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Bangladesh: शेख हसीना पर बड़ा कानूनी एक्शन, ITC ने तय किए ये आरोप; पूर्व पीएम बोलीं- यह न्याय नहीं, राजनीति है

Tue, 23 Dec 2025 06:50 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 23 Dec 2025 06:50 PM IST
सार

बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 17 लोगों पर जबरन गुमशुदगी के आरोप तय किए हैं। हसीना ने फैसले को राजनीतिक साजिश बताया है। अंतरिम सरकार, प्रस्तावित चुनाव और भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विवाद और गहरा गया है।

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bangladesh sheikh hasina 16 others indicted at ict over allegations of enforced disappearances
अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और मो. यूनुस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेश की राजनीति और न्याय व्यवस्था एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत 17 लोगों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में आरोप तय कर दिए हैं। ये आरोप अवामी लीग के शासनकाल के दौरान कथित जबरन गुमशुदगियों से जुड़े हैं। इस फैसले ने बांग्लादेश में पहले से जारी सियासी अस्थिरता और कानूनी टकराव को और तेज कर दिया है।

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आईसीटी की तीन सदस्यीय पीठ ने चार आरोप पढ़ने के बाद यह आदेश पारित किया। आरोपियों में शेख हसीना के पूर्व रक्षा और सुरक्षा सलाहकार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) तारिक अहमद सिद्दीक, सेना के 11 अधिकारी और रैपिड एक्शन बटालियन (रैब) के पूर्व अधिकारी शामिल हैं। कार्यवाही के दौरान पेश किए गए 10 रैब अधिकारियों ने खुद को निर्दोष बताया और न्याय मिलने की उम्मीद जताई। अभियोजन पक्ष के अनुसार 2016 से 2024 के बीच कम से कम 14 लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया गया। न्यायाधिकरण ने इस मामले में 21 जनवरी को शुरुआती बहस की तारीख तय की है।
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क्या बोलीं शेख हसीना?
 शेख हसीना ने इस पूरे मामले को न्यायिक नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्रवाई करार दिया है। उन्होंने आईसीटी के फैसले को न्यायिक लबादे में राजनीतिक हत्या बताया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने और मनचाहे वकील नियुक्त करने का अधिकार नहीं दिया गया। हसीना ने आरोप लगाया कि अवामी लीग को निशाना बनाकर सुनियोजित ‘विच हंट’ चलाया जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने बांग्लादेश के संवैधानिक ढांचे में भरोसा जताया और कहा कि वैध शासन लौटने पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहाल होगी।

अंतरिम सरकार, चुनाव और भारत से रिश्ते
इस पूरे घटनाक्रम के बीच हसीना ने अंतरिम सरकार के मुखिया यूनुस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अवामी लीग पर प्रतिबंध के बीच फरवरी में प्रस्तावित चुनाव लोकतांत्रिक नहीं होंगे। अवामी लीग के बिना चुनाव, चुनाव नहीं बल्कि ताजपोशी है। हसीना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी के लिए भी अंतरिम प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफलता और भारत विरोधी बयानबाजी से हालात बिगड़े हैं। उन्होंने भारत को बांग्लादेश का सबसे भरोसेमंद साझेदार बताते हुए कहा कि वैध शासन लौटते ही रिश्ते फिर पटरी पर आएंगे।

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