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UK: 15 साल की शमीमा ब्रिटेन से सीरिया भाग ISIS से जुड़ी, वर्षों बाद अब वापसी की जुगत; नागरिकता आवेदन खारिज
Fri, 23 Feb 2024 08:24 PM IST
आदर्श शर्मा
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क,अमर उजाला, लंदन
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 23 Feb 2024 08:24 PM IST
सार
आईएसआईएस में शामिल होने की मंशा से ब्रिटेन से सीरिया में गई शमीमा बेगम ने ब्रिटेन लौटने और नागरिकता हासिल करने के लिए अपील की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
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- फोटो : google
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विस्तार
लंदन में जन्मी बांग्लादेशी मूल की शमीमा बेगम की नागरिकता हासिल अपीलि खारिज कर दी गई है। गौरतलब है कि 15 वर्ष की उम्र में आईएसआईएस आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए वह भाग गई थी। शुक्रवार को ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने और सीरिया से ब्रिटेन वापस लौटने की एक और कानूनी अपील को खारिज कर दिया गया है। इससे पहले 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने ब्रिटेन लौटने से रोकने के फैसले को बरकरार रखा था।
ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के लिए किया आवेदन
कई कानूनी लड़ाइयों के बाद बेगम पिछले साल फरवरी में विशेष आव्रजन अपील आयोग (एसआईएसी) में एक चुनौती हार गईं और फिर अपना मामला अपील अदालत में ले गईं। हालांकि, अपील न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से विशेष न्यायाधिकरण के फैसले से सहमति व्यक्त की और अपील को खारिज कर दिया। लंदन में फैसला सुनाते हुए जज डेम सू कैर ने कहा, "हो सकता है कि बेगम दूसरों से प्रभावित और चालाकी से प्रभावित हुई हों, लेकिन फिर भी उन्होंने सीरिया की यात्रा करने और आईएसआईएस के साथ जुड़ने का फैसला किया था
कौन है शमीमा बेगम
शमीमा बेगम, जो उत्तरी सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में हैं। उसकी अपील पर बैरिस्टर सामंथा नाइट्स ने प्रतिनिधित्व किया था, जिन्होंने तर्क दिया था कि सरकार तस्करी के संभावित शिकार के कानूनी कर्तव्यों पर विचार करने में विफल रही है। ब्रिटेन के गृह कार्यालय ने जोर देकर कहा कि मामले का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द था। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि बेगम अपनी विरासत को देखते हुए बांग्लादेशी पासपोर्ट की मांग कर सकती हैं, लेकिन उनके परिवार ने तर्क दिया है कि वह ब्रिटिश हैं और उनके पास कभी भी बांग्लादेशी नागरिकता नहीं रही है।
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ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के लिए किया आवेदन
कई कानूनी लड़ाइयों के बाद बेगम पिछले साल फरवरी में विशेष आव्रजन अपील आयोग (एसआईएसी) में एक चुनौती हार गईं और फिर अपना मामला अपील अदालत में ले गईं। हालांकि, अपील न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से विशेष न्यायाधिकरण के फैसले से सहमति व्यक्त की और अपील को खारिज कर दिया। लंदन में फैसला सुनाते हुए जज डेम सू कैर ने कहा, "हो सकता है कि बेगम दूसरों से प्रभावित और चालाकी से प्रभावित हुई हों, लेकिन फिर भी उन्होंने सीरिया की यात्रा करने और आईएसआईएस के साथ जुड़ने का फैसला किया था
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कौन है शमीमा बेगम
शमीमा बेगम, जो उत्तरी सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में हैं। उसकी अपील पर बैरिस्टर सामंथा नाइट्स ने प्रतिनिधित्व किया था, जिन्होंने तर्क दिया था कि सरकार तस्करी के संभावित शिकार के कानूनी कर्तव्यों पर विचार करने में विफल रही है। ब्रिटेन के गृह कार्यालय ने जोर देकर कहा कि मामले का मुख्य फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा के इर्द-गिर्द था। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि बेगम अपनी विरासत को देखते हुए बांग्लादेशी पासपोर्ट की मांग कर सकती हैं, लेकिन उनके परिवार ने तर्क दिया है कि वह ब्रिटिश हैं और उनके पास कभी भी बांग्लादेशी नागरिकता नहीं रही है।
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