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रोहिंग्या संकट: बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने समाधान के लिए भारत से मदद का आग्रह किया, कही ये बात

Tue, 02 May 2023 08:13 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 02 May 2023 08:13 PM IST
सार

बांग्लादेश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को भारत से अनुरोध किया कि वह म्यांमार को रोहिंग्या समुदाय के लोगों को वापस लेने के लिए राजी करने के वास्ते और प्रभावी कदम उठाए।

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Bangladesh President seeks effective Indian assistance over Rohingya crisis
Bangladesh President Mohammed Shahabuddin - फोटो : Social Media

विस्तार

बांग्लादेश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को भारत से अनुरोध किया कि वह म्यांमार को रोहिंग्या समुदाय के लोगों को वापस लेने के लिए राजी करने के वास्ते और प्रभावी कदम उठाए। रोहिंग्या समुदाय के इन लोगों ने अपने देश म्यांमार में उत्पीड़न से बचने के लिए बांग्लादेश में शरण ली है।

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राष्ट्रपति ने भारतीय उच्चायुक्त से किया अनुरोध
राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास के एक प्रवक्ता ने पत्रकारों से बातचीत में बताया भारतीय उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा के साथ बंगभवन में मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने यह अनुरोध किया। 73  वर्षीय शहाबुद्दीन ने देश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में 24 अप्रैल को शपथ ली थी। शहाबुद्दीन ने अब्दुल हामिद का स्थान लिया, जिनका कार्यकाल 23 अप्रैल को समाप्त हो गया था।
 

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शहाबुद्दीन को राष्ट्रपति मुर्मू और मोदी की से दी बधाई
भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट किया कि वर्मा ने राष्ट्रपति शहाबुद्दीन से शिष्टाचार मुलाकात की और उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से हार्दिक बधाई दी और हाल के द्विपक्षीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। 
 

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'लंबे समय तक यहां रहने से पैदा हो रही समस्याएं'शहाबुद्दीन ने बैठक में आतंकवाद समेत बढ़ते सुरक्षा खतरों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने मानवीय कारणों से रोहिंग्या समुदाय को आश्रय दिया था, लेकिन लंबे समय से उनके यहां रहने के कारण न केवल दक्षिण एशियाई देश, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए समस्याएं पैदा हो रही हैं।
 

म्यांमार के रखाइन प्रांत से भागे थे दस लाख लोग
म्यांमार की सेना की कार्रवाई के कारण वर्ष 2017 में रखाइन प्रांत से करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान वहां से भाग आए थे और वे बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शिविरों में रह रहे हैं। भारत ने म्यांमार के रखाइन प्रांत के विस्थापितों की स्थायी और शीघ्र वापसी का हमेशा आह्वान किया है और इस मुद्दे को हल करने के लिए बांग्लादेश और म्यांमार के साथ मिलकर काम किया है।

 

बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का हिस्सा थे शहाबुद्दीन
राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने संबंधों को अत्यधिक महत्व देता है, जो भौगोलिक निकटता, साझा इतिहास और बलिदान के कारण अत्यंत निकट हैं। उन्होंने मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत और अनूठा  करार दिया। शहाबुद्दीन ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भी भाग लिया था। उन्होंने मुक्ति संग्राम के दौरान 1971 में भारत में प्राप्त प्रशिक्षण को भी याद किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत के प्रधानमंत्रियों ने हाल में एक-दूसरे देशों का दौरा किया और उनकी यात्राओं ने दोनों देशों के बीच संबंधों का एक नया अध्याय खोला है।
 

माल ढुलाई के लिए चटगांव और मोंगला बंदरगाह तक पहुंच
शहाबुद्दीन ने कहा कि बांग्लादेश ने मुख्य भूमि से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में माल ढुलाई के लिए भारत को चटगांव और मोंगला बंदरगाह तक पहुंच प्रदान की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल में माल ढुलाई में लगने वाले समय और लागत में काफी कमी आएगी और बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों ने 2018 में एसीएमपी (चटगांव और मोंगला बंदरगाह) समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और यह सौदा व्यापार और वाणिज्य बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगा।

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