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'डोनाल्ड ट्रंप को बयान देने के लिए मजबूर किया जाए': बीबीसी ने अदालत से लगाई गुहार, पूरा मामला क्या है?

Fri, 16 Oct 2026 04:42 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 16 Oct 2026 04:42 AM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 10 अरब डॉलर के मानहानि मुकदमे में नया मोड़ आया है। बीबीसी का आरोप है कि ट्रंप बयान देने में देरी कर रहे हैं और अब जनवरी 2027 तक का समय चाहते हैं। आखिर अपनी ही कानूनी लड़ाई में बयान देने से क्यों बच रहे हैं ट्रंप? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 

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BBC asks judge to force Trump to sit for deposition in his own lawsuit against the channel
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

बीबीसी के वकीलों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही मुकदमे में बयान देने से बच रहे हैं। ट्रंप ने ब्रिटिश प्रसारक बीबीसी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया है। अब वह जनवरी 2027 तक अपना बयान टालना चाहते हैं।
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बीबीसी ने अदालत से क्या अनुरोध किया?
इस सप्ताह बीबीसी के वकीलों ने फ्लोरिडा की अदालत में याचिका दाखिल की। उन्होंने अदालत से मांग की कि ट्रंप को बयान देने के लिए मजबूर किया जाए। यह मामला 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने से जुड़ा है। वकीलों के मुताबिक, ट्रंप ने इस सप्ताह बयान देने की तय तारीख रद्द कर दी। इसके लिए उन्होंने 'राष्ट्रीय महत्व के मामलों' का हवाला दिया।
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बीबीसी के वकील चार्ल्स डी. टोबिन ने अदालत में कहा कि सबूत जुटाने के लिए अब सिर्फ दो महीने बचे हैं। इसके बावजूद बीबीसी ट्रंप का बयान नहीं ले पाया है। ट्रंप इस मामले में सबसे अहम व्यक्ति हैं, क्योंकि मुकदमा उन्होंने ही दायर किया है। वकीलों के पास उनका बयान लेने की कोई नई तारीख भी नहीं है।
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टोबिन ने कहा कि बार-बार हो रही देरी से दोनों पक्षों के बीच सहयोग की भावना को नुकसान पहुंचा है। इससे बीबीसी जरूरी सबूत भी नहीं जुटा पाया है। ये सबूत अपने बचाव में मजबूती से मुकदमा लड़ने के लिए जरूरी हैं।

ट्रंप ने बीबीसी पर मुकदमा क्यों किया था?
ट्रंप पहले भी अदालत में बयान देने से बचते रहे हैं। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में बीबीसी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने 10 अरब अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग की थी। ट्रंप ने बीबीसी पर मानहानि करने का आरोप लगाया था। उन्होंने भ्रामक और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का आरोप भी लगाया था। यह मामला बीबीसी की एक डॉक्यूमेंट्री से जुड़ा है। इसका नाम 'ट्रंप: ए सेकंड चांस' है।

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डॉक्यूमेंट्री में क्या दिखाया गया था?
ब्रिटेन के सरकारी पैसे से चलने वाले राष्ट्रीय प्रसारक बीबीसी ने माना था कि डॉक्यूमेंट्री में ट्रंप के भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ दिया गया था। ट्रंप ने यह भाषण 6 जनवरी, 2021 को अपने समर्थकों को दिया था। उसी दिन उनके समर्थकों ने अमेरिकी संसद भवन कैपिटल पर धावा बोला था। भाषण के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने से ऐसा लगा कि ट्रंप सीधे अपने समर्थकों को हिंसा के लिए उकसा रहे थे।

ट्रंप ने अपने 33 पन्नों के मुकदमे में बीबीसी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि प्रसारक ने उन्हें झूठे और मानहानिकारक तरीके से पेश किया। उनके मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री में उनकी छवि खराब की गई। इसे भ्रामक, अपमानजनक, भड़काऊ और दुर्भावनापूर्ण बताया गया। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया था कि बीबीसी ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दखल देने और उसे प्रभावित करने की बेशर्म कोशिश की।

बीबीसी ने वीडियो में किए गए बदलाव के लिए ट्रंप से माफी मांगी थी। इसके बाद बीबीसी के प्रमुख और उसके शीर्ष समाचार अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बीबीसी ने ट्रंप के इस आरोप को खारिज किया है कि उसने उनकी मानहानि की।

पहले बयान की तारीख कैसे तय हुई थी?
इस सप्ताह अदालत में दाखिल याचिका में बीबीसी के वकीलों ने बताया कि उन्होंने जुलाई में ही ट्रंप का बयान लेने के लिए तारीख मांगी थी। इसके बाद उन्होंने कई बार संपर्क किया। आखिरकार, दोनों पक्ष 16 अक्टूबर को बयान दर्ज करने पर सहमत हो गए थे।

ट्रंप ने तय तारीख पर बयान क्यों नहीं दिया?
लेकिन कई हफ्तों तक ट्रंप की ओर से कोई जवाब नहीं आया। बीबीसी के वकीलों के मुताबिक, 28 सितंबर, 2026 को ट्रंप के वकील ने बताया कि राष्ट्रपति 16 अक्टूबर को बयान नहीं दे सकेंगे। उन्होंने इसकी वजह राष्ट्रीय महत्व के दूसरे मामले बताए। ट्रंप के वकील ने कहा था कि वह उसी सप्ताह के अंत तक बयान के लिए दूसरी तारीख देने की कोशिश करेंगे। लेकिन उन्होंने कोई नई तारीख नहीं दी।

अब जनवरी 2027 तक क्यों टला बयान?
बीबीसी के वकीलों ने बताया कि पिछले सप्ताह उन्हें एक और जानकारी दी गई। उन्हें कहा गया कि ट्रंप 18 दिसंबर से पहले बयान देने के लिए बिल्कुल उपलब्ध नहीं हैं। 18 दिसंबर को मामले में सबूत जुटाने की समय-सीमा खत्म होनी है। इसके बजाय, ट्रंप जनवरी 2027 के दूसरे या तीसरे सप्ताह में बयान देने के लिए तैयार होंगे। बीबीसी के वकीलों का कहना है कि इससे मामले में और देरी होगी।


ट्रंप की कानूनी टीम ने क्या कहा?
याचिका पर ट्रंप की कानूनी टीम के एक प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप बयान देने में देरी क्यों कर रहे हैं। उन्होंने बीबीसी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को फिर दोहराया। प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति बीबीसी को मानहानि और चुनाव में लापरवाही से दखल देने के लिए जवाबदेह ठहरा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने गलत खबरें देने वाले दूसरे मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों को भी उनकी गलतियों के लिए जवाबदेह ठहराया है।

पहले भी मुकदमा वापस ले चुके हैं ट्रंप?
ट्रंप ने 2023 में अपने पूर्व वकील और करीबी सहयोगी माइकल कोहेन के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया था। उन्होंने उस मामले में 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हर्जाने की मांग की थी। लेकिन बयान दर्ज होने की तय तारीख से कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने अपनी मर्जी से वह मुकदमा वापस ले लिया था।
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