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Hindi News ›   World ›   BioNTech eyes Covid vaccine for 12 to 15 year old kids from June in EU:

राहत: जून तक यूरोप में आ जाएगी बच्चों की कोरोना वैक्सीन, बायोएनटेक टीके पर कर रही काम

Thu, 29 Apr 2021 03:11 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: प्रियंका तिवारी Updated Thu, 29 Apr 2021 03:11 PM IST
सार

जर्मनी की दवा कंपनी बायोएनटेक का कहना है कि वह यूरोप में 12 से 15 साल के बच्चों के लिए जून में कोरोना की वैक्सीन लॉन्च करेगी।

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BioNTech eyes Covid vaccine for 12 to 15 year old kids from June in EU:
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना वायरस से हर उम्र के लोग संक्रमित हो जा रहे हैं। इस महामारी को खत्म करने के लिए फिलहाल जो टीके बनाए गए हैं वे केवल वयस्कों के लिए ही है। हालांकि, जल्द ही बच्चों के लिए भी इस घातक बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन आ जाएगी। दरअसल, जर्मनी की दवा कंपनी बायोएनटेक का कहना है कि वह यूरोप में 12 से 15 साल के बच्चों के लिए जून में कोरोना की वैक्सीन लॉन्च करेगी। 

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बता दें फाइजर और उसकी सहयोगी जर्मन कंपनी बायोएनटेक ने इसी साल मार्च के अंत में यह दावा किया था कि उसकी कोविड-19 वैक्सीन 12 साल से बड़ी उम्र के बच्चों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित और व्यस्कों की तरह ही कोराना वायरस महामारी का असर रोकने में कारगर है। कंपनी ने 12 से 15 साल की उम्र वाले 2260 अमेरिकी वॉलेंटियरों को कोरोना की वैक्सीन देने के बाद सामने आए प्राथमिक डाटा के आधार पर यह दावा किया।   
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फाइजर का यह दावा स्कूलों में बच्चों को वापस लौटाने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। फाइजर के सीईओ अर्ल्बअ बौरला ने कहा कि उनकी कंपनी जल्द ही 12 साल से बड़ी उम्र के बच्चों के लिए वैक्सीन उपयोग की आपातकालीन मंजूरी मांगने के लिए यूएसएफडीए और यूरोपीय नियामकों के पास आवेदन दाखिल करेगी।  
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कई कंपनियां बना रहीं टीका  
उल्लेखनीय है कि केवल फाइजर व बायोएनटेक ही नहीं बल्कि करीब आधा दर्जन से अधिक कंपनियां बच्चों के लिए कोरोना वायरस से बचाव का टीका बाजार में उतारने की होड़ में जुटी हुई हैं। कंपनियों का दावा है कि जल्द ही छह माह के बच्चे के लिए भी बाजार में कोरोना टीका उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस महामारी को रोकना है तो बच्चों का भी टीकाकरण करना ही होगा। 

अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना भी 12 से 17 साल तक के बच्चों पर कोरोना वैक्सीन के प्रभाव को लेकर अध्ययन कर रही है। सूत्रों का कहना है कि मॉडर्ना के अध्ययन में सामने आए तथ्य बेहद सकारात्मक हैं। इसके चलते यूएसएफडीए पहले ही फाइजर और मॉडर्ना को 6 साल की उम्र वाले नवजात बच्चे तक पर कोविड-19 के प्रभाव पर शोध करने की अनुमति दे चुका है।

इन दोनों कंपनियों के अलावा एस्ट्राजेनेका पिछले महीने ही ब्रिटेन में 6 से 17 साल तक की उम्र वाले बच्चों पर अपनी वैक्सीन के प्रभाव पर शोध शुरू कर चुकी है।




जॉनसन एंड जॉनसन भी अपने पीडियाट्रिक अध्ययन शुरू करने जा रहा है, जबकि चीन की सिनोवेक कंपनी ने हाल ही में दावा किया था कि उसने 3 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए अपनी वैक्सीन सुरक्षित होने से जुड़ा प्राथमिक डाटा चीनी नियामकों को सौंप दिया है।

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