुए टीम ने विभिन्न प्रोटीनों की प्रचुरता में एक सिग्नेचर की पहचान की, जिसने सटीक तौर पर बताया कि व्यक्ति में संक्रमण के एक साल बाद लगातार लक्षण दिखेंगे या नहीं। शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि इन निष्कर्षों को रोगियों के एक बड़े, स्वतंत्र समूह में दोहराया जाता है तो संभावित रूप से एक पोलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) टेस्ट के साथ एक अन्य परीक्षण के साथ लोगों में लंबे कोविड विकसित होने की संभावना का अनुमान लग सकता है। यूसीएल के अध्ययन के प्रमुख लेखक गेबी कैप्टर ने कहा कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि हल्के या बिना लक्षण वाले कोविड-19 भी हमारे रक्त प्लाज्मा में प्रोटीन के प्रोफाइल को बाधित करते हैं।
विज्ञापन
थोड़े समय में हजारों नमूनों का विश्लेषण कर सकता है
कैप्चर ने कहा, इसका मतलब है कि संक्रमण के कम से कम छह सप्ताह बाद तक हल्का कोविड-19 भी सामान्य जैविक प्रक्रियाओं को नाटकीय रूप से प्रभावित करता है। अध्ययन के वरिष्ठ लेखक वेंडी ने कहा, अध्ययन में इस्तेमाल विश्लेषण की विधि अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध है और उच्च-थ्रूपुट है, जिसका अर्थ है कि यह थोड़े समय में हजारों नमूनों का विश्लेषण कर सकता है। यदि हम ऐसे लोगों की पहचान कर सकते हैं, जिनके लंबे समय तक कोविड संक्रमित होने की संभावना है, तो इससे पहले प्रारंभिक संक्रमण चरण में एंटीवायरल जैसे परीक्षण उपचार का रास्ता खुल जाता है।
विज्ञापन
54 स्वास्थ्य कर्मचारियों के रक्त प्लाज्मा के नमूनों का विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने 54 स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों के रक्त प्लाज्मा के नमूनों का विश्लेषण किया, जिनके पास पीसीआर या एंटीबॉडी-पुष्टि संक्रमण था, जो हर हफ्ते वसंत 2020 में छह सप्ताह के लिए लिया जाता था। उन्होंने उन नमूनों की तुलना 102 स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों से की, जो संक्रमित नहीं थे। शोधकर्ताओं ने यह देखने के लिए कि कोविड-19 ने छह सप्ताह के दौरान इन प्रोटीनों को कैसे प्रभावित किया, लक्षित मास स्पेक्ट्रोमेट्री का उपयोग किया। यह विश्लेषण का एक रूप है जो रक्त प्लाज्मा में प्रोटीन की मात्रा में छोटे बदलावों के प्रति बेहद संवेदनशील होता है। उन्होंने SARS-CoV-2 से संक्रमित लोगों में से 91 में से 12 प्रोटीन का असामान्य रूप से उच्च स्तर पाया।