बांग्लादेश: एक-दूसरे के हमलों से अवामी लीग और बीएनपी दोनों जख्मी, प्रधानमंत्री के बेटे पर लगाया बड़ा आरोप
लॉबिंग के मामले में सरकार को घेरने के लिए बीएनपी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने 2005 से 2007 के बीच लॉबिंग पर 90 लाख डॉलर खर्च किए। उन्होंने दावा किया कि इस बात के सबूत अमेरिकी वेबसाइटों पर मौजूद हैं...
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बांग्लादेश के मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने फिर से सत्ताधारी अवामी लीग पर विदेशों में लॉबिस्ट्स की मदद लेकर अपनी छवि सुधारने का इल्जाम मढ़ा है। इस बार खास बात यह है कि उसने निशाने पर सीधे प्रधानमंत्री के बेटे संजीब वाजेद जॉय को लिया है। इस तरह उसने प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। इस बीच बीएनपी प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अचानक अस्पताल से घर लौट जाने का मामला भी अब गरमा रहा है। अस्पताल में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण के बढ़े खतरे के कारण खालिदा जिया अपने घर चली गई हैं।
सजीब वाजेद जॉय पर आरोप
लॉबिंग के मामले में सरकार को घेरने के लिए बीएनपी ने मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। उसे पार्टी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने संबोधत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने 2005 से 2007 के बीच लॉबिंग पर 90 लाख डॉलर खर्च किए। उन्होंने दावा किया कि इस बात के सबूत अमेरिकी वेबसाइटों पर मौजूद हैं। अब बीएनपी ने जॉय से उस धन का स्रोत बताने की मांग की है। फखरुल ने पूछा- ‘ये धन बांग्लादेश से अमेरिका किस माध्यम से गया?’
कुछ समय पहले सत्ताधारी दल ने बीएनपी पर विदेशों में लॉबिंग करने का आरोप लगाया था। प्रेस कांफ्रेंस में इस बारे में फखरुल से सवाल पूछे गए। तो इस पर बचाव की मुद्रा में आए बीएनपी नेता ने कहा कि अगर विदेश में रहने वाले कुछ बांग्लादेशियों ने देश में लोकतंत्र और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दों पर कोई कदम उठाया, तो ऐसा उन्होंने अपने देश से अपने प्यार की वजह से किया। इसके लिए बीएनपी जिम्मेदार नहीं है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये बात कह कर फखरुल ने यह स्वीकार कर लिया कि बीएनपी के पक्ष में अमेरिका में लॉबिंग की गई थी।
फखरुल ने यह स्वीकार किया कि देश में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के मामले में बीएनपी ने विदेशी एजेंसियों को पत्र लिखा था। इस मामले के सामने आने के बाद से बीएनपी घिरी रही है। लेकिन इस पर सफाई देते हुए बीएनपी महासचिव ने कहा कि उनकी पार्टी ने लॉबिस्ट्स की नियुक्ति के लिए नहीं, बल्कि विकास सहायता देने वाली एजेंसियों से मानवाधिकारों की रक्षा की गुहार लगाने के लिए पत्र भेजा था।
दोनों प्रमुख पार्टियां घिरीं
विश्लेषकों का कहना है कि देश के मुद्दे पर विदेशों में प्रचार करने के आरोप से देश की दोनों प्रमुख पार्टियां घिरी हुई हैं। इसलिए इस मुद्दे पर वे कोई सियासी फायदा हासिल कर सकेंगी, इसमें संदेह है। इस बीच खालिदा जिया के अस्पताल से घर चले जाने से बीएनपी को फिर से उनकी सेहत का मुद्दा उठाने का मौका मिला है। 81 दिन तक अस्पताल में रहने के बाद 76 वर्षीया बेगम जिया वहां कोरोना संक्रमण के कथित रूप से बढ़े खतरे के कारण अपने घर चली गई हैं।
बीएनपी इलाज के लिए बेगम जिया को विदेश ले जाने की इजाजत मांगती रही है। उसका कहना है कि बांग्लादेश के अस्पतालों में बेगम जिया का उचित इलाज संभव नहीं है। लेकिन सरकार का कहना है कि बेगम जिया भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता हैं, इसलिए उन्हें ऐसी इजाजत नहीं मिल सकती। अब ताजा घटनाक्रम से ये मामला फिर गरमा रहा है।