Bangladesh: आपसी रिश्तों में कड़वाहट के बीच हो रहा है अमेरिकी अधिकारियों का बांग्लादेश दौरा
अमेरिकी दल का कार्यक्रम मंगलवार से शुक्रवार तक बांग्लादेश में रहने का है। इसमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के प्रभारी सहायक विदेश मंत्री डॉनल्ड लू, नागरिक सुरक्षा और लोकतंत्र और मानव अधिकार मामलों की उप विदेश मंत्री उज़रा ज़ेया शामिल हैं...
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अमेरिका के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का बांग्लादेश दौरा दोनों देशों के रिश्तों में हाल में बढ़ी कड़वाहट के बीच हो रहा है। पिछले मई में अमेरिका की इस सार्वजनिक घोषणा से विवाद पैदा हुआ था कि बांग्लादेश में जो अधिकारी स्वतंत्र चुनाव में बाधा डालेंगे, उन पर वह प्रतिबंध लगा देगा। अमेरिकी दल की ताजा यात्रा पर उस विवाद का साया पड़ने की संभावना है। बांग्लादेश में अगले साल जनवरी में आम चुनाव होने वाले हैं।
पांच साल पहले हुए आम चुनाव के दौरान विपक्ष ने धांधली के आरोप लगाए थे। इस बार भी मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चुनाव से पहले निष्पक्ष कार्यवाहक सरकार बनाने की मांग कर रही है। प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के नेतृत्व वाली अवामी लीग 2009 से लगातार सत्ता में है। उसने कार्यवाहक सरकार बनाए जाने की मांग को सिरे से ठुकरा दिया है।
पिछले हफ्ते अवामी लीग सरकार पर यह आरोप लगा कि वह चुनाव आयोग के अधिकार कम कर रही है। इसके पहले सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसके जरिए हिंसा या चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगने पर चुनाव नतीजों को रद्द करने के आयोग के अधिकार को खत्म कर दिया गया।
अमेरिकी दल का कार्यक्रम मंगलवार से शुक्रवार तक बांग्लादेश में रहने का है। इसमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के प्रभारी सहायक विदेश मंत्री डॉनल्ड लू, नागरिक सुरक्षा और लोकतंत्र और मानव अधिकार मामलों की उप विदेश मंत्री उज़रा ज़ेया शामिल हैं। इस दल की यात्रा का मकसद या पूरा कार्यक्रम क्या है, इस बारे में अमेरिका की तरफ से ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। उज़रा ज़ेया के कार्यालय से यह जरूर बताया गया है कि प्रतिनिधिमंडल की बांग्लादेश के अधिकारियों से बातचीत होगी, जिनमें कई मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। उन मुद्दों स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव, मानव अधिकार और मानव तस्करी आदि शामिल हैं।
यात्रा से ठीक पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमिन ने कहा- ‘हम अमेरिका के साथ जारी संवाद का स्वागत करते हैं। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।’ पिछले मई में अमेरिका ने बांग्लादेश में ‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव को प्रोत्साहित’ करने की नीति का एलान किया था। इसमें कहा गया था कि जिस अधिकारी के बारे में भी शक हुआ कि उसने लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया में रुकावट डाली है, उसे अमेरिकी वीजा से वंचित कर दिया जाएगा। इस अमेरिकी एलान पर प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। अवामी लीग की तरफ से कहा गया था कि यह अमेरिकी रुख बांग्लादेश की निर्वाचित सरकार को पलटने की कोशिश जैसा मालूम पड़ता है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक बांग्लादेश के कई बड़े नेताओं और अफसरों के रिश्तेदार अमेरिका में रहते हैं। इस कारण अमेरिकी धमकी से वे डरे हुए हैं। समझा जाता है कि बांग्लादेश के अधिकारियों और कारोबारियों के वित्तीय हित भी अमेरिका से जुड़े हुए हैं। लेकिन विश्लेषकों ने अमेरिकी रुख को बांग्लादेश के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बताया है। ढाका यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर दिलावर हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘अमेरिका को चाहिए कि वह बांग्लादेश के प्रति अपना नजरिया बदले। एक तरफ पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता पर वह चुप है, जबकि बांग्लादेश को लेकर चिंता जता रहा है, जहां जीवंत राजनीतिक प्रक्रिया चल रही है।’