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Bangladesh: 'शेख हसीना को वापस बांग्लादेश भेजे भारत; अंतरिम यूनुस सरकार ने भेजा राजनयिक नोट

Mon, 23 Dec 2024 04:16 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 23 Dec 2024 04:16 PM IST
सार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच पांच अगस्त को भारत चली गई थीं। इस दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में कई लोग घायल हुए। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 753 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

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Bangladesh sends note verbale asking India to send back deposed PM Hasina
मोहम्मद यूनुस और शेख हसीना - फोटो : ANI

विस्तार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका वापस भेजने के लिए भारत को एक राजनयिक नोट भेजा है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने अपने कार्यालय में सोमवार इसकी जानकारी दी। 

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उन्होंने कहा कि हमने भारत सरकार को एक नोट वर्बल (राजनयिक संदेश) भेजा है जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश न्यायिक प्रक्रिया के लिए शेख हसीना को वापस चाहता है। 
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इससे पहले आज दिन में, गृह सलाहकार जहांगीर आलम ने कहा कि उनके कार्यालय ने अपदस्थ प्रधानमंत्री के भारत से प्रत्यर्पण की सुविधा के लिए विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। प्रक्रिया अभी चल रही है। उन्होंने कहा कि ढाका और नई दिल्ली के बीच प्रत्यर्पण संधि पहले से मौजूद है और संधि के तहत हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जा सकता है।
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हमें बांग्लादेश उच्चायोग से मौखिक नोट मिला :विदेश मंत्रालय
इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध के संबंध में बांग्लादेश उच्चायोग से मौखिक नोट मिला है। हालांकि इस समय हमारे पास इस मामले पर टिप्पणी करने के लिए कुछ नहीं है। वहीं, सूत्रों का कहना है कि भारत बांग्लादेश के आग्रह पर तत्काल जवाब न देकर मामले को लंबा खींच सकता है। साथ ही दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के प्रावधानों के आधार पर अनुरोध को खारिज भी कर सकता है।

बीते माह इंटरपोल से मदद मांगने की भी कही थी बात
इससे पहले बीते माह  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने  कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन में हुई मौतों का मुकदमा चलाने के लिए उनको बांग्लादेश लाया जाएगा। इसके लिए अंतरिम सरकार इंटरपोल की मदद मांगेगी।  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कानून मामलों के सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा था कि इंटरपोल के जरिये बहुत जल्द रेड नोटिस जारी किया जाएगा। चाहे ये फासीवादी लोग दुनिया में कहीं भी छिपे हों, उन्हें वापस लाया जाएगा और अदालत में जवाबदेह ठहराया जाएगा। 17 अक्तूबर को न्यायाधिकरण ने हसीना और 45 अन्य के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे। इसमें उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और उनके कई पूर्व कैबिनेट सदस्य शामिल हैं।

पांच अगस्त से भारत में हैं शेख हसीना
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अपनी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर छात्र नेतृत्व वाले विद्रोह के बीच पांच अगस्त को भारत चली गई थीं। इस दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में कई लोग घायल हुए। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुताबिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 753 लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।

इस मामले में हसीना और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ अपराध और नरसंहार की 60 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के खिलाफ 225 मामले दर्ज हैं, इनमें हत्या के 194, मानवता के विरुद्ध अपराध और नरसंहार के 16 मामले, अपहरण के तीन मामले, हत्या के प्रयास के 11 मामले और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ की रैली पर हमले के संबंध में एक मामला शामिल है।

बांग्लादेश में क्यों भड़की हिंसा?
बांग्लादेश को साल 1971 में आजादी मिली थी। आजादी के बाद से ही बांग्लादेश में आरक्षण व्यवस्था लागू है। इसके तहत स्वतंत्रता सेनानियों के बच्चों को 30 प्रतिशत, देश के पिछड़े जिलों के युवाओं को 10 प्रतिशत, महिलाओं को 10 प्रतिशत, अल्पसंख्यकों के लिए 5 प्रतिशत और दिव्यांगों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। इस तरह बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में 56 प्रतिशत आरक्षण था। साल 2018 में बांग्लादेश के युवाओं ने इस आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन किया। कई महीने तक चले प्रदर्शन के बाद बांग्लादेश सरकार ने आरक्षण खत्म करने का एलान किया।


5 जून को बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने देश में फिर से आरक्षण की पुरानी व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया। शेख हसीना सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील भी की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश को बरकरार रखा। इससे छात्र नाराज हो गए और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बांग्लादेश के विश्वविद्यालयों से शुरू हुआ ये विरोध प्रदर्शन बाद में बढ़ते-बढ़ते हिंसा में तब्दील हो गया था।

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